नीरेंद्र नागर-
इन दिनों PENGUIN शब्द भारतीय मीडिया में चर्चा में है क्योंकि Penguin Random House नामक प्रकाशन संस्थान ने सोनिया गाँधी की एक किताब को छापने से इनकार कर दिया है।
Penguin Random House ने यह क्यों किया, इसपर हम बात नहीं करेंगे (कई लोग बात कर रहे हैं)। हम तो यहाँ Penguin के उच्चारण पर चर्चा करेंगे जिसे हिंदी मीडिया में कहीं पेंगुइन लिखा जा रहा है, कहीं पेंग्विन। बीबीसी, जागरण, ABP न्यूज़ में मुझे पेंगुइन मिला तो तो लल्लनटॉप, आजतक और इंडिया.कॉम पर मुझे पेंग्विन। मज़ेदार बात यह भी है कि हिंदी बीबीसी पेंगुइन लिख रहा है जबकि मराठी बीबीसी पेंग्विन। कभी बीबीसी भाषाई और शाब्दिक शुद्धता के लिए मशहूर था लेकिन अब वह भी ज़माने की चाल चलता दिखाई दे रहा है।
सही क्या है?
अगर अंग्रेज़ी के शब्दकोशों की मानें तो इसके दो मिलते-जुलते उच्चारण है – पेंग्विन (pɛŋɡwɪn) और पेनग्विन (pɛnɡwɪn)। एक में पे के बाद ङ् की ध्वनि है, दूसरे में न् की। मेरे पास जितने भी शब्दकोश हैं – ऑक्सफ़र्ड से लेकर केंब्रिज तक, डिक्शनरी.कॉम से लेकर Merriam-Webster तक – सबमें यही दो उच्चारण मिले। पेंगुइन कहीं नहीं मिला।
लेकिन Penguin Random House हिंदी में जो किताबें छापता है, उसमें वह पेंगुइन लिखता है। क्यों लिखता है, यह तो वहाँ के लोग ही जानते होंगे। हो सकता है, जिन महाशय को हिंदी पुस्तक प्रकाशन का दायित्व दिया गया हो, वह ख़ुद इसे पेंगुइन बोलते-लिखते आए हों या जिन सज्जन को इस नाम को रेजिस्टर करने का काम दिया गया, उन्होंने पेंगुइन लिखवा दिया हो।
जैसे ‘दुनिया की सबसे बुरी… सॉरी… बड़ी पार्टी’ के अध्यक्ष के पिता ने स्कूल में दाख़िले के समय अपने बेटे का नाम अंग्रेज़ी में NABIN लिखवा दिया था। आज तक Nabin ही चल रहा है। वैसे ही पेंगुइन चल रहा है।
ऐसा भी होता है कि कोई अंतरराष्ट्रीय ब्रैंड किसी अन्य देश में व्यापार करते समय अपने नाम की स्पेलिंग और उच्चारण में हल्का फेरबदल करने को मजबूर हो जाए क्योंकि उस देश की भाषा में उस नाम का कुछ अटपटा या अश्लील अर्थ निकलता है। जैसे Vicks का जर्मन में उच्चारण होता है फ़िक्स (क्योंकि जर्मन में V को फ़ बोलते हैं) और Ficks का मतलब जर्मनी की सड़कछाप भाषा में होता है सहवास। इसी कारण कंपनी को Vicks का नाम Wicks करना पड़ा। इसी तरह Ford को ब्रज़ील में अपने पिंटो मॉडल का नाम बदलना पड़ा क्योंकि वहाँ पुरुष जननांग को पिंटो कहते हैं।
भारत में भी Ashok Leyland (अशोक लेलंड) को अपना नाम हिंदी में लिखना पड़े तो मुश्किल हो जाएगी। यह तो अच्छा है कि अज्ञानी हिंदी मीडिया ने उसका काम आसान कर दिया और उसे अशोक लीलैंड लिखता आया है। परंतु पेंग्विन का तो ऐसा कोई अटपटा या अश्लील अर्थ नहीं है कि उसे बदलकर पेंगुइन करना पड़े।
सोचता हूँ, Penguin Random House ने हिंदी में हज़ारों किताबें छापी होंगी। क्या किसी भी विद्वान हिंदी लेखक ने एक बार भी संस्थान के किसी बड़े अधिकारी से नहीं पूछा कि हिंदी में उसका नाम पेंगुइन क्यों लिखा जाता है जबकि उसका सही उच्चारण पेंग्विन है?
भारत में वैसे ही अंग्रेज़ी शब्दों के उच्चारण और लिप्यंतर के मामले में भारी अराजकता है – Alpha को अल्फ़ा लिखा और बोला जा रहा है (सही है ऐल्फ़ा), Donald को डोनाल्ड लिखा और बोला जा रहा है (सही है डॉनल्ड), Celebrity को सेलिब्रिटी लिखा और बोला जा रहा है (सही है सिलेब्रिटी)। अंग्रेज़ी के ऐसे सैकड़ों शब्द हैं जो हिंदी बोलचाल में आ गए हैं लेकिन लोगों द्वारा ग़लत बोले जा रहे हैं।
ऐसे हालात में PENGUIN अपनी किताबों में अपने नाम की ग़लत स्पेलिंग (पेंगुइन) छापकर उन लाखों लोगों को भी ग़लत उच्चारण सिखा रहा है जो इसे पेंग्विन बोलते-लिखते आए हैं।
जो बड़े संस्थान होते हैं, नामी हस्तियाँ होती हैं, उनकी ज़िम्मेदारी भी बड़ी होती है क्योंकि लाखों-करोड़ों लोग उनसे सीखते हैं। जिसका नाम बड़ा होता है, उसकी ज़िम्मेदारी भी बड़ी होती है। लेकिन इस सिद्धांत पर कौन अमल करता है?
पिछली शब्दचर्चा…
शब्दचर्चा (96) : Gen ALPHA का उच्चारण जेन अल्फ़ा नहीं है!


