अघोषित इमरजेंसी में किताबों पर अघोषित सेंसर। यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुस्तक के प्रकाशन और लोकार्पण की तय तारीख से अलग है।
संजय कुमार सिंह
आज भी ज्यादातर अखबारों का पहला पन्ना नेपाल में बाढ़ की खबर से भरा हुआ है लेकिन विसंगतियां कम नहीं हैं। द टेलीग्राफ में नेपाल से अलग कोई उल्लेखनीय खबर नहीं है। दि एशियन एज में सरकारी प्रचार है, प्रधानमंत्री ने कहा है कि सरकार देश में 21वीं सदी का खेल इकोसिस्टम तैयार कर रही है। विकसित भारत बनाने के लिए यह युवा शक्ति और खेल को जोड़ेगा। शिक्षा-परीक्षा का बुरा हाल करने के बाद इस खेल इकोसिस्टम से किसे कितना फायदा होगा समझना मुश्किल है। उसपर कुछ नहीं है। हालांकि, सरकारी प्रचार और भी है। अंदर की खबरों के बारे में बताया गया है कि राजनाथ सिंह के अनुसार, भारत का रक्षा उत्पादन 2014 से अब तक चार गुना बढ़कर 39000 करोड़ रुपये हो गया है।
नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने की खबर का शीर्षक है, मॉडल मुस्कान की ‘ना’ से गुस्साए इमरान ने की हत्या। दिल्ली के अखबार में दिल्ली की यह खबर पहले पन्ने पर तीन कॉलम में होना उतना महत्वपूर्ण नहीं है। लेकिन दिल्ली के मोहल्ले में एक व्यक्ति द्वारा एक हत्या इतनी बड़ी खबर कैसे या क्यों है समझना मुश्किल नहीं है। यह शीर्षक से भी स्पष्ट है। इसी पन्ने पर एक खबर का शीर्षक है, कानपुर में विमान दुर्घटनाग्रस्त प्रशिक्षु पायलट समेत दो मरे। खबर पढ़ने पर पता चला कि मरने वालों में प्रशिक्षक भी है। कायदे से शीर्षक प्रशिक्षक समेत दो मरे होना चाहिए था। खबर के अनुसार प्रशिक्षक का नाम सचिन भाटिया और प्रशिक्षु का नाम अभिषेक पुजारी था। यह शीर्षक में होता तो पाठकों को जानने-पहचाने में सहूलियत होती। दिल्ली के नागरिकों में मुस्कान और इमरान ढेरों होंगे और शीर्षक में नाम का उल्लेख पहचान की सहूलियत के लिए नहीं है।
दि इंडियन एक्सप्रेस में आज छपी खबर के अनुसार, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सोनिया गांधी की किताब प्रकाशित करने से मना कर दिया है। खबर के अनुसार उसने किताब के तथ्यों में ‘परिवर्तन’ के लिए कहा था जिसे लेखक ने मना कर दिया है। इससे पहले पूर्व सेना प्रमुख की किताब, उसके प्रकाशित होने और नहीं होने की खबरें आप जानते हैं। यह भी खबर थी कि सरकारी अधिकारी रिटायर होने के बाद 20 साल तक किताब नहीं लिख पाएंगे। उसके लिए भी अनुमति लेनी होगी। पर वह तो सरकारी अधिकारियों के लिए था, सोनिया गांधी का मामला तो बिल्कुल अलग होना चाहिए और प्रकाशक ने ऐसा क्यों कहा होगा या ऐसी किताब का प्रकाशन करने से इनकार करने की मजबूरी समझना मुश्किल नहीं है। जाहिर है, सोनिया गांधी अपनी किताब में जो कहना चाहती हैं, नहीं कह सकती हैं। संयोग हो या प्रयोग, पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के विवादित और अप्रकाशित संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ही थे।
अखबारों में आज पहले पन्ने की जो खबरें हैं उनमें 36,000 करोड़ के चीनी घोटाले का आरोप शामिल है। राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक जज के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के जज की सीजेआई को चिट्ठी का फॉलोअप भी आज होना चाहिए था। लेकिन अब ऐसा होता नहीं है और फिर भी होना चाहिए था तो इसलिए कि आज द हिन्दू में एक खबर है। खबर के अनुसार, राजस्थान हाईकोर्ट के वकीलों ने कहा है कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज की चिंताओं को अंदरूनी तौर पर सुलझाया जाए। जोधपुर में राजस्थान हाई कोर्ट की मुख्य सीट और जयपुर बेंच के वकील संगठनों ने गुरुवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जज द्वारा उठाए गए मुद्दों को न्यायपालिका के अंदरूनी मंच पर ही सुलझाया जाना चाहिए। वकील संगठनों ने एक स्थायी चीफ जस्टिस की नियुक्ति की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। मुझे लगता है कि कल की खबर के बाद यह एक जरूरी फॉलोअप है। इसीलिए द हिन्दू ने इसे पहले पन्ने पर फोटो के साथ चार कॉलम में छापा है लेकिन किसी और अखबार में यह खबर इतनी प्रमुखता से नहीं दिखी।
