भोपाल। सहारा समूह की मध्य प्रदेश स्थित बेशकीमती जमीनों की बिक्री में करीब 72.82 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने करीब छह महीने की प्रारंभिक जांच के बाद सहारा समूह की कंपनियों और उसके तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद जमीनों की बिक्री से मिली रकम SEBI-Sahara Refund Account में पूरी तरह जमा नहीं कराई गई और करीब 72.82 करोड़ रुपये का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया।
EOW की FIR के मुताबिक मामले में सहारा समूह के प्रमुख रहे सुब्रत रॉय के बेटे सीमांतो रॉय, जेबी रॉय और ओपी श्रीवास्तव को आरोपी बनाया गया है। इनके अलावा सहारा समूह की संबंधित कंपनियों और अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। FIR में IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120-B (आपराधिक साजिश) लगाई गई है।
310 एकड़ से ज्यादा जमीनों का मामला
EOW की जांच में भोपाल, सागर, कटनी, जबलपुर और ग्वालियर की करीब 500 एकड़ जमीन से जुड़े लेनदेन की जांच सामने आई है। वहीं मामले की प्रमुख शिकायत और शुरुआती रिपोर्टों में भोपाल, कटनी और जबलपुर की करीब 310 एकड़ जमीन को खास तौर पर जांच के दायरे में बताया गया था। इन जमीनों को बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम कीमत पर बेचने और बिक्री की रकम को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक जमा नहीं कराने के आरोप लगाए गए।
EOW की FIR में कथित हेराफेरी की कुल रकम ₹72,82,26,728 बताई गई है। इसमें भोपाल और सागर की जमीनों की बिक्री से मिली ₹62.52 करोड़ की रकम को SEBI-Sahara Refund Account में जमा नहीं कराने और कटनी, जबलपुर व ग्वालियर में अलग-अलग मदों के नाम पर करीब ₹10.29 करोड़ की कटौती किए जाने का आरोप है।
जांच के मुताबिक भोपाल के मक्सी गांव की करीब 110.10 एकड़ जमीन का मूल्यांकन 2014 में सहारा समूह की ओर से सुप्रीम कोर्ट में करीब 125 करोड़ रुपये बताया गया था। बाद में यही जमीन करीब 47.73 करोड़ रुपये में बेच दी गई।
EOW के मुताबिक इस बिक्री से मिली पूरी 47.73 करोड़ रुपये की रकम SEBI-Sahara Refund Account में जमा नहीं की गई, बल्कि सहारा समूह की ही एक सोसायटी हमारा इंडिया क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के खाते में ट्रांसफर कर दी गई।
सागर की 99.76 एकड़ जमीन का भी सौदा
सागर में करीब 99.76 एकड़ जमीन 14.79 करोड़ रुपये में बेचे जाने की बात जांच में सामने आई। EOW के अनुसार इस सौदे से मिली रकम में से भी एक रुपया SEBI-Sahara Refund Account में जमा नहीं किया गया।
जांच में एक और गंभीर बात सामने आने का दावा है। एक बिक्री विलेख में करीब 1.61 करोड़ रुपये का चेक बाउंस होने के बावजूद भुगतान प्राप्त दिखाकर रजिस्ट्री कराई गई और वास्तविक भुगतान करीब दो साल बाद हुआ।
कटनी, जबलपुर और ग्वालियर में भी रकम काटने का आरोप
EOW के अनुसार कटनी, जबलपुर और ग्वालियर की जमीनों की बिक्री में रकम SEBI-Sahara खाते में जमा करने से पहले अलग-अलग मदों में कटौती की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
सहारा समूह की संपत्तियों की बिक्री से जुड़ा यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों से जुड़ा है। 5 दिसंबर 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह को संपत्तियां बेचकर मिलने वाली रकम SEBI-Sahara Refund Account में जमा कराने का निर्देश दिया था।
इसके बाद 4 जून 2014 को कोर्ट ने निर्देश दिया कि संपत्तियां संबंधित सर्किल रेट से कम कीमत पर नहीं बेची जाएंगी और खरीदार का सहारा समूह से संबंध नहीं होना चाहिए। 2016 में भी कोर्ट ने संपत्तियों को सर्किल रेट के 90 फीसदी से कम पर नहीं बेचने और बिक्री से मिलने वाली रकम को निर्धारित खाते में जमा करने के निर्देश दिए थे।
फर्जी तरीके से अधिकृत प्रतिनिधि बनाने का आरोप
EOW की जांच में यह भी सामने आया कि जमीनों की बिक्री के लिए जिन लोगों को अधिकृत प्रतिनिधि बताया गया, वे कथित तौर पर सहारा समूह के ही कर्मचारी थे। जांच एजेंसी के मुताबिक उनकी नियुक्ति केवल दस्तावेजों में दिखाई गई और इसके लिए किसी बोर्ड बैठक में मंजूरी नहीं ली गई थी।
संजय पाठक की कंपनियों का नाम कैसे आया?
इस मामले की शुरुआती जांच में विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक के परिवार से जुड़ी कंपनियों के जरिए सहारा की जमीनें खरीदे जाने के आरोप सामने आए थे। जनवरी 2025 में EOW ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की थी और बाद में संबंधित कंपनियों तथा सहारा प्रबंधन से जुड़े लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस भी भेजे थे।
रिपोर्टों के मुताबिक भोपाल की जमीन के सौदे में सिनाप/सिनाम रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड और कटनी-जबलपुर की जमीनों के सौदे में नायसा देवबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड का नाम सामने आया। इन कंपनियों के स्वामित्व में संजय पाठक के परिवार के सदस्यों के जुड़े होने की बात रिपोर्टों में कही गई है।
हालांकि महत्वपूर्ण बात यह है कि 25 जुलाई 2025 को दर्ज EOW की FIR में संजय पाठक को आरोपी नहीं बनाया गया है। FIR में सहारा की कंपनियों के साथ सीमांतो रॉय, जेबी रॉय, ओपी श्रीवास्तव और अन्य अज्ञात लोगों के नाम हैं। इसलिए संजय पाठक के खिलाफ आरोपों को फिलहाल जांच/शिकायत में लगाए गए आरोपों के रूप में ही रिपोर्ट किया जाना चाहिए, न कि उन्हें FIR का आरोपी बताया जाना चाहिए।
EOW की जांच का निष्कर्ष
EOW का आरोप है कि सहारा समूह के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद जमीनों की बिक्री से मिली रकम को निवेशकों के लिए निर्धारित SEBI-Sahara Refund Account में जमा नहीं कराया। जांच एजेंसी के मुताबिक ₹62.52 करोड़ सीधे खाते में जमा नहीं किए गए, जबकि ₹10.29 करोड़ अलग-अलग कटौतियों के जरिए कथित तौर पर हड़पे/दुरुपयोग किए गए। इस तरह कुल रकम ₹72.82 करोड़ बताई गई है। मामला अब EOW की विवेचना में है।



raj vardhan singh
August 23, 2026 at 2:34 pm
Sahara supreme court judge dog samjh ta op shrivtastav supreme court apne jeb kutta Tommy banaya Sahara kitne bar supreme baat thega dikha k judgment virodh kam kiya support tebal k niche kuch mil Raha esliye chup h