नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर कुछ समय पहले Republic TV की कवरेज में अमेरिकी कनेक्शन और कथित विदेशी फंडिंग के सवाल उठाए गए थे। रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने अपने प्राइम टाइम कार्यक्रमों में CJP आंदोलन के पीछे कथित ‘अमेरिकी प्रभाव’, ‘डीप स्टेट’ और विदेशी तकनीक के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए थे।
रिपब्लिक की एक रिपोर्ट/बहस में सवाल उठाया गया था कि क्या CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन के पीछे अमेरिका का कोई प्रभाव या ‘डीप स्टेट’ की भूमिका है। बाद की कवरेज में अमेरिकी तकनीक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और नेपाल में हुए आंदोलनों के संदर्भ को भी CJP से जोड़कर सवाल उठाए गए।
हालांकि, इन दावों को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि विदेशी फंडिंग का कोई पुष्ट सरकारी निष्कर्ष सामने नहीं आया है। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने अमेरिकी पढ़ाई के खर्च को लेकर उठे सवालों पर कहा है कि उनकी शिक्षा Boston University की scholarship और education loan से हुई थी।
क्या अमेरिकी विदेश मंत्री के विरोध के बाद वीडियो हटाया गया?
सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया गया है कि अमेरिकी पक्ष की आपत्ति के बाद Republic TV को CJP की कथित अमेरिकी फंडिंग से जुड़ा वीडियो हटाना पड़ा। हालांकि, उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों और सार्वजनिक रिकॉर्ड की पड़ताल में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिलती। इसलिए इसे फिलहाल पुष्ट तथ्य के बजाय एक दावा/विवाद के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अब सर्जियो गोर ने भारतीय न्यूज चैनलों पर कसा तंज
CJP और अमेरिकी कनेक्शन को लेकर चली इस बहस के बीच आज अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारतीय टीवी न्यूज चैनलों की बहस की शैली पर ही तंज कस दिया।
नई दिल्ली में आयोजित Economic Times World Leaders Forum में बोलते हुए गोर ने कहा कि उन्हें भारतीय टीवी न्यूज देखना पसंद है, लेकिन जैसे-जैसे रात होती है, शो और ज्यादा ‘crazy’ होते जाते हैं। उन्होंने कहा कि शाम 6 बजे किसी शो में करीब 8 लोग बहस करते दिखाई देते हैं, जबकि रात 10 बजे तक यह संख्या 12 तक पहुंच जाती है और सभी एक साथ बोलते हैं।
गोर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि जब सभी लोग एक साथ बोलते हैं तो “आप किसी की एक बात भी नहीं सुन सकते।” भारतीय प्राइम टाइम डिबेट के इस अंदाज पर उनकी टिप्पणी अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है।
CJP विवाद में मीडिया की भूमिका पर भी सवाल
CJP को लेकर Republic TV की आक्रामक कवरेज के साथ-साथ दूसरे मीडिया संस्थानों ने भी आंदोलन, उसके संस्थापक और विदेशी कनेक्शन से जुड़े अलग-अलग दावों की रिपोर्टिंग की है। वहीं, अभिजीत दीपके लगातार विदेशी फंडिंग के आरोपों का जवाब देते रहे हैं। जुलाई में उन्होंने कहा था कि अगर विरोध-प्रदर्शनों में विदेशी फंडिंग के आरोप सही हैं तो यह देश की सुरक्षा व्यवस्था की विफलता होगी।
इस पूरे विवाद में फिलहाल दो बातें अलग-अलग रखना जरूरी है—CJP के अमेरिकी कनेक्शन और वहां से अभियान चलाने की बात एक तथ्य है, लेकिन इससे विदेशी फंडिंग या विदेशी साजिश साबित नहीं होती। दूसरी ओर, Republic TV ने ऐसे सवाल जरूर उठाए और उन्हें अपनी बहसों का हिस्सा बनाया।
और इसी बीच अमेरिकी राजदूत का भारतीय टीवी डिबेट पर तंज इस बहस को एक नया एंगल देता है—जिस टीवी संस्कृति में कई मेहमान एक साथ बोलते हैं, उसी पर अब भारत में तैनात अमेरिकी राजनयिक ने सार्वजनिक मंच से मजाक किया है।
रिपब्लिक टीवी ने कुछ दिन पहले एक प्रोग्राम में कॉकरोच जनता पार्टी के तार बेवज़ह अमेरिका से जोड़ दिए।
उसी रात भारत में अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर ने सूचना–प्रसारण मंत्री को फोन लगाया। फेक न्यूज की शिकायत कर दी।
अगले ही दिन अर्णब गोस्वामी को उस प्रोग्राम की लिंक सोशल मीडिया से हटानी पड़ी।
फिर कल गोर ने भारतीय गोदी मीडिया की धज्जियां उड़ा दी।
ये उस डीप स्टेट थ्योरी के इडियट्स को एक सबक है, जो हर मुद्दे के तार अमेरिका से जोड़ते हैं।
क्योंकि, उनके पास न तर्क हैं, न तथ्य। उनका काम पत्रकार की खाल में लोगों को उल्लू बनाना है।
-सौमित्र राय, वरिष्ठ पत्रकार
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