सुभाष सिंह सुमन-
IBC जब आया था, मैं इसका फैन हो गया था। अब जब तस्वीर साफ हुई है, मैं समझ पा रहा हूँ कि IBC अमृतलाल ब्रो की अनंत BCयों में एक और BC भर है, तब अपना फैनबॉय मोमेंट मुझे शर्मिन्दगी में धकेल दे रहा है।
अभी ताजा खबर है जी न्यूज वाले सुभाष चंद्रा की। भाई के ऊपर कई कर्जदाताओं का 22,006 करोड़ रुपये उधार (कर्जा) था। अमृतलाल ब्रो की IBC वाली BC के हिसाब से कर्जदाता एनसीएलटी के पास गये। इनसॉल्वेंसी का प्रोसेस आगे बढ़ा। चंद्रा ब्रो ने एनसीएलटी को एक मस्त प्लान दिया। एनसीएलटी ने उसको ओके कर दिया। कुछ कर्जदाता न-नुकूर कर रहे थे। एनसीएलटी ने उनको डपट भी दिया।
असली सिनेमा चंद्रा ब्रो के प्लान में है। 22,006 करोड़ रुपये का कर्जा सेटल करने के लिए चंद्रा ब्रो ने साढ़े 6 करोड़ रुपये भरने का प्लान दिया। और यह मजाक नहीं है। मजाक जैसा लग रहा है, लेकिन सच में मजाक नहीं है। मजाक जैसा लगने वाले इस प्लान को एनसीएलटी ने मंजूर कर दिया, यह भी मजाक नहीं है। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस जैसे कुछ कर्जदाताओं ने जब इस प्लान को मजाक बताकर विरोध किया, एनसीएलटी से सबको डाँट पड़ी… और यह भी मजाक नहीं है।
थोड़ा और डिटेल में देखिये। टोटल कर्ज 22,006.57 करोड़ रुपये। इसके बदले में कर्जदाताओं को सुभाष चंद्रा से मिलेंगे 6.25 करोड़ रुपये। सुभाष चंद्रा 25 लाख रुपये प्रोसेस कॉस्ट की एवज में देंगे।
कर्ज-सेटलमेंट आदि की तकनीकी भाषा में एक टर्म आता है हेयरकट। जैसे मान लो कि किसी के ऊपर टोटल कर्जा है हजार रुपये। कुछ प्रतिकूल परिस्थितियाँ बनीं। कर्जदार चुकाने में असमर्थ हो गया। बैंक प्रयास करेंगे कि ब्याज छोड़ो, कम से कम मूलधन निकल जाये। इसपर भी बात नहीं बनता देख बैंक चाहेंगे कुछ भी निकल जाये। भागते भूत की लंगोट टाइप। अब मान लीजिये उसे हजार रुपये वाले कर्ज को सेटल करने के लिए बैंक को मिले 750 रुपये। ये जो 250 रुपये का लॉस हुआ बैंक को, यही हेयरकट है। हेयरकट नाम इस कारण है कि आदर्श स्थिति में बाल बराबर लॉस ही एज्यूम करके चला जाता है।
चंद्रा ब्रो वाले मामले में हेयरकट हो जा रहा है ऑलमोस्ट 22,000 करोड़ रुपये का, यानी 99.97 पर्सेंट का। अब 22,006 करोड़ के कर्ज में 22,000 करोड़ रुपये का हेयरकट हो, यह तो हेयरकट के नाम पर मजाक हो गया। इसे हेयरकट नहीं, हेडकट भी नहीं, होल बॉडीकट कहना उपयुक्त रहेगा।
कि आप सलून गये बाल कटाने। सलून वाले ने आपको ही डस्टबिन में फेंक दिया और कटे बाल को कह दिया घर जाओ।
आईबीसी आया, उस समय तर्क दिया गया कि अभी तक लगभग सारे कर्ज डूब जाते हैं। आईबीसी से कुछ तो रिकवरी होगी। यह बात मुझे पते की लगी थी। अब मान लीजिये कि पूरे हजार डूबें, उससे बेहतर है कि 500 मिल जायें। लेकिन हजार में 1 रुपये भी न मिलें, तो मिलने या डूबने में कोई फर्क ही कहाँ रह गया!
इस सरकार और इसके सरकारी भक्तों को आम लोगों से एक बड़ी शिकायत रहती है। शिकायत कि लोग बिजनेसमैन को खलनायक समझते हैं। अब एक आम व्यक्ति भूखमरी जैसे हालात में फंस जाने के बाद भी इस तरह केस सेटल करने की सुविधा नहीं पा सकता। उसका हजार का कर्ज 700-800 में भी सेटल हो, तब भी राहत नहीं है, क्योंकि उसके सिबिल पर कई सालों तक वह काला धब्बा बनकर दर्ज रहने वाला है और भविष्य में उसे कर्ज मिल पाने की संभावनाओं को शून्य कर देने वाला है। लेकिन बिजनेसमैन, खासकर सरकार के पैरोकार बिजनेसमैन 99.97 पर्सेंट हेयरकट मजे में पा जाते हैं।
इस हेयरकट के बाद भी भविष्य में कर्ज लेने की उनकी संभावनाएँ शून्य नहीं होती है। बिजनेसमैन कभी भी भूखमरी की स्थिति में नहीं जाता है। अभी 2 महीने पहले तक उसके पास लुटियंस का सबसे महँगा बंगला होता है। अभी भी उसके पास हजारों करोड़ों की निजी संपत्तियाँ, आलीशान घर-बंगले-दफ्तर आदि होते हैं। अब ऐसे में आम नागरिक क्यों बिजनेसमैन को खलनायक नहीं समझे और अमृतकाल की सरकार को बिजनेसमैन की रखैल? मुझे इस प्रश्न के कुछ तार्किक उत्तर चाहिए। BCयां तो IBCयों जैसी प्रोफेशनली कवर करता हूँ।
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