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सुख-दुख

जितनी भी उम्र हो, कमा लिए हो तो रिटायर होने की तैयारी करो, फिर ऐसा जीवन जियो! देखें वीडियो

पुणे की स्नेहा राजगुरु ने 29 साल की उम्र में छोड़ी कॉर्पोरेट जिंदगी, पिता के साथ शुरू किया फार्म स्टे; बताया ‘रिटायरमेंट’ का 4 स्टेप वाला फॉर्मूला

रिटायरमेंट का नाम आते ही आमतौर पर 60-65 साल की उम्र और नौकरी से विदाई का ख्याल आता है। लेकिन पुणे की स्नेहा राजगुरु ने इस धारणा को ही उलट दिया। उन्होंने महज 29 साल की उम्र में कॉर्पोरेट जिंदगी से दूरी बना ली और प्रकृति के बीच अपना जीवन शुरू कर दिया।

स्नेहा ने सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में बताया कि उन्होंने किस तरह भागदौड़ और कॉर्पोरेट तनाव से निकलकर अपेक्षाकृत शांत और आत्मनिर्भर जीवन को चुना। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और लाखों बार देखा गया।

स्नेहा ने अपने पिता के साथ मिलकर एक फार्म स्टे शुरू किया। यहां उन्होंने पर्माकल्चर, फलों की खेती और खुद के लिए भोजन उगाने जैसी चीजों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाया। उनके मुताबिक असली रिटायरमेंट का मतलब सिर्फ नौकरी छोड़ देना नहीं है, बल्कि लगातार बढ़ते तनाव और दबाव से बाहर निकलकर अपनी पसंद का जीवन चुनना है।

स्नेहा का चार स्टेप वाला ‘रिटायरमेंट फॉर्मूला’

स्नेहा के मुताबिक पहला कदम है जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा खरीदना। उन्होंने अपनी जमीन को ‘बाब बेटी फार्म’ नाम दिया है। उनका कहना है कि जमीन ऐसी जगह होनी चाहिए जहां व्यक्ति अपने हिसाब से जीवन को फिर से व्यवस्थित कर सके।

दूसरा कदम है फलों के पेड़ लगाना। स्नेहा के मुताबिक पेड़ समय के साथ बढ़ते हैं और लंबे समय तक फल देते हैं। यानी आज लगाया गया पेड़ आने वाले वर्षों में आपके जीवन का हिस्सा बन सकता है।

तीसरा कदम है अपना भोजन खुद उगाना। उनका तर्क है कि व्यक्ति जितना अपने भोजन के मामले में आत्मनिर्भर होगा, उतना ही बाहरी परिस्थितियों पर उसकी निर्भरता कम होगी। उन्होंने लॉकडाउन या युद्ध जैसी आपात परिस्थितियों का उदाहरण भी दिया।

चौथा और शायद सबसे दिलचस्प कदम है अपनी जमीन को फूलों और हरियाली से भर देना। स्नेहा का कहना है कि जीवन में सुंदरता और प्रकृति के लिए जगह बनाना मानसिक सुकून के लिए बेहद जरूरी है।

उनका पूरा संदेश यही है कि रिटायरमेंट को केवल उम्र से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति ने अपनी जरूरत भर कमा लिया है और उसके पास अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीने का विकल्प है, तो वह नौकरी और भागदौड़ से बाहर निकलकर एक अलग तरह का जीवन चुन सकता है।

स्नेहा का यह वीडियो उन लोगों के लिए खासा आकर्षण पैदा कर रहा है जो शहरों की भागदौड़, कॉर्पोरेट दबाव और लगातार बढ़ते काम के तनाव से दूर प्रकृति के बीच सुकून की जिंदगी जीने का सपना देखते हैं।

यानी सवाल यह नहीं कि रिटायर कब होना है?

सवाल यह है कि जिंदगी आखिर किसके लिए जीनी है, दूसरों की बनाई दौड़ में आगे निकलने के लिए या अपने हिस्से का सुकून हासिल करने के लिए?

देखें स्नेहा राजगुरु का वायरल वीडियो, क्लिक करें-

https://www.instagram.com/reel/DcYtKSDoR7o/?igsi=dnplYnc3aHQ3eGU=

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