बरेली। भाजपा के मेयर उमेश गौतम के रक्षाबंधन कार्यक्रम को लेकर बरेली की पत्रकारिता भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। कार्यक्रम से पहले शहर के लगभग सभी प्रमुख अखबारों में मेयर की ओर से फुल पेज विज्ञापन प्रकाशित कराए गए। लेकिन कार्यक्रम के दौरान भारी भीड़ और कथित भगदड़ जैसे हालात में एक महिला की मौत के बाद अलग-अलग अखबारों की कवरेज में बड़ा अंतर देखने को मिला।
बरेली क्लब ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची थीं। महिलाओं को मेयर उमेश गौतम को राखी बांधनी थी और बदले में उपहार दिए जाने थे। उम्मीद से अधिक भीड़ पहुंचने के बाद वहां अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई। इस दौरान एक महिला की मौत की खबर सामने आई।
इस घटना को अमर उजाला ने प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया और भीड़, अव्यवस्था तथा महिला की मौत से जुड़े घटनाक्रम को विस्तार से पाठकों तक पहुंचाया। दूसरी ओर, अमृत विचार में घटना को लेकर अपेक्षित कवरेज नहीं दिखाई दी, जिसे लेकर पत्रकारिता जगत में सवाल उठ रहे हैं। दैनिक जागरण की कवरेज के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है।


मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि कार्यक्रम से पहले मेयर उमेश गौतम के रक्षाबंधन आयोजन के फुल पेज विज्ञापन शहर के विभिन्न अखबारों में प्रकाशित हुए थे। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि जब एक ही कार्यक्रम के विज्ञापन सभी प्रमुख अखबारों में मौजूद थे, तब गंभीर घटना की रिपोर्टिंग और उसे दी गई प्रमुखता में इतना अंतर क्यों रहा?
यहां मुद्दा केवल विज्ञापन का नहीं, बल्कि संपादकीय प्राथमिकता का भी है। एक ओर आयोजन का प्रचार करने वाले विज्ञापन पूरे पन्ने पर दिखाई दिए, दूसरी ओर उसी आयोजन में हुई मौत की खबर को किस मीडिया संस्थान ने कितनी जगह और किस प्रमुखता से प्रकाशित किया—यह तुलना अब पाठक खुद कर रहे हैं।
अमर उजाला की कवरेज ने यह भी साफ कर दिया कि किसी कार्यक्रम का विज्ञापन मिलने के बावजूद गंभीर और जनहित से जुड़ी खबर प्रकाशित की जा सकती है। ऐसे में अन्य मीडिया संस्थानों की भूमिका और संपादकीय फैसलों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सबसे बड़ा सवाल हालांकि राजनीतिक नहीं, मानवीय है। उपहार की उम्मीद लेकर कार्यक्रम में पहुंची महिलाओं की भारी भीड़ के बीच एक महिला की जान चली गई। क्या आयोजन स्थल पर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे? क्या प्रशासन और आयोजकों ने संभावित भीड़ का सही आकलन किया था? इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
फुल पेज विज्ञापन अपनी जगह हैं और पत्रकारिता अपनी जगह। लेकिन जब एक ही कार्यक्रम में हुई गंभीर घटना की कवरेज अलग-अलग अखबारों में अलग स्तर पर दिखाई दे, तो पाठकों के मन में सवाल उठना तय है। बरेली के मेयर उमेश गौतम के इस रक्षाबंधन कार्यक्रम ने अब भीड़ प्रबंधन के साथ-साथ स्थानीय मीडिया की संपादकीय प्राथमिकताओं पर भी बहस छेड़ दी है।
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