कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के 2005 से 2015 तक कुलपति रहे सच्चिदानंद जोशी के कार्यकलापों और पद के दुरूपयोग के मामले की शिकायत एक बार फिर प्रधानमंत्री तक पहुंची है जो वर्तमान में दिल्ली में आई जी एन सी सी के सदस्य सचिव हैं।
सुधाकर सिंह, लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने हाल ही में छत्तीसगढ़ लोक आयोग की रिपोर्ट और अन्य आधार पर उनका दिल्ली के पद को पाने और कायम रहने पर सवाल उठाया था और अब कई अन्य बिंदुओं को प्रकाश में लाते हुए उत्तर प्रदेश के विधायक ओमप्रकाश सिंह ने प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, संस्कृति मंत्रालय, गृह मंत्रालय, अनुसूचित जाति जनजाति आयोग को पत्र लिख कर जोशी को तुरंत हटाए जाने की माँग की है।
ओमप्रकाश सिंह ने इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, (आई.जी.एन.सी.ए) में पदस्थ सच्चिदानंद जोशी को क्षेत्रीय केन्द्र वाराणसी में हुए कदाचार एवं आर्थिक अनियमितता, गांधी विद्या संस्थान, राजघाट, वाराणसी पर कब्जे और उसकी छवि को धूमिल करने के लिए डॉ. जोशी के विरुद्ध जाँच एवं उन्हें पद मुक्त करने के सम्बन्ध में पत्र लिखा है। उन्होंने सच्चिदानंद जोशी के कार्यकाल में बनारस में स्थित प्रतिष्ठित गांधी विद्या संस्थान को आई.जी.एन.सी.ए. द्वारा कब्जा किए जाने की भी कोशिश का आरोप लगाते हुए तक़रीबन 60 लाख रुपए इस प्रयास हेतु खर्च किए जाने की जांच की मांग की है। उनके पत्र के अनुसार गांधी विद्या संस्थान को चलाने के लिए आई.जी.एन.सी.ए. को कहा गया था जिसे लगभग पूरी तरह से खत्म करके डॉ. जोशी की शह पर क्षेत्रीय निदेशक, वाराणसी द्वारा गाँधी विद्या संस्थान के पुनर्निर्माण के नाम पर लाखों रूपये अनियमित रूप से खर्च कर दिए गए और बगैर कोई सार्थक काम किए कब्जा जमाए रखा गया था और इस संस्थान की गरिमा गिरायी गई।
ओमप्रकाश सिंह ने अपने पत्र में आई.जी.एन.सी.ए. के वाराणसी केंद्र में भी वर्ष 2024-25 के दौरान हुए भर्ती में भ्रष्टाचार की बात कही है और लिखा है कि आरक्षण के रोस्टर नियम को अनदेखा कर कोऑर्डिनेटर के पद पर दो लोगों को नौकरी दिया गया जबकि इसके साक्षात्कार के लिए सिर्फ पांच उमीदवार बुलाये गए और उसमें से भी दो अपात्र थे और इनको भी ‘डम्मी एप्लीकेंट’ के रूप में योजनाबद्ध रूप से शामिल किया गया। साथ ही उपरोक्त समेत बाकी तीन पदों में भी जाति विशेष को योग्यता के विरुद्ध जातीय वरीयता दी गई एवं इस प्रकार पिछड़े और दलित वर्ग के अभ्यर्थियों के हितों की अनदेखी की गई। उन्होंने इस पूरी भर्ती को निरस्त करते हुए जाँच की मांग कर दोषियों कार्यवाही का अनुरोध किया है।
उन्होंने आगे ये भी लिखा है कि पिछले दस वर्षो में सभी क्षेत्रीय केंद्रों जैसे वाराणसी, जम्मू, रांची, तिरुपति इत्यादि में अन्य जाति के अधिक योग्य उम्मीदवारों को छोड़कर सदैव जाति विशेष के लोगों की नियुक्ति की गई जिसके लिए कई बार निर्धारित प्रक्रियाओं की ही नहीं बल्कि दलित एवं पिछड़ो की भी अनदेखी की गई। यहां भी आर्थिक लेन-देन की संभावना हो सकती है, जिसकी जाँच होनी चाहिए।
जोशी पर आई.जी.एन.सी.ए. में प्रमोशन में भी मनमानी करते हुए अपने चहेतों को अनाधिकृत रूप से लाभ पहुंचाने की बात पत्र में है। एक उदाहरण के जरिए उन्होंने सच्चिदानंद जोशी के कार्यकाल में ही वाराणसी के तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक प्रो. विजय शंकर शुक्ल की पत्नी को वाराणसी केन्द्र में ही कॉर्डिनेटर हिंदी ट्रांसलेटर प्रोजेक्ट के तौर पर नौकरी दी गई थी लिखा है जिन्हें अपनी गलती पकड़े जाने के अंदेशे के बाद सेवामुक्त कर दिया गया था।
