विनय मौर्या-
अजी हां, फोटू असली है। बिल्कुल 24 कैरेट वाली। हमारे पीएम मोई जी रिश्ते निभाने में बेहद अच्छे इंसान हैं। जिससे रिश्ता निभाते हैं, दिल से निभाते हैं। शर्त बस इतनी है कि वह हमारे जैसा गरीब-गुरबा न हो, पूंजीपति हो, मीडिया का मालिक हो। मगर विनय मौर्या टाइप का न हो, जो वक्त जरूरत पर काम न आए और सिर्फ मीडिया में कमियों को दिखाए।
हां तो बात कर रहा हूं मोई जी की।
तस्वीरों में मोई जी 20 जनवरी 2016 को नई दिल्ली में एस्सेल ग्रुप और जी’ के अध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्रा की आत्मकथा का लोकार्पण करते दिख रहे हैं। इस अवसर पर मोई जी ने डॉ. सुभाष चंद्रा के संघर्ष और उनकी जोखिम उठाने की प्रवृत्ति की सराहना भी की थी। बस, मैंने इसी जोखिम वाली बात को पकड़ लिया।
अरे भाई, मोई जी जैसा शुभचिंतक साथी हो सियासत के सबसे शीर्ष पद पर हो तो जोखिम उठाने के लिए मैं भी तैयार हूं। मुझे 22 हजार करोड़ नहीं, मात्र 22 करोड़ दिला दो। मैं तो उसका आधा वापस कर दूंगा। मगर अफसोस, मुझे मोई जी जैसा कोई मिला ही नहीं।
अब इसमें मेरी क्या गलती है। मैं तो जोखिम उठाने को तैयार हूँ, बस मोई जी जैसा शुभचिंतक चाहिए।
बहरहाल, डॉ. चंद्रा को आर्थिक रूप से और चमकदार बनाने में मोई जी के शुभचिंतक भाव के लिए थैंक्यू मोई जी तो बनता है। बाकी जो है, सो हइये है।
गिरीश मालवीय-
सुभाष चंद्रा ओर पीएम नरेन्द्र मोदी के आपसी रिश्ते कितने मधुर और प्रगाढ़ रहे है इसका एक वीडियो हाथ लगा है लेकिन फेसबुक न तो उस वीडियो की क्लिप पोस्ट पर लगाने दे रहा है न उन दोनों का साथ में खिंचाया गया चित्र
खैर कोशिश करता हूँ कि वह चित्र ओर वीडियो कमेंट बॉक्स में डाल दूं इस विडियो में मोदी जी सुभाष चंद्रा की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए कहते है सुभाष जी की आदत रिस्क लेने की रही है ओर इसी कारण वे यहां तक पुहंचे है
वाकई ये तो सच है कि रिस्क तो बहुत लेते है सुभाष जी , 2016 का यह वीडियो सुभाष चंद्रा की आत्मकथा द ज़ेड फैक्टर: माई जर्नी एज द रॉन्ग मैन एट द राइट टाइम’ के विमोचन का है
सुभाष चंद्रा ने अपनी इस आत्मकथा और आरएसएस की पत्रिका Organiser में खुद बताया है कि वे बचपन से स्वयंसेवक रहे। कक्षा 6 से 10 तक नियमित शाखा जाते थे। उनके पिता भी आरएसएस स्वयंसेवक थे। वे कहते हैं कि शाखाओं में पौराणिक कथाओं से उनमें देशभक्ति की जड़ें पड़ीं और आरएसएस की विचारधारा राष्ट्रवाद तथा राष्ट्र को ऊंचाई पर ले जाने की है
2014 के चुनाव में वह बीजेपी के बेहद करीबी रहे और 2014 लोकसभा चुनाव में कुरुक्षेत्र रैली में मोदी की चुनावी रैली में उन्होंने मंच साझा किया और बीजेपी के लिए वोट देने की सार्वजनिक अपील भी कीबाद में हरियाणा से राज्यसभा में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुने गए। उन्हें बीजेपी विधायकों के समर्थन से ही जीत मिली
अब इतना रिक्स लिया है!, जी समूह के जरिए समाज में इतनी नफरत फैला कर बीजेपी का एजेंडा चलाया है तो इतना तो हक बनता है सुभाष जी का कि मोदी सरकार उनके खिलाफ 22 हजार करोड़ की रिकवरी का मामला मात्र साढ़े 6 करोड़ में सेटल कर ले।
क्यों टीवी चैनल दिन रात हिन्दू-मुस्लिम, गाय- बकरा, मजार- जेहाद करके सत्ता की राजनीति चमकाते हैं, इस कृपा के लिए-
जी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा को ₹22 हजार करोड़ के कर्ज को महज ₹6.5 करोड़ में निपटाने के प्लान को मंजूरी दे दी गई है।
आपका होम लोन कभी माफ किया याद आता है आपको?
