मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व विधायक शाहनवाज राणा और उनके करीबियों से जुड़े ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार, 24 अगस्त की सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई का दायरा मुजफ्फरनगर से आगे गाजियाबाद और हरियाणा के फरीदाबाद तक रहा। ED की टीमों ने कुल 9 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान मुजफ्फरनगर के राणा हाउस, शाह टाइम्स के कार्यालय, राणा परिवार से जुड़ी कारोबारी इकाइयों और कुछ लोहा कारोबारियों के ठिकानों की जांच की गई।
राणा हाउस में कादिर, नूर सलीम और शाहनवाज राणा के आवास
मुजफ्फरनगर के सुजड़ू गांव स्थित राणा हाउस इस कार्रवाई का प्रमुख केंद्र रहा। इसी परिसर में पूर्व सांसद एवं सपा नेता कादिर राणा, पूर्व विधायक नूर सलीम राणा और पूर्व विधायक शाहनवाज राणा के आवास बताए गए हैं। ED की टीम सोमवार सुबह कई गाड़ियों से यहां पहुंची और परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया। लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई। राणा हाउस के बाहर स्थानीय पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी।
राणा हाउस के अलावा शाहनवाज राणा से जुड़े शाह टाइम्स के कार्यालय में भी ED की टीम ने दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की। शुरुआती कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने तलाशी के बारे में कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी।
किन-किन ठिकानों पर पहुंची ED की टीम?
मुजफ्फरनगर में कार्रवाई केवल राणा हाउस तक सीमित नहीं रही। रिपोर्टों के मुताबिक ED ने राणा परिवार से जुड़ी राणा गार्डर रोलिंग मिल और Jambudweep Exports and Imports Ltd. से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली।
इसके अलावा पारस TMT से जुड़े कारोबारी संजय जैन और राजीव जैन के आवास तथा रोलिंग मिल को भी जांच के दायरे में लिया गया। श्री बालाजी रोलिंग मिल के मालिक आकाश कुमार के आवास और मिल तथा एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के ठिकाने पर भी टीम पहुंची।
इस तरह कार्रवाई का फोकस केवल राजनीतिक परिवार तक सीमित नहीं था, बल्कि उन कारोबारी और वित्तीय कड़ियों तक भी पहुंचा, जिनका संबंध कथित फर्जी ITC नेटवर्क से बताया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
ED की कार्रवाई का मुख्य आधार Jambudweep Exports and Imports Ltd. से जुड़ा कथित फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले को बताया गया है। ED के अनुसार, कंपनी पर आरोप है कि वास्तविक माल की खरीद-बिक्री या आवाजाही के बिना फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए गए और उनके आधार पर ITC का दावा किया गया।
जांच में कई कथित फर्जी या अस्तित्वहीन कंपनियों के माध्यम से सर्कुलर ट्रांजैक्शन, फंड की लेयरिंग और बाद में नकदी निकाले जाने की बात सामने आई है। GST अधिकारियों की जांच के मुताबिक करीब 9.63 करोड़ रुपये का ITC गलत तरीके से लिया गया, जबकि लगभग 10.28 करोड़ रुपये का ITC आगे दूसरी इकाइयों को पास किया गया।
ED इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित तौर पर फर्जी ITC से हासिल रकम का वास्तविक लाभ किसे मिला और पैसा किन कंपनियों या व्यक्तियों के माध्यम से आगे बढ़ाया गया।
2 करोड़ रुपये नकद और दस्तावेज बरामद
ED की तलाशी के दौरान करीब 2 करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह नकदी मुजफ्फरनगर स्थित न्यू राणा हाउस और गाजियाबाद के सुधा स्टील्स से जुड़े ठिकाने से मिली। इसके अलावा कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी जांच टीम के हाथ लगे हैं।
हालांकि अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में बरामद नकदी की राशि को लेकर अंतर दिखाई दिया था, बाद की रिपोर्टों में ED की कार्रवाई से जुड़े करीब 2 करोड़ रुपये की बरामदगी की जानकारी दी गई है। इसलिए फिलहाल यही आंकड़ा अधिक पुष्ट रूप से सामने आता है।
20 घंटे से ज्यादा चली कार्रवाई
मुजफ्फरनगर में ED की कार्रवाई करीब 20 घंटे से ज्यादा समय तक चलने की जानकारी सामने आई है। सोमवार सुबह करीब 5-6 बजे शुरू हुई तलाशी देर रात तक जारी रही। अधिकारी दस्तावेज, बही-खाते, कारोबारी रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच करते रहे।
कार्रवाई के दौरान ED अधिकारियों ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और स्थानीय अधिकारियों को भी जांच स्थल के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। तलाशी के चलते जिले के लोहा कारोबार से जुड़े कारोबारियों में भी हलचल रही।
शाहनवाज राणा पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं
शाहनवाज राणा पहले भी GST से जुड़े मामले में जांच के घेरे में आ चुके हैं। दिसंबर 2024 में राणा स्टील फैक्ट्री पर CGST और DGGI की कार्रवाई के दौरान अधिकारियों के साथ कथित बदसलूकी और वाहनों में तोड़फोड़ का मामला सामने आया था। इसके बाद शाहनवाज राणा समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
इसके बाद उन पर कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों के जरिए GST चोरी और गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामले भी दर्ज हुए। रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2025 में उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।
राजनीतिक और कारोबारी कनेक्शन भी जांच के घेरे में
ED की मौजूदा कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें एक तरफ राणा परिवार के राजनीतिक रूप से प्रभावशाली सदस्यों के आवास और दूसरी तरफ लोहा कारोबार से जुड़े कारोबारी प्रतिष्ठान शामिल हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक शाहनवाज राणा का कारोबारी नेटवर्क कई कंपनियों से जुड़ा रहा है। ED अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी ITC के जरिए बनाई गई रकम किन कंपनियों के बीच घूमी, उसका अंतिम लाभार्थी कौन था और क्या इस पूरी प्रक्रिया में मनी लॉन्ड्रिंग हुई।
फिलहाल ED की जांच जारी है। छापेमारी में मिले दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद आगे की कार्रवाई की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ED की कार्रवाई और जांच में लगाए गए आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं; अंतिम दोष सिद्धि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
ईडी के एक सूत्र का कहना है कि मुजफ्फरनगर में सुबह से कई जगहों पर रेड चल रही है।
एक पूर्व विधायक के संस्थानों के अलावा एक स्थानीय अख़बार के दफ़्तर को भी खंगाला जा रहा है।
चौंकाने वाली बात तो यह है कि एक पब्लिक स्कूल के मालिक पर भी छापा पड़ा है जो बीजेपी के नेता के रिश्तेदार भी हैं।
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वैसे पिछले दिनों मैंने लिखा था कि जीएसटी चोरी करने वाले सबसे ज्यादा माल कमा रहे हैं। ये सब वही खेल है।
-हर्ष कुमार