आज की दूसरी खबर कांग्रेस का आरोप है कि चीनी महंगी होने का कारण 36,000 करोड़ रुपए का घोटाला है। देशबन्धु में पांच कॉलम के ब़ॉटम का शीर्षक है, “चीनी संकट 36000 करोड़ का घोटाला : कांग्रेस”। इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, मुनाफाखोरो व काला बाजारियों को मिला आम जनता को लूटने का मौका। खबर इस प्रकार है, देश में चीनी संकट को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। कहा है कि यह 36 हजार करोड़ रुपए का घोटाला है। इसे मुनाफाखोरों और काला बाजारियों को पैसा कमाने के लिए पैदा किया गया है। खबर के अनुसार, सरकार को पहले से पता था कि चीनी का स्टॉक कम है, लेकिन वह आंख मूंद कर सोती रही। त्योहारी सीजन में चीनी की कीमत 45 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 70-75 रुपए प्रति किलो पर पहुंच चुकी है।
इस कारण उपभोक्ताओं को 36 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त देने होंगे। यह खबर पहले द टेलीग्राफ में छपी थी। मैंने यहां लिखा था। मीडिया ने उसका कोई फॉलो अप नहीं किया और आज कांग्रेस के आरोप लगाने पर भी इस खबर को प्रमुखता नहीं मिली है और पहले पन्ने तो नहीं ही है। आपको याद होगा, पहले इस तरह कीमतें बढ़ती थी तो भाजपा कैसा आंदोलन करती थी और अब क्या करती रही है। इसमें, मैं प्याज नहीं खाती से लेकर चीनी से डायबिटीज होती है या डायबिटीज वालों के लिए चीनी नुकसानदेह है जैसी खबरें शामिल हैं। कांग्रेस मांग कर रही है कि गरीबों को त्यौहारी सीजन में सस्ती चीनी मुहैया कराई जाए। सरकार इन सब चीजों से निश्चिंत है। हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने की लीड का शीर्षक है, प्रधानमंत्री उज़्बेकिस्तान और एससीओ समिट के लिए रवाना; महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों की संभावना। विदेश नीति की जो हालत है उसमें लीड के साथ की इस खबर का मतलब समझा जा सकता है, बैठक की घोषणा को लेकर भारत ब्रिक्स देशों के साथ फ्रैंक वार्ता कर रहा है। हिन्दुस्तान टाइम्स की सेकेंड लीड भी बड़ी खबर है, मणिपुर में नगालैंड के चार मारे गए और एक घायल है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की सेकेंड लीड पूंजी बाजार की हालत पर है। खबर के अनुसार, सेनसेक्स पांच मिनट में 2200 प्वाइंट गिरा और अगले सात मिनट में 2000 प्वाइंट चढ़ गया। इस तरह कल सवा तीन बजे पूंजी बाजार में एक लाख रुपया लगाकर 3.20 पर 44 लाख कमाया जा सकता था। पार्थ सिन्हा की रिपोर्ट के अनुसार, शेयरों की क्लोजिंग प्राइस (बंद होने की कीमत) का पता लगाने के लिए एक नया सिस्टम लाया गया है, जिसे आम तौर पर सीएएस (क्लोजिंग ऑक्शन सेशन) कहा जाता है। इसका मकसद कीमतों में हेर-फेर को रोकना है, लेकिन इससे बाज़ार में भारी उतार-चढ़ाव आ रहा है और ट्रेडर्स के लिए बड़ा मुनाफ़ा कमाने के मौके भी बन रहे हैं। खबर के अनुसार, कीमतों में इस तरह के बड़े उतार-चढ़ाव ने कुछ ही मिनटों में भारी मुनाफ़ा कमाने के मौके भी दिए हैं। इस उतार-चढ़ाव को लेकर सोशल मीडिया पर मचे हंगामे के बीच, एक्स पर एक पोस्ट में बताया गया है कि अगर किसी ने दोपहर 3:15 बजे 76,500 के सेंसेक्स पुट ऑप्शन में एक लाख रुपये का निवेश किया होता और 3:20 बजे उससे बाहर निकल गया होता, तो पाँच मिनट में ही 44 लाख रुपये का मुनाफ़ा कमा सकता था।
आज अमर उजाला की उल्लेखनीय खबर इस प्रकार है, भागवत के कार्यक्रम आयोजक का एक्स अकाउंट निलंबित। यह खबर आज नवोदय टाइम्स में भी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख, मोहन भागवत का 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में कार्यक्रम है। इसका विरोध हो रहा है और विरोध करने वालों में मेयर ज़ोहरान ममदानी भी हैं। असल में उन्होंने कहा है कि वे इस प्रस्तावित कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। इसमें भागवत भारतीय प्रवासियों को संबोधित करेंगे। खबर है कि आयोजक अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (अहेड) का एक्स अकाउंट निलंबित कर दिया गया। वजह अभी स्पष्ट नहीं है। नवोदय टाइम्स में शीर्षक है, भागवत के कार्यक्रम के मेजबान का एक्स अकाउंट घंटों बंद रहा। दैनिक भास्कर में आम आदमी के मतलब की खबर है, 24 करोड़ पुरानी गाड़ियों को फिर मिल सकता है ई10 पेट्रोल, लेकिन प्रीमियम होगा इसलिए दाम भी ज्यादा।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


