काठमांडू। नेपाल में पत्रकारिता को करियर के तौर पर चुनने वाले युवाओं की संख्या लगातार कम होती जा रही है। पत्रकारिता और मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कराने वाले स्कूलों और विश्वविद्यालयों में छात्रों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है। इस मुद्दे पर The Kathmandu Post के लिए प्रकाशित एक रिपोर्ट में नेपाल में पत्रकारिता शिक्षा और मीडिया इंडस्ट्री की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में पत्रकारिता की कक्षाओं में छात्रों की संख्या कम हो रही है। प्लस-टू स्तर पर पत्रकारिता और मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कराने वाले स्कूलों की संख्या में काफी कमी आई है। वहीं विश्वविद्यालयों में भी पत्रकारिता से जुड़े पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या घट रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पत्रकारिता से युवाओं की दूरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें कम वेतन, नौकरी की असुरक्षा, वेतन और भुगतान में देरी, मीडिया इंडस्ट्री का सिकुड़ता दायरा और विदेश जाकर पढ़ाई करने का बढ़ता आकर्षण प्रमुख हैं। इन परिस्थितियों के कारण युवा पत्रकारिता को स्थायी और सुरक्षित करियर विकल्प के तौर पर देखने से बच रहे हैं।
हालांकि, दूसरी ओर पत्रकारिता की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच गलत सूचनाओं, क्लिकबेट और AI से तैयार किए जा रहे कंटेंट की संख्या बढ़ रही है। ऐसे दौर में तथ्यों की जांच करने और विश्वसनीय खबरें लोगों तक पहुंचाने वाली प्रोफेशनल पत्रकारिता की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
रिपोर्ट में पत्रकारिता शिक्षा और इस पेशे को नई पीढ़ी के लिए अधिक प्रासंगिक, व्यावहारिक और टिकाऊ बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया है। इसके लिए पत्रकारिता की पढ़ाई को इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के साथ-साथ पत्रकारों के लिए बेहतर वेतन और नौकरी की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।
जानकारों का मानना है कि पत्रकारिता का स्वरूप भले ही तेजी से बदल रहा हो, लेकिन इसे खत्म नहीं होना चाहिए। फेक न्यूज, AI-generated content और गलत सूचनाओं के दौर में जिम्मेदार और पेशेवर पत्रकारिता लोकतांत्रिक समाज के लिए पहले से कहीं अधिक जरूरी है।


