लंदन: भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी के वकील और दिल्ली के चर्चित क्रिमिनल लॉयर विजय अग्रवाल को लेकर भड़ास4मीडिया ने दो दिन पहले लंदन से सामने आए घटनाक्रम की खबर प्रकाशित की थी। भड़ास ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अग्रवाल को लंदन के मेफेयर इलाके में हिरासत में लिया गया है और मामले में इमिग्रेशन उल्लंघन तथा कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात सामने आई है। अब ब्रिटेन की अदालत में हुई कार्यवाही के बाद इस पूरे मामले की एक और गंभीर तस्वीर सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया समेत कई संस्थानों ने भड़ास4मीडिया की खबर के बाद विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी और उन पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की रिपोर्ट प्रकाशित की है।
भड़ास4मीडिया की शुरुआती रिपोर्ट में बताया गया था कि मेहुल चोकसी के वकील विजय अग्रवाल लंदन के मेफेयर इलाके में हिरासत में लिए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि संबंधित प्रॉपर्टी में निरीक्षण के दौरान अग्रवाल के साथ तीन-चार जूनियर वकील मौजूद बताए गए और बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात कही गई थी। हालांकि, भड़ास4मीडिया ने उसी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया था कि कथित नकदी की वास्तविक मात्रा कितनी थी, उसका मालिक कौन था और वह रकम वहां क्यों रखी गई थी—इन सवालों का कोई प्रमाणित जवाब उपलब्ध नहीं था।
अब लंदन की अदालत में हुई कार्यवाही से सामने आया है कि 57 वर्षीय विजय अग्रवाल पर दो महिलाओं से जुड़े यौन उत्पीड़न के चार आरोप लगाए गए हैं। उन्हें और उनकी निजी सहायक 41 वर्षीय मनप्रीत कौर को 11 अगस्त को लंदन के मेफेयर इलाके में स्थित 29 ब्रिक स्ट्रीट से गिरफ्तार किया गया था। दोनों को 13 अगस्त को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट्स कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें हिरासत में भेज दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को साउथवार्क क्राउन कोर्ट में होगी।
विजय अग्रवाल पर क्या हैं आरोप?
अग्रवाल पर चार यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। इनमें से तीन आरोप एक महिला से संबंधित हैं और कथित घटना 9 अगस्त को ब्रिक स्ट्रीट की उसी प्रॉपर्टी में होने की बात कही गई है। चौथा आरोप दूसरी महिला से जुड़ा है और कथित घटना 26 मई की बताई गई है।
इन आरोपों को ब्रिटेन के Sexual Offences Act 2003 की धारा 3 के तहत दर्ज किया गया है। इस धारा के तहत किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना जानबूझकर यौन तरीके से छूना अपराध है, जब आरोपी के पास यह मानने का उचित आधार भी न हो कि सामने वाले व्यक्ति ने सहमति दी थी। इस अपराध में अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। हालांकि, अग्रवाल पर लगे सभी आरोप फिलहाल आरोप मात्र हैं और अदालत में साबित होना बाकी है।
निजी सहायक मनप्रीत कौर पर भी आरोप
अग्रवाल की निजी सहायक मनप्रीत कौर पर भी दो आरोप लगाए गए हैं। उस पर आरोप है कि उसने कथित तौर पर यौन उत्पीड़न की घटनाओं को जानबूझकर बढ़ावा दिया या इसमें मदद की।
अदालती कार्यवाही से सामने आई जानकारी के अनुसार, कौर ने कथित तौर पर फर्जी नौकरी का विज्ञापन पोस्ट किया, जिसके जरिए दो महिलाओं को मेफेयर स्थित ब्रिक स्ट्रीट की प्रॉपर्टी पर बुलाया गया। आरोप है कि इसके बाद उसने दोनों महिलाओं को अग्रवाल से मिलवाया। कौर के खिलाफ लगाए गए दोनों आरोप कथित तौर पर 26 मई और 9 अगस्त की घटनाओं से संबंधित हैं।
कहां हुई गिरफ्तारी?