-मुकेश माथुर
आवेश तिवारी-
बिग विस्फोट:-यह बी कॉम, एलएलबी नीलेश शर्मा है।NCLT का सदस्य है। सुभाष चंद्रा के केस में मामला जब दो सदस्यों के बीच टाई हो गया था तो तीसरे सदस्य के तौर पर इनके पास भेजा गया इन्होंने मुंडन को मंजूरी देश को 21 हजार 9 सौ 93 करोड़ का चूना लगवा दिया।

इनकी प्रतिबद्धता के दो उदाहरण देखिए और सीरीज देखिए आपको अंदाजा लग जाएगा NCLT कैसे काम कर रही है। कैसे एपस्टीन फाइल के गुनाहगारों को बचा रही है। क्या यह बिना सरकार की सहमति के हो रहा है?
रिलायंस नेवल पर बैंकों और लेनदारों का लगभग ₹12,400 करोड़ का कर्ज था। नीलेश शर्मा की पीठ ने 2100 करोड़ में सेटलमेंट को मंजूरी दी थी। बैंकों को अपने कुल बकाये का 80% से 85% हिस्सा छोड़ना (Write-off) पड़ा।
अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों को भारी-भरकम वित्तीय देनदारियों के लंबे अदालती मुकदमों से राहत मिल गई और कंपनी का प्रबंधन नए खरीदार के पास चला गया।
रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) व रिलायंस इंफ्रा की समाधान योजनाओं और स्थगनों में या तो देरी की गई या उन्हें राहत दी गई। RCom और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की विभिन्न संस्थाओं के खिलाफ वित्तीय लेनदारों जैसे चीन के विकास बैंक, स्वीडिश कंपनी एरिक्सन व भारतीय बैंक द्वारा दिवालियापन याचिकाएं दायर की गई थीं।
प्रक्रिया के दौरान अनिल अंबानी समूह की कंपनियों को समय-समय पर समाधान योजनाएं प्रस्तुत करने, व्यक्तिगत गारंटियों पर अंतरिम रोक और संशोधन के अवसर मिले।
आलोचकों का तर्क था कि कड़े कदम उठाने के बजाय ट्रिब्यूनल ने बार-बार समय सीमा बढ़ाई, जिससे Promoters को कानूनी संरक्षण मिला रहा।
विनय महाबल मिश्रा-
आज जो हुआ है, वो भारत के इतिहास का सबसे बड़ा बैंकिंग फ्रॉड हुआ है। बहुत शर्मनाक कांड हुआ है। ज़ी न्यूज़ के मालिक सुभाष चंद्रा ने बैंकों से 22 हज़ार करोड़ का लोन ले रखा था। आज सरकार ने उसे महज 6 करोड़ लेकर पूरा लोन माफ़ कर दिया। आपको ये पढ़कर दिमाग में चक्कर आ रहा होगा ना, कि नहीं, ऐसे कैसे हो सकता है? इतना बड़ा तो नहीं हो सकता। तो मैं फिर से कह रहा हूँ कि सुभाष चंद्रा का 22 हज़ार करोड़ का लोन सरकार ने मात्र 6 करोड़ में माफ़ कर दिया, 99 प्रतिशत लोन माफ़ करवा लिया।
इसमें LIC समेत कई बैंकों ने कर्ज दिया था। हैरानी की बात है कि LIC और बैंक विरोध करते रहे, लेकिन मोदी सरकार ने सुभाष चंद्रा का लोन माफ़ कर दिया। खैर, ऐसे थोड़े ही पूरा दिन ज़ी न्यूज़ अपने चैनल पर हिंदू-मुस्लिम और सरकार को डिफेंड करता है? उसका एक अमाउंट होता है। लेकिन अमाउंट इतना बड़ा और भयानक होगा, ये हमने भी नहीं सोचा था। सोचिए, ये किसका पैसा था। ये देश की जनता का पैसा था। आपका और हमारा पैसा था। और इन उद्योगपतियों का शातिर खेल देखिए की लोन लो दिवालिया दिखाओ और फिर माफ़ करवा लो। 22 हज़ार में ज़ीरो गिनते रहिए आप।
22 हज़ार करोड़ माफ़ करवा लिया। आम गरीब एक दवा के पत्ते के लिए भीख माँगता है, तिल-तिल कर मरता है, 5 किलो राशन पर पूरा देश जीता है। लोग परेशान हैं, उनके पास रोजगार नहीं है, इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। युवा ऑफिसों के बाहर रोजगार के लिए वॉचमैन से धक्के खाता है। लेकिन मोदी सरकार ने एक मिनट में 22 हज़ार करोड़ माफ़ कर दिया। आपको क्या लगता है कि चंद्रा का 22 हज़ार करोड़ ऐसे ही माफ़ हो गया? बदले में चंद्रा ने भाजपा को पार्टी फंड में मोटा माल दिया होगा।
ऐसे थोड़े ही भाजपा के बैंक अकाउंट में 15 हज़ार करोड़ जमा हैं और देश के हर जिले में 5 स्टार महल हैं पार्टी ऑफिस के रूप में। ये अंग्रेजों से भी बड़ी लूट है। कोई इस तरह से देश कैसे लूट सकता है? आप घर या बैंक की एक किस्त नहीं भरेंगे तो बैंक आपको बेइज्जत करता है, पुलिस लेकर आता है। लेकिन इन लुटेरों का खेल देखिए। लोगों को धार्मिक और देशभक्ति के नारों में उलझाकर ऐसे बहुत से घपले-घोटाले पिछले 12 सालों में हुए हैं।
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