मुकेश कुमार-
ये वीडियो दिल्ली बीजेपी के हैंडल से जारी किया गया है। साथ में कहा गया है कि पांच सितंबर की सीजेपी की रैली के लिए ये दिल्ली पुलिस की तैयारी है।
ये मार्च में हिस्सा लेने की सोच रहे लोगों को सीधी धमकी है। बीजेपी की कोशिश है कि नौजवान डर कर आएं ही न और प्रदर्शन फ्लॉप हो जाए।
लेकिन सबसे ज़्यादा आपत्तिजनक और निंदनीय खुल्लमखुल्ला हिंसा के प्रयोग की वकालत है। नोट कीजिए, सत्तारूढ़ पार्टी में सब कर रही है।
बीजेपी की नई आईटी सेल टीम ने नए मीम्स और रील्स की जो कारपेट बंबिंग की है, वह डराने वाली है। डराने वाली इसलिए है कि उसमें हिंसा ही हिंसा भरी हुई है। आईटी सेल ने फिल्मों और वेब सिरीज़ की जिन क्लिप्स का इस्तेमाल किया है, बड़े पैमाने पर गोली बारी भी है और अपराधियों द्वारा की जा रही बेरहम मारपीट भी।
एक रील में फायरिंग का सीन है जिसमें ट्रक, ट्रेन और बंदूकें हैं। खलनायक के जिस्म पर दिमाग़ी नक्सल लिखा हुआ है और बीजेपी के कई राज्य उस पर फ़ायरिंग में हिस्सा ले रहे हैं।
एक सीन वेब सिरीज़ मिर्जापुर का है। इसका एक क्रिमिनल किरदार मुन्ना क्लास में एक बच्चे को झापड़ पर झापड़ मारे जा रहा है। यहां भी छात्र को दिमाग़ी नक्सल बताया जा रहा है।
साफ़ है कि बीजेपी सभी आंदोलनकारियों और विरोधियों को दिमागी नक्सल के रूप में चिह्नित कर रही है और उनसे हिंसा से निपटने की बात कर रही है।
अगर गौर से देखें तो ये पूरा आयडिया बहुत ही ख़तरनाक़ मिक्स है, जो देश को गृहयुद्ध, बल्कि नरसंहार की ओर झोंकने वाला है। दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को बात बोली से नहीं लाठी गोली से चलाने का नरैटिव तैयार कर रही है।
उधर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत न्यूयॉर्क में शांति और एकता का संदेश दे रहे हैं और इधर हिंदुस्तान में उनकी पार्टी विभाजन और नरसंहार की भूमिका बना रही है।
सवाल उठता है कि बीजेपी की नई सोशल मीडिया कैंपेन में इतनी हिंसा क्यों भरी हुई है? अपराधियों और मारकाट से भरी उसकी रील्स किस नीति की ओर इशारा करती है?
क्या वह जेन ज़ी और विरोधियों को धमका रही है? क्या वह अपने कार्यकर्ताओं को बता रही है कि आंदोलनकारियों के साथ क्या करना है?
और सबसे महत्वपूर्ण बात कि क्या ये इस बात का संकेत है कि मोदी सरकार अब विरोधियों को ताक़त से कुचलने का इरादा कर चुकी है? क्या वह अपने ही देशवासियों के ख़िलाफ़ जंग छेड़ने की तैयारी कर रही है…अगर ऐसा है तो फिर क्या गृहयुद्ध बहुत दूर है, बड़े पैमाने पर क़त्लेआम अवश्यंभावी नहीं हो गया है…..
बीजेपी कि सोशल मीडिया कैंपेन के इस वीडियो को देखिए और ख़ुद ही तय कीजिए कि क्या ये नरसंहार की बात नहीं कर रहा? मुझे तो लगता है कि ये साफ़-साफ़ कह रहा है कि जो भी उसका विरोध करेगा उसे इस तरह से गोलियों से भून दिया जाएगा।
यही नहीं ये अपने समर्थकों को भी संदेश दे रहा है कि जेन ज़ी, जेन अल्फा और दूसरे विरोधियों से कैसे निपटना है। इस कैंपेन को आइसोलेशन में मत देखिए। ये मोदी सरकार के इरादों को भी बता रहा है।
ये भयानक है। बीजेपी और भी हिंसक हो गई है। जेन ज़ी के क़त्लेआम करने वाले संदेश दे रही है।
ठीक है कि घबराई हुई है और जेन ज़ी के मीम्स और रीव्स का जवाब आक्रामकता के साथ देना चाहती है,मगर क्या अपने ही हमवतनों के साथ इस वीडियो जैसा सलूक करेगी?
मोदी मंडली को एक बार ठहरकर सोचना चाहिए कि वे करने क्या जा रहे हैं। क्या वे अवाम को डराना चाहते हैं? अगर हां तो अगर वे न डरे तब क्या होगा? अगर उसने भी उसी की भाषा में जवाब दिया तो देश में क्या गृहयुद्ध नहीं छिड़ जाएगा? कहीं वह यही तो नहीं करना चाहती?
फासीवाद और कुछ नहीं है। बीजेपी की ये कैंपेन उसके फासीवादी चरित्र को समझने के लिए काफ़ी है।
इस हिंसा को लोकतंत्र तथा संविधान को नकार के ही अपनाई जा सकती है। अब बीजेपी की पैदल सेना और अंधभक्त अगर सड़कों पर मारपीट करते या बंदूक-कट्टा चलाते दिख जाएं तो ये स्वाभाविक ही होगा।
इस बच्ची कि ज़िंदगी को मोदी जी और उनके भक्तों ने नरक बना दिया है।
ख़ास तौर पर मोदीजी ने क्योंकि वे चाहते तो अपने समर्थकों को कह सकते कि उसे परेशान नहीं करना है। वे पुलिस और प्रशासन को भी मानसिक उत्पीड़न करने से रोक सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। माफ़ करने का प्रहसन किया और सब कुछ होने दिया। लेकिन ये बच्ची बड़े हौसले और हिम्मत वाली है। इसमें अभी भी प्रधानमंत्री को कायर कहने का साहस है।
मेरी हमदर्दी और समर्थन इसके साथ है। और आपका?


