पंजाब में “नशा मुक्त पंजाब” का ढिंढोरा पीटने वाली आम आदमी पार्टी सरकार और उसका प्रशासनिक सिस्टम एक बार फिर बेनकाब हो रहा है। ड्रग्स के खिलाफ सबसे ज्यादा रिकवरी करने वाले अधिकारी पर ही जब FIR दर्ज हो जाती है, तो साफ हो जाता है कि असली लड़ाई नशे के खिलाफ नहीं, बल्कि नशे के कारोबार को बचाने की है।
पंजाब पुलिस के पूर्व STF/ANTF DSP वविंदर महाजन का कहना है कि जब उन्होंने फार्मा कंपनियों की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश की, तो पूरा सरकारी महकमा उनके खिलाफ सक्रिय हो गया। भड़ास से विशेष बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि पंजाब के युवाओं को बर्बाद करने वाली असली ताकत छोटी-मोटी डीलिंग नहीं, बल्कि कई फार्मा कंपनियां हैं, जिन्होंने सिस्टम को पूरी तरह से “हैक” कर रखा है।
क्या है पूरा षड्यंत्र?
फरवरी 2024 में DSP महाजन की टीम ने हिमाचल के बद्दी इलाके से लगभग 1.98 करोड़ अल्प्राजोलम टैबलेट्स और 40 किलो रॉ मटीरियल जब्त किया था। जांच में सामने आया कि कुछ फार्मा कंपनियों ने महज 7 महीनों में 19 करोड़ से ज्यादा Alprasafe (Alprazolam + Tramadol) टैबलेट्स का प्रोडक्शन बढ़ा दिया और फर्जी बिलिंग व दस्तावेजों के जरिए इन्हें पंजाब के नशे के बाजार में उड़ेल दिया।
लेकिन जैसे ही कुछ फार्मा कंपनियों का नाम जांच में आया, DSP महाजन के लिए मुसीबत खड़ी कर दी गई। सितंबर 2024 में ANTF ने उन्हीं पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और NDPS के तहत FIR दर्ज कर दी। आरोप लगाया गया कि उन्होंने एक फार्मा कंपनी से 45 लाख रुपये की रिश्वत ली। पुलिस ने उनके घर पर छापा भी मारा।
DSP महाजन का स्पष्ट आरोप है कि यह पूरी तरह से फर्जी और साजिशपूर्ण केस है। उनका कहना है कि फार्मा कंपनियों के बड़े-बड़े लोगों की नींद उड़ गई, इसलिए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उन्हें निपटाने की कोशिश की गई। उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने न सिर्फ CBI से प्रिलिमिनरी जांच कराने का आदेश दिया, बल्कि राज्य पुलिस की आगे की जांच पर रोक भी लगा दी। कोर्ट ने साफ कहा कि इंटर-स्टेट रैकेट और प्रभावशाली लोगों की भागीदारी की संभावना को देखते हुए CBI जांच जरूरी है।
भड़ास इंटरव्यू में DSP ने क्या कहा?
DSP महाजन ने भड़ास को बताया कि पंजाब में साइकोट्रॉपिक ड्रग्स (Alprazolam आदि) धड़ल्ले से बिकते हैं और ड्रग्स कंट्रोल विभाग की भूमिका बेहद संदिग्ध है। उनका दावा है कि असली माफिया फार्मा कंपनियां हैं, जो प्रोडक्शन बढ़ाकर दवाई के नाम पर ड्रग्स सप्लाई कर रही हैं। उन्होंने कहा, “जो अधिकारी सबसे ज्यादा ड्रग जब्त करता है, उसे ही सिस्टम उलझा देता है। आम आदमी पार्टी के भ्रष्टाचार और पारदर्शिता के वादे कहां चले गए?”
इस मामले में उन्हें कोर्ट से स्टे मिला हुआ है, लेकिन वे अभी भी दर-दर भटक रहे हैं।
न्याय की लड़ाई लड़ रहे इस अधिकारी की आवाज बनने के लिए उनका मोबाइल नंबर है: 7626911828
सवाल जो AAP सरकार से पूछे जाने चाहिए:
- सबसे ज्यादा ड्रग जब्ती करने वाले अधिकारी पर ही FIR क्यों?
- फार्मा कंपनियों पर असली कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- ड्रग्स कंट्रोल विभाग की मिलीभगत पर चुप्पी क्यों?
- CBI जांच का नतीजा कब आएगा और कब तक सिस्टम नशेड़ियों को बचाता रहेगा?
यह मामला साफ दिखाता है कि पंजाब में “उड़ता पंजाब” की हकीकत अब भी वैसी ही है। नशे के खिलाफ लड़ने वाले अधिकारी को ही शिकार बनाया जा रहा है, जबकि असली अपराधी फार्मा कंपनियों के रूप में सिस्टम के अंदर सुरक्षित बैठे हैं।
देखें इंटरव्यू-