जोशी के इशारे पर आई.जी.एन.सी.ए. के रांची केंद्र में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की बातें और व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप , मानसिक प्रताड़ना , कर्मचारियों का दबाव में इस्तीफा दिया जाना भी उन्होंने अपने पत्र में लिखा है।
सच्चिदानंद जोशी के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर में कुलपति पद पर रहते हुए कार्यकाल का जिक्र करते हुए विधायक ओमप्रकाश सिंह ने छत्तीसगढ़ लोक आयोग की रिपोर्ट पर इनके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी को दर्शाते हुए उनकी अध्यापकों के चयन में नियमों को दरकिनार करने की बात लिखी है कि कैसे इस रिपोर्ट के बावजूद उन्हें इन्दिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स में न केवल पद स्थापित किया गया है बल्कि आज तक कायम रखा गया हैं जो कि पी.एम.ओ. शुचिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है और जोशी को तुरंत बर्खास्त किए जाने का अनुरोध किया है।
श्री सिंह ने सच्चिदानंद जोशी द्वारा इसी तरह के भ्रष्टाचार से लिप्त कार्य दिल्ली के आई.जी.एन.सी.ए. में आकर नियुक्तियों और अन्य दूसरे वित्तीय मामलों में करने का आरोप लगाते हुए विशेषकर जातिगत आधार पर भी लोगों को मनमाफिक ढंग से पदस्थ किया जाना लिखा है। जोशी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों पर छत्तीसगढ़ में तत्कालीन सचिव निधि छिब्बर ने जांच रिपोर्ट दी थी और फिर लोक आयोग की रिपोर्ट भी उनके खिलाफ आई थी इसका भी उल्लेख श्री सिंह ने किया है। लोक आयोग की रिपोर्ट के बाद भी जोशी पर कार्यवाही नहीं होने को आश्चर्यजनक बताते हुए उन्होंने लिखा है कि कैसे वो 2016 में दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय के अधीन प्रतिष्ठित पद प्राप्त करने के तिकड़म में सफल हुए इसकी जांच हो। उन्होंने एक और मामला उठाते हुए लिखा है कि जोशी के रायपुर के कार्यकाल में जनसंपर्क अधिकारी की नियुक्ति के मामले में भी लोक आयोग ने उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया था। बाद में हाई कोर्ट बिलासपुर ने पूरी चयन प्रक्रिया ही निरस्त कर दी। इस मामले में कुशाभाऊ ठाकुर पत्रकारिता विश्वविद्यालय ने उच्च न्यायालय के समक्ष विश्वविद्यालय की गलती स्वीकार की थी जिसके तत्कालीन कुलपति सच्चिदानंद जोशी थे और स्पष्टतः उनके द्वारा ही इस भ्रष्टाचार को प्रश्रय दिया गया था।
सच्चिदानंद जोशी के सदस्य सचिव के रूप में आई.जी.एन.सी. ए., दिल्ली के पिछले 10 वर्षों के कार्यकाल में लिए गये आर्थिक निर्णयों की भी जांच की मांग करते हुए इस दौरान की लेखा परीक्षा की रिपोर्ट और टिप्पणियों के पालन को भी आवश्यक है बताया है कि सी ए जी की रिपोर्ट बताती है कि डॉ. सच्चिदानंद जोशी आदतन भ्रष्टाचारी है. कृपया इस विषय पर विशेष संज्ञान लें और जाँच उपरांत इनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाये।
ओमप्रकाश सिंह ने सच्चिदानंद जोशी की आय से अधिक संपत्ति, ग्रेटर कैलाश आदि स्थानों पर मकान, जमीन आदि की भी जांच किए जाने का आदेश देने की अपेक्षा जताई है। जोशी के कार्यकाल में आई.जी.एन.सी.ए. दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रीय केन्द्र खोले जाने, इस हेतु आवंटित बजट, इन स्थानों पर की गई समस्त पदों की नियुक्ति प्रक्रिया, अभ्यर्थियों की आवश्यक योग्यता, दस्तावेज आदि की भी जांच की अपेक्षा उन्होंने रखी है।
श्री सिंह ने वाराणसी स्थित क्षेत्रीय केन्द्र के संदर्भ में जिक्र करते हुए लिखा है कि ताकि अपने प्रदेश में स्थित सरकारी संस्थानों में जातिवाद के स्थापना, दलित, पिछडों के संवैधानिक हक़मारी और आर्थिक भ्रष्टाचार की अनदेखी किसी भी तरह से न हो और. इसके दोषियों को महत्वपूर्ण सरकारी पदों की जिम्मेदारी से तुरंत मुक्त किया जाए।
शिकायती पत्र देखें….





