नई दिल्ली। दलित लेखक संघ (दलेस) ने अपने 30वें स्थापना दिवस के मौके पर पत्रकार, कवि और लेखक भाषा सिंह को दलेस कीर्ति सम्मान से सम्मानित किया। यह सम्मान कला, साहित्य, संस्कृति, पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र में दलित चेतना के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया जाता है।
15 अगस्त 2026 को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित अंबेडकर भवन में आयोजित समारोह में दलेस अध्यक्ष हीरालाल राजस्थानी ने कहा कि ‘भोगा हुआ यथार्थ’ जब ‘देखे हुए यथार्थ’ के साथ जुड़ता है, तभी पूरा सच सामने आता है। उन्होंने कहा कि दलेस अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर उन लोगों को भी सम्मानित कर रहा है, जो दलित समाज से नहीं होने के बावजूद पूरी संवेदनशीलता के साथ इस सच को सामने ला रहे हैं।
यह दलेस का छठा कीर्ति सम्मान था। इससे पहले चित्रकला के लिए चित्रपाल, दलित लेखन के लिए मोहनदास नैमिशराय और जयप्रकाश कर्दम, कविता और आलोचना के लिए शेखर पवार तथा चित्रकला के लिए सावी (सविंद्र) सावरकर को यह सम्मान दिया जा चुका है।
भाषा सिंह ने पत्रकारिता के दौरान दलित, पिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक और अन्य हाशिये के समुदायों के सवालों को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने अमर उजाला कारोबार, अमर उजाला, नवभारत टाइम्स और आउटलुक जैसी संस्थाओं में काम किया है। वह न्यूज़क्लिक से भी जुड़ी रही हैं और फिलहाल अपने यूट्यूब चैनल ‘बेबाक भाषा’ के जरिए सक्रिय हैं।
आउटलुक में रहते हुए उन्होंने मैला ढोने वाले समुदाय की स्थिति पर रिपोर्टिंग की और प्रतिबंध के बावजूद जारी इस अमानवीय प्रथा को सामने लाया। उनकी किताब ‘अदृश्य भारत’ इसी विषय पर आधारित है, जिसका कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उन्होंने सीएए-एनआरसी विरोधी आंदोलन पर ‘शाहीन बाग़: लोकतंत्र की नई करवट’ पुस्तक भी लिखी, जिसमें महिलाओं, खासकर मुस्लिम महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया गया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और सफाई कर्मचारी आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक बैजवाड़ा विल्सन ने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उनके काम और विचारों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि भाषा सिंह लगातार दलित और वंचित समुदायों के अधिकारों के पक्ष में खड़ी रही हैं।
समारोह में ‘पत्रकारिता, लोकतंत्र और धार्मिक-सामाजिक विषमता’ विषय पर भी चर्चा हुई। कवि-पत्रकार राज वाल्मीकि ने कहा कि देश आजादी के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, लेकिन वास्तविक लोकतंत्र अभी भी दूर है। उन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक लोकतंत्र के साथ सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र भी जरूरी है।
सम्मान ग्रहण करने के बाद भाषा सिंह ने मैला ढोने वाले समुदाय के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने आंध्र प्रदेश की नारायणाम्मा और हरियाणा की सरोज देवी के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि अमानवीय परिस्थितियों में रहने के बावजूद इन महिलाओं में गजब की जिजीविषा देखने को मिली।
कार्यक्रम में पूनम तुषामड़ ने भाषा सिंह पर आलेख पढ़ा, जबकि सरिता संधू ने उनकी चार कविताओं का पाठ किया। भाषा सिंह ने भी अपनी कविता सुनाई। शेखर पवार, नेतराम ठगेला, बजरंग बिहारी तिवारी और अभय कुमार समेत अन्य वक्ताओं ने उनकी पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों की सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन बलविंद्र सिंह बलि ने किया और धन्यवाद ज्ञापन दलेस की ओर से पद्म प्रतीक ने दिया। समारोह में रामशरण जोशी, उपेंद्र स्वामी, मुकुल सरल, सुलेखा सिंह, खिलखिल भाषानंदिनी, राजेंद्र कुमार, अमर सिंह, देव कबीर, डॉ. पूरन सिंह और शोभना समेत कई लोग मौजूद रहे।


