प्रयागराज। शंकराचार्य प्रकरण पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सवालों से बचते हुए बाहर निकलने की कोशिश कर रहे प्रशासनिक अधिकारियों को उस वक्त लौटना पड़ा, जब यूपी के पत्रकारों ने उन्हें जवाबदेही की याद दिलाई। “भाग क्यों रहे हैं, जवाब दीजिए” जैसे सीधे सवालों के बीच डीएम, कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर को पत्रकारों के दबाव में दोबारा मंच पर आना पड़ा।
इस घटनाक्रम ने यह दिखाया कि प्रयागराज में पत्रकारिता आज भी सत्ता से सवाल पूछने का साहस रखती है।
गिरधारी लाल गोयल-
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द मामले पर बुलायी गयी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारी प्रेस नोट पढ़ कर पत्रकारों के सवालों को सुने बिना ही भग लिए
वैसे अधिकारीयों को अंडा वर्ल्ड के फेसबकिये बुला लेने थे… वे अपने गढ़े हुए ऐसे-ऐसे किस्से पत्रकारों को सुनाते कि पत्रकार योगी जी के AI वाले मामले को भी भूल जाते।
मामले में वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने वीडियो शेयर कर लिखा है-
बड़ी ख़बर- “अरे! भाग क्यों रहे हैं? जवाब दीजिए। जवाब।” यूपी के पत्रकारों ने दिखाई अपनी रीढ़। अधिकारियों को जमकर रगड़ा।
शंकराचार्य मसले पर अपनी बात ख़त्म कर प्रेस कांफ्रेंस से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे, प्रयागराज के अधिकारियों को पत्रकारों ने ऐसा रगड़ा कि उन्हें वापिस लौटने पर मजबूर होना पड़ा।
डीएम, कमिश्नर, पुलिस कमिश्नर सब उल्टे पांव लौटने पर मजबूर हुए। पत्रकारिता आज जयजयकार के ICU से निकलकर 100 मीटर की ट्रैक पर कुलाँचे मारती नजर आई।
ये अपना इलाहाबाद है। इसकी रग-रग में बगावत का बारूद है! सैल्यूट इन पत्रकारों को…।
संतोष शर्मा, शाबास! गज़ब का तेवर दिखाया है तुमने प्रेस कांफ्रेंस में।
प्रयागराज के स्थानीय पत्रकारों को भी बहुत आभार। प्रेस कांफ्रेंस में अकड़कर बैठी सत्ता और उसके प्रतिनिधियों को सबसे बड़ा डर यही होता है, कि पत्रकार एक रोज़ उनसे डरना बंद कर देंगे!!!
गोरख पांडे सत्ता के इसी डर को अपनी कविता ‘उनका डर’ में बहुत क़रीने से बयां करते हैं-
“वे डरते हैं
किस चीज़ से डरते हैं वे?
तमाम धन-दौलत
गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद?
वे डरते हैं
कि एक दिन
निहत्थे और ग़रीब लोग
उनसे डरना बंद कर देंगे।”



