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आज के अखबार : काश! कुम्भ में मरने के इच्छुक भक्तों और नकद मुआवाजा बांटती सरकार की ‘योजना’ बताते

संजय कुमार सिंह

हिन्दुस्तान टाइम्स में आज छपी रिधिमा गुप्ता की एक खबर के अनुसार, शनिवार को नई दिल्ली स्टेशन पर भगदड़ में मारे गए 18 लोगों में से कुछ को समय पर ऑक्सीजन दी जाती तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। मरीजों की देखभाल करने वाले दो डॉक्टर्स ने सोमवार को यह बात कही। कई पीड़ितों के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि स्टेशन पर या एम्बुलेंस में कहने पर भी ऑक्सीजन नहीं दी गई थी। भगदड़ में मारे गए 18 लोगों में से 15 के शव परीक्षण में मौत का कारण – “दर्दनाक श्वासावरोध” कहा गया है। यह दम घुटने की एक गंभीर स्थिति है जिसके बारे में डॉक्टरों का कहना है कि अगर ऑक्सीजन थेरेपी जल्दी दी जाए तो इलाज संभव हो सकता है। इससे पता चलता है कि कुछ पीड़ितों को समय पर मदद से बचाया जा सकता था। रेल मंत्री या सरकार की योजना, पहले से व्यवस्था नहीं होने का अफसोस, कारण तो छोड़िये आज यह खबर भी दूसरे अखबारों में ढूंढ़ने पर मिलेगी।

इतना सब हो जाने के बाद अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि रेलवे महा कुम्भ के लिए प्रयागराज तक की यात्रा करने के लिए आकर्षित कर सकने वाले विज्ञापनों और प्रचार सामग्री को हटाने पर विचार कर रहा है। यह ‘विचार’ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए विशेष तौर पर है और अभी विचार ही है। सच्चाई यह है कि 12 फरवरी को माघी पूर्णिमा स्नान के साथ कुंभ पर्व समाप्त हो चुका है। कुंभ पर्व केवल पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक ही था। अब जो है वो केवल मेला है। ऐसा शांभवी पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा है। पर अश्विनी वैष्णव जिस सरकार में मंत्री हैं और उस सरकार की जो पार्टी है उसने कुम्भ को ईवेंट बना रखा है और मेला हो या कुम्भ या महा कुम्भ वह उसी तरह जारी है। कायदे से भाजपा, सरकार और संघ परिवार को चाहिये था कि वे लोगों के बीच कुम्भ जाने का उत्साह कम करते और मिलकर काम करते। पर खबर (दरअसल वास्तविकता) को भी प्रचारित नहीं किया जा रहा है। मेला तो चल ही रहा है। आकर्षित करने वाले प्रचार और विज्ञापन भी हैं। रेलवे स्टेशन (और आस-पास) ऐसी सामग्री है जो लोगों को प्रयागराज की यात्रा करने के लिए आकर्षित कर सकती है। इसे रेल मंत्री ने ही स्वीकार किया है।  

यह सब यूं ही नहीं है। और 15 फरवरी की रात भगदड़ होने के बाद भी यात्रियों की भीड़ बनी हुई है तो उसका कारण है और उसे बेअसर करने के लिए पर्याप्त उपाय तो छोड़िये, कुछ किया ही नहीं गया है। यही नहीं, चार विशेष रेलगाड़ियां तो बाकायदा हादसे के बाद चलाने की घोषणा की गई है। कायदे से 12 के पहले से प्रचार किया जाना चाहिये था कि 12 के बाद कुंभ खत्म हो रहा है और कुम्भ के लिए प्रयागराज जाने का कोई मतलब नहीं है। जाने के इच्छुक लोगों से कहा जाना चाहिये था कि कुम्भ खत्म चुका है। उन्हें समझाया जाना चाहिये था कि इलाहाबाद ही नहीं, रास्ते में, ट्रेन में हर जगह क्षमता से ज्यादा भीड़ है और हादसा हो सकता है। हादसे से निपटने की तैयारी रहनी चाहिये थी ताकि नुकसान कम होता। पर वह सब तो छोड़िये, हादसे के बाद मरने वालों को मुआवाजा नकद दिया गया सरकारी कारण जो हो, हुआ यह कि मामला जल्दी निपटा। दूसरी ओर प्रचार हटाने पर अभी विचार ही चल रहा है। वास्तविकता यह है कि 12 को कुम्भ ‘खत्म’ होने बाद रेलवे ने ही कहा है कि एक नाम की दो ट्रेन एक ही समय पर होने से भ्रम हुआ और 15 को नई दिल्ली स्टेशन पर भगदड़ मची।

