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सियासत

सुभाष चंद्रा केस में NCLT के 6.5 करोड़ वाले आदेश पर रोक, पांच सदस्यीय पीठ करेगी दोबारा सुनवाई

₹22,006 करोड़ के दावों के मुकाबले महज ₹6.25 करोड़ भुगतान की थी मंजूरी, 99.97% के ‘हेयरकट’ को लेकर उठे थे सवाल

Screenshot of Ravish Kumar's Hindi tweet discussing a social media post and legal action, with an embedded tweet by Narendra Nath Mishra about NCLT claims (Hindi text visible).

नई दिल्ली। ज़ी समूह के संस्थापक और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवाला मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 25 अगस्त को दिए गए उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले महज 6.25 करोड़ रुपये का भुगतान करने वाली समाधान योजना को मंजूरी दी गई थी। इसके अलावा करीब 25 लाख रुपये दिवाला प्रक्रिया के खर्च के लिए रखे गए थे। यानी कुल रकम करीब 6.5 करोड़ रुपये थी।

मामले की सुनवाई अब NCLT की पांच सदस्यीय विशेष पीठ करेगी। यह कदम उस समय उठाया गया जब पहले सुनवाई कर रही पीठ के सदस्यों के बीच आदेश को लेकर बहुमत की स्थिति नहीं बन पाई। इसके बाद मामले को तीसरे सदस्य के पास भेजा गया था। तीसरे सदस्य ने 25 अगस्त को चंद्रा की समाधान योजना को मंजूरी दे दी थी। अब पांच सदस्यीय पीठ ने उस आदेश के प्रभाव पर रोक लगाते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।

Screenshot of Bhupendra Chaubey's tweet about Subhash Chandra's insolvency case, noting different views and a potential Division Bench ruling in the NCLT.

22 हजार करोड़ के दावे और 6.5 करोड़ की मंजूरी

इस मामले का सबसे विवादास्पद पहलू 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले केवल 6.25 करोड़ रुपये की राशि है। इस हिसाब से कर्जदाताओं को उनके दावों का लगभग 0.03 प्रतिशत ही मिलना था, जबकि करीब 99.97 प्रतिशत का ‘हेयरकट’ बनता है। योजना को कर्जदाताओं के 80.81 प्रतिशत वोटिंग मूल्य का समर्थन मिला था, हालांकि कुछ प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने इसका विरोध किया था।

हालांकि, इस मामले को सीधे तौर पर यह कहना भी सही नहीं होगा कि सुभाष चंद्रा ने 22 हजार करोड़ रुपये का व्यक्तिगत कर्ज लिया था और NCLT ने उन्हें वह पूरा कर्ज माफ कर दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी रकम उन कंपनियों से संबंधित कर्ज की है, जिसके लिए चंद्रा व्यक्तिगत गारंटर रहे थे। चंद्रा की ओर से यह भी कहा गया है कि व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर उनके खिलाफ दावे की वास्तविक राशि करीब 3,992 करोड़ रुपये है, न कि 22 हजार करोड़ रुपये।

अब क्या होगा?

पांच सदस्यीय NCLT पीठ अब यह तय करेगी कि पहले की कार्यवाही और आदेश को किस तरह देखा जाए और समाधान योजना को मंजूरी देने के लिए पर्याप्त वैधानिक बहुमत था या नहीं। इस बीच चंद्रा को अपनी संपत्तियों को सीधे या परोक्ष रूप से बेचने, हस्तांतरित करने अथवा उन पर किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने से रोकने का निर्देश भी दिया गया है।

इस घटनाक्रम से 22 हजार करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान की योजना पर छिड़ा विवाद फिलहाल खत्म होने के बजाय और गंभीर हो गया है। अब पांच सदस्यीय पीठ की सुनवाई यह तय करने में अहम होगी कि सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान योजना को आखिरकार मंजूरी मिलती है या 25 अगस्त का आदेश बदलता है।

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