प्रेस विज्ञप्ति
‘सहिया’ नक्सलवाद की फिल्म नहीं, पति-पत्नी के प्रेम की कहानी है, नक्सलियों और पुलिस के बीच फंसे नवविवाहित जोड़े की प्रेम कहानी को नक्सलवाद का समर्थन कैसे माना जा सकता है?
मुंबई, 31 अगस्त 2026.
हिंदी फीचर फिल्म ‘सहिया’ नक्सलवाद पर बनी फिल्म नहीं है. यह मूल रूप से एक प्रेम कहानी है. एक ऐसे नवविवाहित पति-पत्नी की कहानी, जो परिस्थितियों के कारण नक्सलियों और पुलिस के बीच फंस जाते हैं और अपनी जिंदगी तथा अपने प्रेम को बचाने के लिए संघर्ष करते हैं.
फिल्म की कहानी में नक्सल प्रभावित इलाका केवल पृष्ठभूमि है, फिल्म का विषय नक्सलवाद नहीं है. फिल्म का केंद्र एक पति-पत्नी का रिश्ता, उनका प्रेम, एक-दूसरे पर भरोसा और विपरीत परिस्थितियों में एक-दूसरे को बचाने का संघर्ष है.
कहानी में परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि नवविवाहित जोड़े को नक्सलियों और पुलिस, दोनों से बचकर निकलना पड़ता है. इसी खतरनाक सफर में पति-पत्नी के रिश्ते की असली ताकत सामने आती है. पत्नी अपने पति को बचाने के लिए असाधारण साहस दिखाती है और तमाम खतरों के बावजूद उसका साथ नहीं छोड़ती.
फिल्म के निर्माता और वरिष्ठ पत्रकार संजय शर्मा ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार किए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा:
“‘सहिया’ को नक्सलवाद की फिल्म समझना ही इसके मूल कथानक को गलत समझना है. हमारी कहानी नक्सलियों की नहीं, पति-पत्नी की है. नक्सल प्रभावित जंगल और वहां की परिस्थितियां कहानी की पृष्ठभूमि हैं. फिल्म की आत्मा प्रेम है.”
उन्होंने कहा कि किसी फिल्म की पृष्ठभूमि और उसके संदेश में फर्क करना जरूरी है. अगर किसी प्रेम कहानी की पृष्ठभूमि युद्ध है तो वह युद्ध का समर्थन नहीं हो जाती. अगर कोई प्रेम कहानी दंगों या अपराध के माहौल में घटती है तो वह दंगे या अपराध का समर्थन नहीं करती. उसी प्रकार नक्सल प्रभावित क्षेत्र में घटने वाली प्रेम कहानी को नक्सलवाद का समर्थन नहीं माना जा सकता.
‘सहिया’ में बंदूक कहानी का केंद्र नहीं है, प्रेम कहानी का केंद्र है.
फिल्म न किसी हथियारबंद आंदोलन का महिमामंडन करती है, न किसी प्रकार की हिंसा का समर्थन करती है और न ही किसी विचारधारा का प्रचार करती है.
यह एक पति-पत्नी की कहानी है, जो जिंदगी और मौत के बीच एक-दूसरे का हाथ थामे हुए हैं.
संजय शर्मा ने कहा:
“हमारी फिल्म का नायक कोई नक्सली नहीं है और हमारी फिल्म की नायिका कोई विचारधारा नहीं है. इसके नायक और नायिका एक पति और पत्नी हैं. उनका हथियार बंदूक नहीं, उनका प्रेम और एक-दूसरे पर भरोसा है.”
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी फिल्म में नक्सल प्रभावित इलाका, नक्सली या पुलिस दिखाई गई है तो क्या केवल इसी आधार पर पूरी फिल्म को नक्सलवाद से जोड़ देना उचित है?
“हम केवल इतना चाहते हैं कि ‘सहिया’ को उसकी पूरी कहानी और उसके वास्तविक भाव को समझकर देखा जाए. पहले इसे एक प्रेम कहानी के रूप में देखिए, फिर इसका मूल्यांकन कीजिए.”
निर्माता ने कहा कि CBFC के निर्णय के खिलाफ उपलब्ध वैधानिक और कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जा रहा है. फिल्म की टीम को विश्वास है कि जब ‘सहिया’ को उसके संपूर्ण संदर्भ में समझा जाएगा तो यह साफ होगा कि फिल्म का उद्देश्य किसी विचारधारा का समर्थन करना नहीं बल्कि असाधारण परिस्थितियों में पति-पत्नी के प्रेम और संघर्ष को पर्दे पर उतारना है.
सवाल सिर्फ इतना है:
क्या नक्सल प्रभावित इलाके में प्रेम कहानी कहना नक्सलवाद का समर्थन है?
क्या अपने पति की जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष करती पत्नी की कहानी किसी विचारधारा का प्रचार है?
‘सहिया’ नक्सलवाद की कहानी नहीं है.
‘सहिया’ पति-पत्नी की कहानी है.
‘सहिया’ प्रेम की कहानी है.
जारीकर्ता:
4PM Media House / 4PM Film Productions
संजय शर्मा
निर्माता – ‘सहिया’
वीडियो देखें-
https://www.youtube.com/live/YXIi3ao-lL4?si=vD2IEtx5YmOgc9eV


