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सियासत

मोदी के PM बनने से पहले ही Zee News मोदी भक्ति में डूबकर पहला गोदी चैनल बन चुका था!

Two men exchanging a document indoors; one in a light gray vest and white kurta, the other in a white outfit, both smiling.

2014 में जब बीजेपी ने मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया तो उसके बाद सुभाष चंद्रा का Zee News पहला चैनल था,
जो दिन रात मोदी के पक्ष में दिन रात खबरें चलाता था,
मोदी की पूरी रैली अपने सभी चैनल पर Live दिखाता था,
मतलब मोदी के PM बनने से पहले ही
Zee News मोदी भक्ति में डूबकर पहला गोदी चैनल बन चुका था,
जिसके ईनाम में सुभाष चंद्रा को राज्यसभा भेजा गया,
और अब सुभाष चंद्रा का 22006 करोड़ का कर्ज
दुग्गल ने सिर्फ 6.5 करोड़ लेकर बाक़ी सब क़र्ज़ माफ़ कर दिया,
देश के 80 करोड़ लोगों को पांच किलो गेंहू, चावल और अपने वफादार को 22 हज़ार करोड़ का गिफ्ट, मोदी जी में एक बात तो है, दोस्ती जान की बाजी लगाकर भी निभाते हैँ।
-अनिल यादव, स्वतंत्र पत्रकार


प्रदीप श्रीवास्तव-

हिंदुस्तान अख़बार में आज छपी इस ख़बर का शीर्षक देखकर यकीन नहीं हुआ। लगा कि डेस्क के किसी साथी ने ब्लंडर कर दिया है। लगा कि गलती से 22 करोड़ को 22 हज़ार करोड़ कर दिया है। सामान्यतया ऐसी गलती नहीं होती है लेकिन अपवाद स्वरूप कभी-कभी हो जाती है।

लेकिन ख़बर पढ़कर भ्रम दूर हो गया। NCLT ने 22 करोड़ नहीं, 22 हज़ार करोड़ रुपए ही माफ़ किया है। 22 हज़ार करोड़ रुपए एक झटके में माफ़। सुभाष चंद्रा अब 22,006.57 करोड़ रुपये की जगह सिर्फ़ 6.5 करोड़ रुपये जमा करेंगे और कालर टाइट करके घूमेंगे।

मुझे अपने गांव के बगल के रघुबीर चाचा की याद आ रही है। बेचारे ट्रैक्टर का चार लाख का लोन नहीं चुका पाए तो ट्रैक्टर खिंचा गया। जिस खेत को जोतने के लिए ट्रैक्टर लिया था, उसमें से कुछ हिस्सा बेंचकर कुछ रकम जमा कर ट्रैक्टर छुड़ाया। रघुबीर चाचा अब नहीं रहे, ट्रैक्टर भी अब काम लायक नहीं रहा, लेकिन चाचा के बेटे ट्रैक्टर का मूल और ब्याज किस्तों में चुका रहे हैं और खुश भी हैं। ख़ुश इस बात से हैं कि डिफ़ॉल्ट होने के बाद भी बैंक वालों ने उन्हें पूरी रकम को किश्तों में चुकाने की ‘सहूलियत’ दी है।

काश, रघुबीर चाचा सुभाष चंद्रा की यह ख़बर पढ़ने के लिए ज़िंदा होते।

Hindi newspaper article headlined '22 हजार करोड़ के बदले 6.5 करोड़ ही चुकाएंगे', about a government financial scheme and payouts in Delhi.

इंदौर वाले-

देश को चूना लगाने की हद्द है

सबसे बड़ी लोन माफी! 22000 करोड़ का कर्ज, सिर्फ 6.5 करोड़ में रफा-दफा; बैंकों के विरोध के बीच ज़ी टीवी के सुभाष चंद्र का ₹22,006.57 करोड़ के कुल कर्ज को महज ₹6.5 करोड़ में रफा-दफा किया गया ….

सुभाष चंद्रा के पर्सनल इंसॉल्वेंसी मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. ट्रिब्यूनल ने जी ग्रुप (Zee Group) के संस्थापक सुभाष चंद्रा के करीब ₹22,006.57 करोड़ के कुल कर्ज को महज ₹6.5 करोड़ में रफा-दफा करने वाले रीपेमेंट प्लान को अपनी मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद कर्ज देने वाले बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपने बकाया पैसे का 99.97% हिस्सा गंवाना पड़ेगा, जिसे बैंकिंग भाषा में ‘भारी हेयरकट’ कहा जा रहा है.

तीसरे जज के फैसले से सुलझा विवाद
इस मामले पर फैसला सुनाते हुए NCLT के न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्ट्सी कोड (IBC) की धारा 114 के तहत इस सेटलमेंट प्लान को मंजूरी दी. दरअसल, इससे पहले NCLT की दो सदस्यीय बेंच के बीच इस प्लान को लेकर मतभेद था और दोनों जजों की राय अलग-अलग थी. इस गतिरोध को दूर करने के लिए ट्रिब्यूनल के चेयरमैन ने नीलेश शर्मा को तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया, जिन्होंने बहुमत के आधार पर इस प्लान के पक्ष में फैसला सुनाया.

LIC हाउसिंग फाइनेंस और अन्य बैंकों का विरोध
एलआईसी (LIC) हाउसिंग फाइनेंस की अगुवाई में कई बड़े बैंकों ने इस योजना का कड़ा विरोध किया था. बैंकों का कहना था कि ₹22,006.57 करोड़ के भारी-भरकम कर्ज के बदले सिर्फ ₹6.5 करोड़ देना पूरी तरह से अव्यावहारिक और गलत है.

आंकड़ों के मुताबिक, इस ₹6.5 करोड़ में से ₹6.25 करोड़ सभी बैंकों के बीच उनके कर्ज के अनुपात में बांटे जाएंगे और ₹25 लाख इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के खर्च के रूप में इस्तेमाल होंगे. उदाहरण के लिए, LIC हाउसिंग फाइनेंस का अकेले का दावा ₹1,322.39 करोड़ का था, लेकिन इस प्लान के तहत उन्हें सिर्फ ₹38.09 लाख मिलेंगे, जो उनके कुल दावे का महज 0.028% है.

भाई सुभाष चंद्रा का जलवा है, राज्य सभा, स्टार्ट अप शोज़ और बच्चों को बिज़नेस के गुर सिखाना, क्या रोल मॉडल हैं हमारे देश के!

क्या कहेंगे आप? क्या आपका कोई भी लोन या उसकी किस्त का ब्याज तक माफ हुआ है?

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