नई दिल्ली। एक राखी विज्ञापन में अभिनेत्री कृति सेनन की ड्रेस को लेकर शुरू हुए विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। दूरदर्शन से जुड़े एंकर सुधीर चौधरी और भाजपा सांसद कंगना रनौत के बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया है। आलोचकों ने दोनों पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने और भड़काऊ तथा भ्रामक बातें करने का आरोप लगाया है।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब सुधीर चौधरी ने कंगना रनौत से कथित तौर पर सवाल किया, “क्या कृति यही ड्रेस ईद पर भी पहनेंगी?” इसके जवाब में कंगना रनौत ने मुस्लिम समुदाय के बारे में टिप्पणी करते हुए कहा कि “उस धर्म में आज भी अपनी बहनों और कजिन से शादी करते हैं…”
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। आलोचकों ने कंगना रनौत के बयान को गलत बताते हुए सवाल उठाया कि उन्हें यह जानकारी किसने दी कि मुस्लिम समुदाय में अपनी सगी बहनों से विवाह किया जाता है। लोगों ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय के खिलाफ दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े झूठे और भड़काऊ नैरेटिव को दोहराकर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
आलोचकों का यह भी कहना है कि चचेरे या रिश्ते के भाई-बहनों के बीच विवाह की परंपरा केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं है। भारत के कई हिंदू समुदायों में भी पारंपरिक रूप से रिश्तेदारी के भीतर विवाह की प्रथाएं रही हैं। विशेष रूप से दक्षिण भारत के तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पुडुचेरी के कुछ समुदायों में ऐसी परंपराएं देखी जाती हैं।
इस पूरे विवाद को लेकर सोशल मीडिया पर यह आरोप भी लगाया गया कि सत्तारूढ़ भाजपा की निर्वाचित सांसद और सार्वजनिक प्रसारक दूरदर्शन से जुड़े एक प्रमुख एंकर द्वारा सार्वजनिक मंच पर पूरे मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।
आलोचकों का कहना है कि भारत में मुसलमानों के खिलाफ सार्वजनिक मंचों पर की जाने वाली टिप्पणियां और उन्हें बदनाम करने की प्रवृत्ति इतनी सामान्य होती जा रही है कि कई बार गंभीर आरोपों और विवादित बयानों पर भी अपेक्षित स्तर का सार्वजनिक आक्रोश देखने को नहीं मिलता।
An elected MP Kangana from the ruling Party BJP India and an Anchor sudhir chaudhary working for Doordarshan, funded entirely by the taxpayers are targetting entire Muslim community for no reason. Openly vilifying Muslims on public platforms has become so normalised in India that even statements like these barely provoke the outrage they should.
-मोहम्मद जुबेर, फैक्ट चेकर