विजय अग्रवाल और मनप्रीत कौर की गिरफ्तारी 11 अगस्त को 29 ब्रिक स्ट्रीट, मेफेयर से हुई। यह एक लग्जरी सर्विस्ड टाउनहाउस है। रिपोर्टों के अनुसार यह करीब 4,000 वर्ग फुट का चार मंजिला और पांच बेडरूम वाला मकान है। इसमें हाउसकीपिंग और रोजाना ब्रेकफास्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध बताई गई हैं और इसका किराया करीब 2,000 पाउंड यानी लगभग 2.6 लाख रुपये प्रति रात बताया गया है।
मेट्रोपॉलिटन पुलिस को इस प्रॉपर्टी पर कथित यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई की गई थी। इस मामले में दो अन्य लोगों—एक 23 वर्षीय युवक और 43 वर्षीय महिला—को भी 11 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, बाद में दोनों को आगे की जांच पूरी होने तक जमानत पर रिहा कर दिया गया। शिकायत करने वाली दोनों महिलाओं को विशेषज्ञ अधिकारियों की ओर से सहायता दी जा रही है।
पहले सामने आया था इमिग्रेशन और कैश का मामला
विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में इमिग्रेशन नियमों के कथित उल्लंघन, ब्रिटेन में बिना अनुमति पेशेवर काम करने और मेफेयर की प्रॉपर्टी की जांच के दौरान कथित नकदी बरामद होने जैसी बातें सामने आई थीं। भड़ास4मीडिया ने भी अपनी शुरुआती रिपोर्ट में इसी घटनाक्रम को प्रमुखता से उठाया था।
लेकिन बाद में सामने आई कोर्ट कार्यवाही से यह स्पष्ट हुआ कि वर्तमान आपराधिक मामला चार यौन उत्पीड़न के आरोपों पर केंद्रित है। द स्टेट्समैन की रिपोर्ट के मुताबिक अग्रवाल की हिरासत के शुरुआती विवरणों में इमिग्रेशन उल्लंघन और कथित नकदी का जिक्र था, लेकिन अदालत में सामने आए मौजूदा आपराधिक आरोप यौन उत्पीड़न से जुड़े हैं।
अग्रवाल के परिवार और करीबियों ने कथित नकदी और वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े दावों पर आपत्ति जताई है। अग्रवाल के करीबी एक व्यक्ति ने ANI से कहा कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी या रिकॉर्ड नहीं है जिससे अग्रवाल से कथित तौर पर पैसे की बरामदगी या किसी ऐसे फंड से उनके जुड़े होने की पुष्टि होती हो।
भड़ास4मीडिया की खबर के बाद कई संस्थानों ने दी रिपोर्ट

इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण बात यह है कि भड़ास4मीडिया ने 18 अगस्त को विजय अग्रवाल की लंदन में हिरासत की खबर प्रकाशित की थी, जिसमें मेफेयर, इमिग्रेशन उल्लंघन और कथित नकदी का जिक्र था। इसके बाद मामले में ब्रिटेन की अदालत की कार्यवाही सामने आई और टाइम्स ऑफ इंडिया ने 20 अगस्त को विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी और चार यौन उत्पीड़न के आरोपों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की। द स्टेट्समैन और अन्य संस्थानों ने भी इसी दिन मामले की आगे की जानकारी प्रकाशित की।
यानी भड़ास4मीडिया की शुरुआती रिपोर्ट में सामने आया लंदन में हिरासत का घटनाक्रम बाद की कोर्ट रिपोर्टों से पुष्ट हुआ, हालांकि बाद में सामने आए अदालती दस्तावेजों और कार्यवाही ने मामले की प्रकृति के बारे में कहीं अधिक विस्तृत जानकारी सामने रखी।
विजय अग्रवाल का परिचय?
विजय अग्रवाल दिल्ली के चर्चित आपराधिक वकील हैं। वह कई हाई-प्रोफाइल आपराधिक, आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में आरोपियों की पैरवी कर चुके हैं।
उनकी पहचान खास तौर पर मेहुल चोकसी के वकील के तौर पर रही है। बॉम्बे हाई कोर्ट के उपलब्ध रिकॉर्ड में भी “Mr. Vijay Aggarwal, Advocate” को चोकसी की ओर से पेश वकीलों में दर्ज किया गया है। भड़ास4मीडिया ने भी अपनी रिपोर्ट में इस न्यायिक रिकॉर्ड का उल्लेख किया था।
अग्रवाल मेहुल चोकसी की विदेश में चल रही कानूनी लड़ाई से भी जुड़े रहे हैं। चोकसी को भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध पर अप्रैल 2025 में बेल्जियम में गिरफ्तार किया गया था और वहां उसके खिलाफ प्रत्यर्पण कार्यवाही चल रही है।
विजय अग्रवाल नीरव मोदी की भी पैरवी कर चुके हैं। इसके अलावा 2G स्पेक्ट्रम मामले में भी उन्होंने आरोपियों का प्रतिनिधित्व किया था।
मेहुल चोकसी पर क्या है मामला?
मेहुल चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े करीब 13,500 करोड़ रुपये के घोटाले में कथित संलिप्तता के आरोप हैं। चोकसी इन आरोपों से इनकार करता रहा है। वह भारत से बाहर है और उसके खिलाफ प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
हालांकि, विजय अग्रवाल के खिलाफ लंदन में चल रहा मौजूदा यौन उत्पीड़न का मामला मेहुल चोकसी के मामले या उसके प्रत्यर्पण केस से अलग है। दोनों मामलों को आपस में जोड़ने वाला कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
10 सितंबर को अगली सुनवाई
विजय अग्रवाल और मनप्रीत कौर को हिरासत में भेजे जाने के बाद मामला साउथवार्क क्राउन कोर्ट भेज दिया गया है। दोनों की plea and trial preparation hearing 10 सितंबर 2026 को निर्धारित है।
फिलहाल दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में विचाराधीन हैं। किसी भी आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक अदालत में आरोप साबित न हो जाएं।
भड़ास4मीडिया की रिपोर्ट का महत्व
विजय अग्रवाल के मामले में भड़ास4मीडिया की शुरुआती रिपोर्ट ने उस समय सवाल उठाया था, जब बड़े संस्थानों में इस घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई थी। बाद में लंदन की कोर्ट कार्यवाही के आधार पर टाइम्स ऑफ इंडिया, द स्टेट्समैन और अन्य संस्थानों की रिपोर्टों ने उनकी गिरफ्तारी और उन पर लगे चार यौन उत्पीड़न के आरोपों की पुष्टि करते हुए मामले की विस्तृत तस्वीर सामने रखी।
इस लिहाज से भड़ास4मीडिया की शुरुआती खबर में सामने आया लंदन में विजय अग्रवाल की हिरासत का तथ्य बाद की रिपोर्टों और अदालत की कार्यवाही से सही साबित हुआ है। हालांकि कथित नकदी से जुड़े सवालों पर अभी भी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है और उन्हें तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
प्रकरण से संबंधित खबरें जो भड़ास में पहले पब्लिश हुईं…
लंदन में नामी भारतीय क्रिमिनल लॉयर के हिरासत में लिए जाने की चर्चा, Mayfair कनेक्शन और भारी कैश ने बढ़ाया सस्पेंस!


