आरएसएस चीफ मोहन भागवत अपने तीन दिवसीय दौरे पर अमेरिका गए हुये हैं। देशी मीडिया जमकर भागवत की वाहवाही छाप रहा है। मीडिया लिख रहा है कि न्यूयॉर्क में भागवत से कई हस्तियां मिलने पहुंची, वहीं मेयर जोहरान ममदानी ने भागवत का विरोध किया तो उनपर अमेरिकी हिंदू भड़क गए। और न जाने क्या क्या तेल लगाऊ कलम चलाई जा रही है। इधर खबर है कि जिस संस्था ने भागवत के कार्यक्रम का आयोजन रखा था, उसका एक्स अकाउंट ही ब्लॉक कर दिया गया है। नीचे पढ़ें…
प्रकरण पर नवभारत टाइम्स लिखता है-
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में भारतीय समुदाय को संबोधित करने से कुछ दिन पहले X ने ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ (AHEAD फोरम) का अकाउंट सस्पेंड कर दिया है। यह उस अमेरिका में हुआ है, जो खुद को मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का चैंपियन बताता है। बड़ी बात यह है कि इस सस्पेंशन को लेकर X की ओर से कोई कारण नहीं बताया गया है। AHEAD फोरम 29 अगस्त को होने वाले इवेंट का आयोजन कर रहा है। इस इवेंट का नाम “यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन” (सार्वभौमिक एकता उत्सव) है, जिसमें भागवत मैडिसन स्क्वायर गार्डन के इन्फोसिस थिएटर में लोगों को संबोधित करेंगे। अकाउंट सस्पेंड होने के बाद, AHEAD ने X से अकाउंट बहाल करने की अपील की है।

पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की पोस्ट-
विदेशों में जब ‘Unregistered-Underground’ लोग उभरकर आएंगे तो उनके X एकांउट तो सस्पेंड किये ही जाएंगे।
बेहद गंभीरता और चिंता के कारण पूरी दुनिया में बसे भारतीयों के बीच निम्नलिखित कुछ सवाल उठ रहे हैं:
- स्वदेशी का नारा लगानेवाले विदेश आख़िर क्या लेने गये हैं?
- क्या FCRA = Foreign Contribution (Regulation) Act का अध्ययन करने गये हैं?
- क्या अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले भारत का रुपया क्यों गिर रहा है इसका शोध करने गये हैं?
- क्या भारतीय किसानों को बर्बाद करने के लिए ‘अमेरिकी डील’ में कुछ और जुड़वाने गये हैं?
- क्या वहाँ भी साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने गये हैं?
- क्या वहाँ अपने ‘दरारवाद’ के प्रसार के लिए गये हैं?
- क्या अपनी ‘विभाजनकारी’ कुदाली नज़रिये की ज़मीन खोजने गये हैं?
- क्या वहाँ के क़ानून को भी स्मृतिमय बनाने गये हैं?
- क्या शाखा विस्तार करने गये है?
- क्या भारत में बने अपने भवनों के आय के स्रोत को वैधानिक जाँच से कैसे बचाएं, इसके लिए वकील की खोज में गये हैं?
- क्या आरक्षण के ख़िलाफ़ ‘समीक्षा’ या ‘सुधार’ जैसे किसी अन्य नये शब्द की तलाश में गये हैं?
- क्या भारत के संविधान को कमज़ोर करने के लिए अपने विचारवंशियों से विचार-विमर्श करने गये हैं?
- क्या देश की छवि को धूमिल करने गये हैं?
- सुरंग बनाने की नई टेक्नोलॉजी के स्टडी टूर पर गये हैं?
- क्या अपने अज्ञातवासियों से संपर्क साधने गये हैं?
- क्या वहाँ रह रहे भारतीयों के लिए संकट पैदा करने गये हैं?
- क्या विदेश नीति को गुट सापेक्ष मोड़ देने गये हैं?
- क्या मंदिरों के नाम पर विदेशों से इकट्ठा किये गये अकूत धन के चोरी किये जाने पर आक्रोशित भारतीय समाज को सफ़ाई देने गये हैं?
- क्या विदेशों में संभाल कर रखी, अपने सौ सालों की सीक्रेट खाता-बही का फ़ाइनल हिसाब-किताब करने गये हैं?
- क्या समाप्ति वर्ष की चलाचली की बेला का अंतिम उत्सव मनाने गये हैं?
- क्या भविष्य में वहाँ राजनीतिक प्रश्रय लेने की संभावना तलाशने गये हैं?


