गुरदीप सिंह सप्पल-
सुभाष चंद्रा ने अपने वीडियो में कहा है कि 2016 में उनकी कुल दौलत / नेट वर्थ 39 करोड़ रुपये की थी, जो उन्होंने राज्यसभा चुनाव के एफिडेविट में घोषित की थी।
इसीलिए उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि 45000 करोड़ रुपये का आंकड़ा कहाँ से आया है। ये कुछ कुछ सच है, लेकिन इतना भी नहीं।
2016 में उन्होंने 39 करोड़ तो नहीं, Rs 49,73,55,871 (49.73 करोड़) के assets की घोषणा एफिडेविट में दी थी। लेकिन ये भी सच है कि 2016 में ही वो भारत के 18वें सबसे अमीर व्यक्ति भी थे।
कुल 49 करोड़ रुपये की नेटवर्थ और 18वें सबसे अमीर व्यक्ति होना, क्या दोनों बातें एक साथ सच हो सकती हैं ?
फोर्ब्स मैगज़ीन के अनुसार 2016 में उनकी कुल दौलत 5.6 billion dollar थी, जो उस वक़्त के हिसाब से करीब ₹37,500 करोड़ रुपये थी।
एक ही वक़्त में दो अलग अलग नेटवर्थ का सत्य उस पहेली का हल है, जो सबके सामने है। बाक़ी रही बात सुभाष चंद्रा के दावे की, कि उन्होंने ₹42000 करोड़ की देनदारी चुकायी भी है, उसका सच तो केवल मोदी सरकार बता सकती है और उसे देश के सामने रखना चाहिए।
एक पर्सनल टिप्पणी सुभाष जी के इमोशनल वक्तव्य पर।

आप एक सफल बिज़नेसमैन बने थे, इसमें कोई संदेह नहीं है। आपके अनुसार 2019 से आप के ऊपर आर्थिक संकट आने लगा था। जो जानते हैं, उन्हें पता है कि इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और मोदी सरकार का क्या रोल था।
लेकिन मोदी सरकार की नफ़रती विचारधारा की विषबेल को आपका चैनल Zee News फिर भी लगातार सींचता रहा। ये डर था, या RSS-BJP से वैचारिक सहमति, ये तो आप ही बेहतर बता सकते हैं।
लेकिन जिस सरकार की आर्थिक नीतियों के आप शिकार बने हैं, आप के अनुसार जीवन भर की आपकी पूंजी समाप्त हो गई, उस सरकार को ग़लत नीतियों के बावजूद ऑक्सीजन आपके चैनल से मिलती रही है।
जवाबदेही तय करने की जगह आपका मीडिया देशवासियों के सामने मोदी सरकार की झूठी गुलाबी तस्वीर पेश करता रहा, झूठ दिखा कर गुमराह करता रहा और साम्प्रदायिक भावनाएँ भड़का कर मोदी सरकार को बचाता रहा है।
जो भस्मासुर आपने पाला पोसा, उसने आपको भी भस्म कर दिया है।
बताइए, अब आप से सहानुभूति हो भी तो कैसे? आप की बर्बादी के किस्से तो अब फ़िज़ाओं में हैं, लेकिन देश का आम नागरिक, युवा, Gen Z, उनकी बदहाली के किस्से आपका चैनल अगर देश को बताना शुरू करेगा, मोदी सरकार की जवाबदेही तय करने लगेगा, तो उसे हम आपका प्रायश्चित मान लेंगे।
सुभाष चंद्रा जी, ज़मीन से उठ कर देश में सफल व्यापार खड़ा करना, नाम कमाना कोई छोटी बात नहीं होती है। आप ने भी किया था। उस व्यवस्था के तहत किया था जिसे आपने मोदी के जुमलों में और संघ के प्रचार में फंस कर उखाड़ने में मदद की। अब तो यकीन मानिए, कि तमाम खामियों के बावजूद वो सिस्टम बेहतर था जो कांग्रेस ने खड़ा किया था। अकेले आप नहीं, करीब डेढ़ हज़ार उद्योगपतियों की यही कहानी है, जो मोदी राज में अर्श से फ़र्श पर आ गए हैं।
लेखक कांग्रेस प्रवक्ता और राज्यसभा टीवी के पूर्व सीईओ रहे हैं।
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