इन दो ट्रेनों में एक तो नियमित चलने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस थी जो पहले के इलाहाबाद और अब प्रयागराज जाती है। दूसरी प्रयागराज स्पेशल थी। यह 15 को जा रही थी उसके बाद कम से कम चार स्पेशल ट्रेन तो रेल मंत्री की घोषणा के अनुसार गईं और तब जब 12 को कुम्भ खत्म हो गया। रेल मंत्री के विचार और उनसे मिली जानकारी के आधार पर आज द हिन्दू में विस्तृत खबर छपी है। पर यह सब शीर्षक में नहीं है, किसी दूसरे अखबार में भी नहीं। इस कारण कुम्भ नहीं नहा पाने वाले आम लोगों के बीच इसका उत्साह अभी कम नहीं हुआ है। बहुत कम लोग हैं जो हादसों के कारण जाने की योजना रद्द कर रहे हैं या किया हो। बहुत सारे लोग मानते हैं कि कुम्भ में मरने से मोक्ष भले न मिले मरना होगा तो कहीं भी मर सकते हैं इसलिए स्टेशन पर भीड़ करेंगे और मरेंगे तो मुआवाजा नकद मिलेगा। इसीलिए सरकार ने आपदा में अवसर ढूंढ़ लिया है और भीड़ कम करने के लिए कुछ नहीं कर रही है। सत्तारूढ़ दल की राजनीति ने धार्मिक आस्था और उसके सार्वजनिक प्रदर्शन से जो माहौल बनाया है उसमें व्यवस्था देखने वालों के लिए अव्यवस्था तो छोड़िये, मौतें भी मुद्दा नहीं है।

द हिन्दू में प्रकाशित मैत्री पोरचा की खबर के अनुसार, 15 फरवरी को भगदड़ और मौतों के बाद भी नई दिल्ली स्टेशन पर भीड़ कम नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि कुम्भ जाने वालों की भीड़ अभूतपूर्व थी तथा पहले के अनुमान के अनुसार कम नहीं हो रही है। मेले की शुरुआत के बाद से मेला ट्रेन के जरिये 2.9 करोड़ यात्रियों को पहुंचाया गया है। 16 फरवरी को भगदड़ के एक दिन बाद भी 388 ट्रेन से 18.48 लाख यात्रियों को ले जाया गया। सोमवार को शाम 6.00 बजे तक 266 ट्रेन में 14 लाख से ज्यादा यात्री ले जाये गये थे। एक आधिकारी ने कहा, कुंभ की भीड़ 26 फ़रवरी तक बनी रहेगी। द हिन्दू की खबर के अनुसार रेल मंत्री ने माना कि भगदड़ के बाद पीड़ितों और उनके परिवार को करीब दो करोड़ रुपये नकद मुआवाजा बांटा गया है। न्यूजलॉन्ड्री के इस खुलासे के बाद चर्चा थी कि यह लोगों की शांति खरीदने के लिए किया गया है और अगर वह नहीं भी हो, तो मेला जारी रखने और उसका राजनीतिक-धार्मिक लाभ लेने का प्रयास तो है ही।

इसके लिए नियम तोड़कर नकद मुआवजा बांटना भी आलोचना का मुद्दा नहीं बना और केंद्रीय रेल मंत्री ने इसका बचाव किया है। यहां, पूर्व विदेश सचिव जेएन दीक्षित की पुस्तक, “एनाटोमी ऑफ फ्लॉड इनहेरीटेंस“ (कोणार्क – 1995) में वर्णित एक मामला याद आता है। इसका अनुवाद हिन्द पाक रिश्ते 1970-1994 के नाम से प्रकाशित हुआ था। इसमें जेएन दीक्षित ने बताया है कि पाकिस्तानी तानाशाह जियाउल हक ने भारतीय पत्रकारों को घूमने के लिए सेना का विमान दे दिया था। इस पर उन्होंने कहा था कि भारतीय पत्रकार यह न समझें कि पाकिस्तान में यह काम कितनी आसानी से हो गया और भारत में तो हो ही नहीं सकता है। अब अगर हो रहा है तो इसलिए कि भारत में लोकतंत्र की हालत पहले जैसी नहीं है। सरकार और प्रधानमंत्री धार्मिक भावना भड़का कर, मनमानी करके उसका लाभ ले रहे हैं

पुस्तक का संबंधित अंश इस प्रकार है : “…. यह मुलाकात प्रतिनिधिमंडल के बहुत वरिष्ठ सदस्यों के लिए ही थी। यहां तक कि एक्सटर्नल पब्लिसिटी के संयुक्त सचिव, मैं खुद और पाकिस्तान में हमारे मिशन के उप प्रमुख एसके लांबा भी कमरे में नहीं गए। …. हमलोग (पीवी नरसिंह) राव के साथ गए ढेरों भारतीय पत्रकारों के साथ बैठे हुए थे। उनमें से कुछ लोग कह रहे थे कि लाहौर और कराची के औपचारिक समारोहों में शामिल होने की उनकी कोई इच्छा नहीं है। बल्कि पाकिस्तान सरकार आवश्यक व्यवस्था कर दे तो वे पाकिस्तान के कुछ दूसरे हिस्से देखना चाहेंगे। उन लोगों ने यह बात मेरे सहयोगी से कही। उन्होंने कहा कि इस बारे में पाकिस्तानी अधिकारियों से बात करनी पड़ेगी और इसमें समय लग सकता है। इस बीच राष्ट्रपति जिया के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल आरिफ बैठक वाले कमरे से थोड़ी देर के लिए बाहर आए। हमारे यहां के पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया और उनसे पूछा कि वे लोग पाकिस्तान घूम सकते थे कि नहीं। जनरल आरिफ एक सौम्य व्यक्ति हैं, उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और मुख्य मार्शल लॉ प्रशासक राजी हो जाएं तो कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।

