नई दिल्ली : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने देश के सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने सलाह दी है कि कार्यक्रमों के प्रसारण में AI और उसके टूल्स का इस्तेमाल करते समय अत्यधिक सावधानी बरती जाए।
21 अक्टूबर 2026 को जारी इस एडवाइजरी में मंत्रालय ने साफ कहा है कि AI का इस्तेमाल सिर्फ सहायक (Assistive) क्षमता में ही होना चाहिए। AI की वजह से खबरों की सटीकता, प्रामाणिकता और संवेदनशीलता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
मंत्रालय की गाइडलाइंस – क्या करें, क्या न करें:
- AI का इस्तेमाल सीमित रखें:
ग्राफिक्स, वर्चुअल न्यूज प्रेजेंटेशन और खबरों के प्रोडक्शन में जेनरेटिव AI का इस्तेमाल न करें। AI एंकर द्वारा स्वतंत्र रूप से खबरें पढ़ना या संपादकीय फैसले लेना प्रतिबंधित है। अंतिम जिम्मेदारी इंसानी पत्रकार की ही रहेगी। मंत्रालय ने कहा है कि AI का इस्तेमाल केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994 के नियम 6 के तहत प्रोग्राम कोड के खिलाफ नहीं जाना चाहिए। - आतंकवाद-रोधी ऑपरेशन का लाइव प्रसारण न करें:
नियम 6(1)(p) के तहत, आतंकवाद-रोधी कार्रवाई का लाइव कवरेज प्रतिबंधित है। कवरेज को केवल अधिकृत अधिकारी की ब्रीफिंग तक ही सीमित रखें और विजुअल पर टाइम-स्टैंप होना चाहिए, ताकि दर्शकों में भ्रम न फैले। - हिंसक और विचलित करने वाले दृश्यों से बचें:
हिंसक, ग्राफिक या परेशान करने वाले दृश्य दिखाते समय संपादकीय विवेक का इस्तेमाल करें। ऐसी सामग्री न दिखाएं जिससे दर्शकों को अनावश्यक परेशानी हो या जो रुचि के खिलाफ हो। एक ही दृश्य को बार-बार लूप में दिखाने से बचें और जरूरत हो तो ब्लर करें। - क्राइम खबरों को सनसनीखेज न बनाएं:
अपराध और हिंसा से जुड़ी खबरें सत्यापित तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। सनसनीखेज रिपोर्टिंग, जो अपराध का महिमामंडन करती हो, से बचें। खासकर महिला और बच्चों के खिलाफ अपराधों की खबरों में कानून का सख्ती से पालन करें। - भारत का सही नक्शा ही इस्तेमाल करें:
खबरों और ग्राफिक्स में भारत का नक्शा दिखाते समय केवल सर्वे ऑफ इंडिया (Survey of India) द्वारा प्रकाशित आधिकारिक नक्शे का ही इस्तेमाल करना अनिवार्य है। - डिबेट शो में संयम रखें:
लाइव डिबेट में सांप्रदायिक या देश-विरोधी बयानों को बढ़ावा न दें। पैनलिस्ट का चयन सावधानी से करें, उन्हें पहले से ब्रीफ करें। अगर कोई आपत्तिजनक बात कहे तो तुरंत म्यूट करें, डिस्क्लेमर दें या फीड काट दें। - पीड़िता की पहचान गुप्त रखें:
यौन उत्पीड़न की पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली कोई भी जानकारी, फोटो या परिवार की जानकारी न दिखाएं। यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है।
मंत्रालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस प्रोग्राम कोड का उल्लंघन होने पर केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम 1995 के तहत कार्रवाई की जाएगी। सभी चैनलों को अपनी टीम के लिए नियमित वर्कशॉप और ट्रेनिंग आयोजित कर अपनी संपादकीय जांच प्रणाली को और मजबूत करने के लिए भी कहा गया है।
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