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रांची एक्सप्रेस प्रबंधन के वकील ने श्रम विभाग के अधिकारी से कहा- ‘हम आपका आदेश मानने को बाध्य नहीं!’

‘रांची एक्सप्रेस’ अखबार में कार्यरत एक वरिष्ठ उपसंपादक द्वारा अपने तीन माह के बकाया वेतन मांगने पर नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर करने के मामले की सुनवाई के दौरान श्रम विभाग के पदाधिकारी के सामने अखबार प्रबंधन की काफी किरकिरी हुई. इस मामले में झारखंड सरकार के उप श्रमायुक्त कार्यालय की तरफ से 4.08.2017 को उक्त कार्यालय में अखबार के प्रबंध निदेशक व एचआर हेड को मामले की जांच-पड़ताल एवं वार्ता के लिए बुलाया गया था. इस वार्ता में अखबार प्रबंधन की तरफ से सिर्फ एचआर हेड व एक नये एकाउंट एक्जीक्यूटिव ही उपस्थित हुए. एमडी नहीं आए.

‘रांची एक्सप्रेस’ अखबार में कार्यरत एक वरिष्ठ उपसंपादक द्वारा अपने तीन माह के बकाया वेतन मांगने पर नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर करने के मामले की सुनवाई के दौरान श्रम विभाग के पदाधिकारी के सामने अखबार प्रबंधन की काफी किरकिरी हुई. इस मामले में झारखंड सरकार के उप श्रमायुक्त कार्यालय की तरफ से 4.08.2017 को उक्त कार्यालय में अखबार के प्रबंध निदेशक व एचआर हेड को मामले की जांच-पड़ताल एवं वार्ता के लिए बुलाया गया था. इस वार्ता में अखबार प्रबंधन की तरफ से सिर्फ एचआर हेड व एक नये एकाउंट एक्जीक्यूटिव ही उपस्थित हुए. एमडी नहीं आए.

पहली डेट में शिकायत कर्ता पत्रकार व अखबार प्रबंधन की बातों को सुनने के बाद विभागीय पदाधिकारी ने समझौता करवा कर समस्या को हल करने का प्रयास किया. मगर प्रबंधन के लोग शिकायतकर्ता पत्रकार को अपने संस्थान का कर्मचारी न मानने की थोथी दलील देते रहे, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा सैलरी एकाउंट खोलने के लिए प्रधान संपादक की तरफ से जारी पत्र, बैंक एकाउंट पासबुक में दर्ज डिटेल दिखाया, जिससे यह साबित होता है कि उक्त वरिष्ठ उप संपादक ने उक्त समाचारपत्र के लिए संपादकीय विभाग में योगदान देने की तिथि से लेकर आफिस की उपस्थिति पंजी में दर्ज तिथि तक कार्य को पूरा किया है. मगर अखबार के एचआर हेड नियुक्ति पत्र दिखाने की जिद पर अड़े रहे. ऐसे में यह बड़ा ही हास्यापद लगा कि जब उन्होंने नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया तो उसे दिखाया कैसे किया जा सकता है.

पहले तो उन्होंने उक्त कर्मी को अपना कर्मचारी मानने से इनकार किया, फिर बाद में कहा कि वे पार्ट टाइम जॉब करते थे। उन्हें मालूम होना चाहिए कि किसी पंजीकृत अखबार में उप संपादक या वरिष्ठ उपसंपादक का कार्य पार्ट टाइम जॉब नहीं होता. मामले की सुनवाई के दौरान विभागीय पदाधिकारी द्वारा पिछले छह माह की उपस्थिति पंजी पेश करने के निर्देश को अखबार प्रबंधन ने धत्ता बताते हुए पहले तो टालमटोल किया. दूसरी डेट में प्रबंधन की तरफ से पेश हुए एक अधिवक्ता ने कहा कि वे इस मामले में और वक्त चाहते है. वे इस बार तैयारी करके नहीं आये हैं. इस पर सुनवाई विभागीय पदाधिकारी ने उन्हें एक बार और मौका दिया मगर अगले डेट 12.09.2017 को भी प्रबंधन के वकील उपस्थिति पंजी पेश करने में असफल रहे.

इस पर विभागीय पदाधिकारी काफी रंज भी हुईं तो उक्त अधिवक्ता ने कहा कि हम आपका निर्देश मानने के लिए बाध्य नहीं हैं. ऐसे में जहां झारखंड सरकार के श्रम मंत्री ने अभी हाल ही में यह बयान दिया है कि उनके राज्य में किसी भी मीडिया हाउस द्वारा उसमें कार्यरत पत्रकारों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ रांची एक्सप्रेस का नया प्रबंधन सच्चाई से मुंह मोड़ते हुए व विभागीय पदाधिकारी के निर्देशों को ताक पर रखते हुए अपनी हठधर्मिता पर आमादा है.

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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