दयाशंकर मिश्रा-
मॉब लिंचिंग-बुलडोज़र पर बोलना अपराध कैसे : दो शब्द ‘मॉब लिंचिंग’और ‘बुलडोज़र’ ही प्रोफ़ेसर अली ख़ान के पोस्ट से राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया को समझ में आए। ‘एंटी नेशनल’ लगे। FIR कराने में दो मिनट नहीं लगे, लेकिन पोस्ट में ग़लत क्या है: एंकर के बार- बार पूछने पर भी नहीं बता पाईं। बीजेपी के प्रवक्ता भी कुछ नहीं बता पाए। बस ‘मॉब लिंचिंग’ और ‘बुलडोज़र’ पर अटके रहे। ‘एंटी नेशनल’ को बोल-बोलकर ही साबित करते रहे। RSS की ट्रेनिंग यही है; झूठ को बार-बार दोहराना।
पोस्ट नहीं, सबने लिखने वाले का मज़हब देखा। बुलडोज़र किस तरह चुन-चुनकर नागरिकों को निशाना बना रहा है। यह हमारे सामने है । सुप्रीम कोर्ट के बार-बार कहने के बाद भी बुलडोज़र नागरिकों को धर्म के आधार पर दौड़ा रहा है।
‘मॉब लिंचिंग’ पर बात करना अपराध कब से है? देश भर से ऐसी घटनाएँ , हर दिन सामने आ रही हैं। हर घटना के साथ चुप्पी बढ़ती जा रही है।
प्रमाण सामने है ,पुलिस किस तरह से पार्टी ‘कार्यकर्ताओं’ से सहमी हुई है। ज़िम्मेदार पदों पर ‘कार्यकर्ताओं’ की भर्ती इसलिए की जा रही है। हमारे अनुभव बताते हैं ; राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन को जल्द ही बड़ी ज़िम्मेदारी मिल सकती है। राज्यपाल, कुलपति, सांसद वह कुछ भी नियुक्त की जा सकती हैं। उन्होंने मुसलमानों से नफ़रत को स्पष्ट रूप से समाज के सामने रख दिया है।
कुछ वक़्त पहले हमने दिल्ली की एक प्रिंसिपल को कॉलेज में गोबर लीपते देखा था। अब वह गोबर चारों दिशाओं में फैलकर संविधान के रास्ते में तेज़ी से बेरिकेड्स लगा रहा है। गोबर लीपने की होड़ लग गई है।
एक नागरिक के तौर पर प्रोफ़ेसर ख़ान ने जो कुछ कहा; संविधान से मिले अधिकार के तहत कहा है। पुलिस और आयोग ने सीधे तौर पर नागरिक अधिकारों का अतिक्रमण किया है।
मध्य प्रदेश में मंत्री विजय शाह पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस को FIR लिखना नहीं आया। इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन में दिए गए भाषण के वीडियो पुलिस खोज नहीं हो पा रही है। मध्य प्रदेश पुलिस को FIR लिखना नहीं आया , हरियाणा की पुलिस प्रोफ़ेसर की पोस्ट नहीं पढ़ सकी।
क़ानून के शासन की यह स्पष्ट अवहेलना है। यह नागरिकों के साथ खड़े होने का वक़्त है। आप जहाँ कहीं हैं, वहाँ से नागरिकों पर हमले का विरोध कीजिए।
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