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सियासत

ईरान परमाणु बम बनाने के लिए 20 साल से मेहनत कर रहा था!

मंजीत सिंह-

फोर्दो न्यूक्लियर प्लांट ईरान की 20 साल की मेहनत थी और वह खरबो डॉलर इसके लिए लगाया तेल बेच बेच कर पैसा जुटाया!

पहाड़ को काटा कई 100 फीट नीचे बंकर बनाए दुनिया के तमाम देशों से स्मगलिंग करके तमाम चीज जुटाई चीन से चोरी छुपे यूरेनियम लिया और एक न्यूक्लियर प्लांट के लिए कई अन्य प्लांट लगाने पड़ते हैं जैसे हैवी वाटर प्लांट कुलिंग रॉड बनाने का प्लांट और न्यूक्लियर रिएक्टर को ठंडा करने के लिए विशाल हीट एक्सचेंजर आदि!

20 साल से यूनाइटेड नेशन IAEA और इजरायल और अमेरिका बातचीत कर रहे थे यूरोपीय यूनियन ने भी ईरान को समझने का जिम्मा लिया था उसने भी 5 सालों तक मेहनत किया सारी निगोशिएशन चलती रही!

इस बीच कई डॉक्यूमेंट सामने आए जिसमें पता यह चला कि ईरान टैक्टिकल परमाणु बम बनकर हमास और हिजबुल्ला तथा हूथी को देने वाला है!

यानी ईरान यह चाहता था उसका परमाणु बम एक स्टेटलेस यानी राज्य विहीन आतंकी संगठन इस्तेमाल करें ताकि उसकी जिम्मेदारी किसी देश पर ना आने पाए!

और यह सच्चाई है हुथियो को बैलिस्टिक मिसाइल ईरान ने दिया है और यह बात ईरान और हूथी दोनों स्वीकार भी कर रहे हैं!

7 अक्टूबर की हमले की पूरी प्लानिंग ईरान की बदनाम IRGA यानी इस्लामी रिवॉल्यूशन रिपब्लिकन आर्मी गार्ड ने रची थी हमास को रॉकेट का पूरा भंडार ईरान ने राहत सामग्री के बहाने भर भर के इजिप्ट के रास्ते भेजा था!

हमास को सुरंग बनाने की टेक्नोलॉजी से लेकर सुरंग बनाने में मदद सब कुछ ईरान ने दिया!

यानी अगर आप इतना सब कुछ एक देश को सिर्फ इसलिए बर्बाद करने पर लगा दोगे कि वह उसे देश का जो धर्म है आप उस धर्म से नफरत करते हो तो आपको बिल्कुल बर्बाद किया जाना चाहिए!

इसराइल और ईरान में कोई दुश्मनी नहीं है ना कोई बॉर्डर मिलती है ना सीमा मिलती है बस ईरान इजरायल से इसलिए नफरत करता है क्योंकि इसराइल एक यहूदी देश है!

और आप ट्विटर पर खूमनई के ऑफिशियल हैंडल को देखिए उनके हर दूसरे ट्वीट में जब वह इजरायल के खिलाफ लिखते हैं तब वह यहूदी शब्द (जियोनिस्ट) जरूर लिखते हैं!

दुनिया का कोई राष्ट्र प्रमुख किसी भी धर्म के लिए इस तरह का जहर नहीं उगलता जिस तरह का जहर ईरान यहूदियों के लिए उगल रहा है और ऐसा प्रतीत होता है उड़ता तीर अपने अंदर लेने के शौक है।

इस धरती पर सबको रहने का अधिकार है यहूदियों और हिंदुओं को भी इस धरती पर रहने का अधिकार है तुम अगर उन्हें मिटाने की कोशिश करोगे तो यह 19वीं सदी के शुरुआत वाली धरती नहीं है ।

यहूदियों की संख्या भले कम है,पर उनका जीन करोड़ों जनसंख्या से बेहतर है, ये ध्यान रखना चाहिए। तथ्य को हल्के में लेने का दुष्परिणाम निकलता है।

भारत में भी ईरान के समर्थकों को ये समझने की आवश्यकता है, जो आज विधवा विलाप कर रहे हैं।

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