इसके बाद लगभग आधे घंटे में राव और जिया की बैठक खत्म हो गई। जिया को उनके शिष्टाचार के लिए जाना जाता था। वे राव को विदा करने के लिए बाहरी दरवाजे तक आए। भारतीय पत्रकारों ने उन्हें वहां घेर लिया और राव से हुई बातचीत के बारे में सवाल पूछने के बाद उन लोगों ने पाकिस्तान के दूसरे हिस्से की यात्रा का आग्रह किया। जिया अपने एडीसी में से एक और जनरल आरिफ की ओर मुड़े तथा कहा, ‘हम लोगों को अपने भारतीय मित्रों को जितना ज्यादा संभव हो पाकिस्तान देखने की इजाजत देनी चाहिए। कृपया इन्हें एक विशेष विमान दे दें ताकि वे पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों की यात्रा कर सके और राव के साथ वापस दिल्ली जाने के लिए समय पर विशेष उड़ान पकड़ सकें।” जिया अपने कमरे में वापस चले गए तो भारतीय पत्रकार मेरी ओर मुखातिब हुए या मुझे कहना चाहिए कि मुझे उकसा दिया। उन लोगों ने कहा, ‘जनसंपर्क ऐसे बनाकर रखा जाता है। अगर भारत में, पाकिस्तानी या अन्य पत्रकारों ने ऐसा आग्रह किया होता तो जिया ने जो सकारात्मक जवाब दिया उसकी बजाय भारतीय राजनैतिक नेतृत्व या नौकरशाही ने ढेरों प्रक्रियागत मुश्किलें बताई होती। बेशक, पत्रकारों को विशेष विमान देने का कोई सवाल नहीं था। मैंने अपने भारतीय पत्रकार मित्रों से कहा कि लोकतंत्र के लिए उन्हें यही कीमत चुकानी पड़ती है।” भाजपा सरकार यह सब कर पा रही है तो इसलिए कि रेलवे टिकट बेचना बंद नहीं करे (सकता) होल्डिंग एरिया बनवायेगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने द हिंदू को बताया कि भारी भीड़ संभालने वाले देश के 60 रेलवे स्टेशन पर स्थायी होल्डिंग क्षेत्रों का निर्माण किया जाएगा। इनमें नई दिल्ली भी है और होल्डिंग क्षेत्र का मकसद कुंभ जैसे मौके (या सरकारी / राजनीतिक आयोजन) पर जुटने वाली अतिरिक्त भीड़ को संभालना होगा। कुंभ मेला देखने आने वाले ज्यादार लोग प्रयागराज स्टेशन से 300 किलोमीटर के दायरे से आते हैं। नई दिल्ली, पटना, आरा, दानापुर और बक्सर जैसे स्टेशन जहां भारी भीड़ जुटती है को ऐसे होल्डिंग एरिया बनवाने के लिए चुना गया है।” उन्होंने आगे कहा, भीड़ कम करने के उपायों को लागू करने के लिए यात्रियों, कुली और विक्रेताओं से प्रतिक्रिया ली जायेगी। यही नहीं, ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को जगह देने के लिए रेलवे स्पेशल ट्रेन की संख्या बढ़ा रहा है। अधिकारी ने कहा कि (चालू) टिकट की बिक्री बढ़ने पर वे रोक नहीं लगा सकते हैं क्योंकि अनारक्षित टिकट की बिक्री सीमित नहीं की जा सकती है। यात्री अगर यात्रा करना चाहता है तो उसे मौके से वंचित नहीं किया जा सकता है। यह विचित्र स्थिति है और ऐसी सुविधा शायद ही कोई सेवा प्रदाता प्राप्त कर पाये। अगर इसे मान लिया जाये तो हवाई जहाज में भी लोग लद कर चलने लगेंगे और तब कारों, मोटर साइकिलों पर सीट से ज्यादा यात्री होने पर जुर्माने का प्रावधान क्यों है? सरकार जरूरत भर ट्रेन चलाने की बजाय टिकट बेचकर कमाना चाहती है और इसमें कहीं गड़बड़ी हो जाये, लोग मर जायें तो जनता के पैसे बतौर मुआवजा नकद बांटकर अपनी खाल बचा लेने का मामला भी नजर आ रहा है। मुआवजा नकद बांटने के लिए नियमों को शिथिल करने की बात हो तो यह भी तथ्य है कि अपात्रों को बैंकों के जरिये सरकारी भुगतान हो चुका है। एक मामले में वापस लेने की खबर है और एक में वापस लेने का इरादा न होने की भी खबर है। ऐसे में सरकार कैसे चल रही है और काम के नाम पर क्या हो रहा है वह समझने और देखने की बात है।   

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