यशवंत सिंह-
आज गाजीपुर में दो जगह जाना हुआ। दिन में नए बनने वाले मल्टीस्टोरी एसपी सिटी ऑफिस का भूमिपूजन कार्यक्रम हुआ। आयोजन में डीआईजी वाराणसी वैभव कृष्ण जी, डीएम अनुपम शुक्ला जी, एसएसपी डॉ इरज राजा जी, एसपी सिटी राकेश मिश्रा तूफ़ान जी समेत जिले के बहुत सारे अधिकारी उपस्थित थे। इस बिल्डिंग को बनाने का जिम्मा भाई Aashish Rai जी को मिला है। देर में पहुँचा तो देखा भूमिपूजन धार्मिक विधि विधान से हो रहा है। मैं गर्मी से बचने को बगल वाली राजू भाई की बोरिंग की दुकान पर जाकर पंखे के नीचे बैठ गया। पूजा खत्म होने पर आशीष राय जी ने मुझे बुलवाया। यहाँ सबसे दुआ सलाम बतकही के बाद आरएसएस के रक्षाबन्धन कार्यक्रम में एक मित्र मुझे लेकर कान्हा हवेली चले गए।
मंच से बनारस के क्षेत्र प्रचारक अनिल जी का संबोधन चल रहा था। पचास मिनट के भाषण में कुछ भी नया नहीं था। पूरे भाषण के दौरान एक बार भी ताली नहीं बजी और जब भाषण खत्म हुआ तो सबने ताली बजा कर आभार जताया। मेरे सामने बैठे टीन ऐज चार बच्चे पूरे कार्यक्रम के दौरान मोबाइल में डूबे रहे। जैसे उन्हें यहाँ जबरन लाकर बिठा दिया गया हो।
नमस्ते सदा वत्सले वाला कार्यक्रम सीने पर दाहिना हाथ रखकर शुरू हुआ तो पूरा हाल तन्मयता से खड़ा होकर गाता दिखा। मैं केवल खड़ा हुआ। एसी ठीक से काम नहीं कर रहा था और हाल लगभग भर चुका था तो पसीना खूब हो रहा था। रूमाल बार बार माथे की तरफ़ जा रहा था।
हाल के बाहर निकला तो पूर्व मंत्री और भाजपा नेता विजय मिश्रा जी मिल गए। तभी क्षेत्र प्रचारक अनिल जी बाहर निकल रहे थे। मैंने उनसे यूँ ही पूछ लिया, हर जगह आपकी सरकार है लेकिन आपके बैनर में ग़ाज़ीपुर को गाधिपुरी लिखा गया है, लेकिन ये नाम आरएसएस के रजिस्टर से अब तक सरकारी रजिस्टर में क्यों नहीं उतर पाया? कोई ख़ास वजह?

क्षेत्र प्रचारक अनिल जी बोले- यहाँ के लोगों की कमी है, किसी ने माँग लिखित नहीं की, कोई अभियान नहीं चलाया, माँग तो यहीं से उठे तब न…
मैं उनकी बात समझने की कोशिश कर रहा था तभी एक बुजुर्ग ने कहा कि माँग और अभियान तो बहुत पहले से जारी है।
खैर, ये सब बात होते हवाते प्रचारक महोदय आगे बढ़ गए। हाल से निकलते हुए सभी लोगों को मिठाई के डिब्बे दिए जा रहे थे। मैंने अपना डिब्बा अपने संघी मित्र के हवाले कर दिया।
आरएसएस के कार्यक्रम में उनके मुख्य वक्ता को सुनकर लगा कि संघ के लोगों ने ख़ुद को समय के साथ अपग्रेड नहीं किया है या फिर उनका सुर लय ताल बस इतने तक ही सीमित रखा गया है। जो बातें वे बताते रहे, वो सबको पता है। रक्षाबंधन क्या है। किस प्रांत में किस तरह से मनाया जाता है। फिर इशारे में हिंदू मुस्लिम वाली बात ले आए और हिंदुओं को संगठित रहने की अपील की। धर्म परिवर्तित कर चुके लोगों की घर वापसी कराने का आह्वान किया।
उनके लंबे भाषण में कुछ भी ऐसा नहीं था जो नई पीढ़ी के लिए था या उनके लाइफ से कनेक्ट था। धर्म की रक्षा करना है, सनातन का ज्वार है, भगवा रंग सदियों से चलता आया है, कांवड़ में जेनजी जाता है, यही सब भाषण का निचोड़ रहा।
पिछले बारह साल से जनता यही सब तो सुन रही है। हर जगह बीजेपी की सरकार है। धर्म की खूब रक्षा हो रही है, सनातन का ज्वार आया है। लेकिन अब बात इसके आगे ले जाइए। हिंदुओं के बच्चों को रोजगार देने का क्या प्लान है? पेपरलीक क्यों हो जा रहा, हेल्थ सर्विसेज का इतना बुरा हाल क्यों है, एआई में हमारा देश फिसड्डी क्यों है?
खैर, आप कह सकते हैं कि कार्यक्रम रक्षाबंधन का था तो संस्कार सनातन त्योहार पर बात केंद्रित थी लेकिन मुझे लगता है खचाखच भरे हाल में पब्लिक कनेक्ट के लिए कुछ नई बातें भी होनी चाहिए थी। या फिर ऐसी बातें करने वालों को दिमागी नक्सल कहकर खारिज करते रहेंगे?


