सुजीत सिंह प्रिंस-
गाजीपुर। उत्तर प्रदेश में होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण को लेकर दो जिलों के बीच सामने आया अंतर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक तरफ मथुरा के जिला कमांडेंट शासनादेश के अनुपालन में सीएमओ को पत्र लिखकर निर्देश जारी करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गाजीपुर के कमांडेंट का कहना है कि उन्हें शासनादेश अभी तक मिला ही नहीं है। आखिर एक ही शासन के आदेश का पालन कहीं हो रहा है और कहीं इसकी जानकारी तक नहीं है?
प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने 16 अक्टूबर 2026 को जारी शासनादेश संख्या 1728/पंचानवे-2026-08प्रकीर्ण/12 में स्पष्ट किया था कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा पहले ही किए जा चुके शारीरिक माप परीक्षण को मेडिकल के दौरान दोहराना उचित नहीं है।
मथुरा में तीन दिन बाद सक्रियता, गाजीपुर में आदेश का इंतजार!
मथुरा के जिला कमांडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने 19 अक्टूबर 2026 को मुख्य चिकित्साधिकारी, मथुरा को पत्र भेजा। इसमें 16 अक्टूबर के शासनादेश का हवाला देते हुए मेडिकल परीक्षण के दौरान शारीरिक माप की पुनरावृत्ति न करने के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया गया है। पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।

इसके ठीक उलट, गाजीपुर के कमांडेंट कमलेश कुमार यादव से फोन पर शासनादेश के अनुपालन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक आदेश नहीं मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि आदेश मिलते ही उसका पालन किया जाएगा।
अब सवाल यह है कि जब मथुरा में शासनादेश के अनुपालन के लिए पत्र जारी हो सकता है, तो गाजीपुर में इसकी जानकारी और कार्रवाई सुनिश्चित क्यों नहीं हुई?
अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ तो नहीं?
भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक मापदंडों की दोबारा जांच किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि क्या किसी अभ्यर्थी को दोबारा माप के आधार पर अयोग्य घोषित किया गया और क्या यह शासनादेश के अनुरूप था।
शासनादेश में स्वास्थ्य परीक्षण के नाम पर अवैध मांग किए जाने की शिकायतों का भी उल्लेख है। ऐसे में गाजीपुर में नियमों की अनदेखी की शिकायत को हल्के में नहीं लिया जा सकता। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों से गाजीपुर में भ्रष्टाचार साबित नहीं होता, लेकिन परिस्थितियां निष्पक्ष जांच की मांग जरूर करती हैं।
शासन करे जांच, जवाबदेही तय हो
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, होमगार्ड विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और गाजीपुर जिला प्रशासन को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। जांच हो कि शासनादेश गाजीपुर के अधिकारियों तक कब पहुंचा, शारीरिक माप दोबारा लेने के निर्देश किसने दिए और क्या किसी अभ्यर्थी के साथ अनुचित व्यवहार हुआ।
यदि शासनादेश की अनदेखी जानबूझकर की गई है या इसके पीछे कोई अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विधिक कार्रवाई होनी चाहिए।
भर्ती में पारदर्शिता केवल कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए। आखिर एक ही शासनादेश पर मथुरा में कार्रवाई और गाजीपुर में अनभिज्ञता क्यों? इस सवाल का जवाब अब जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।
ग़ाजीपुर वाला मामला और संबंधित आदेशपत्र नीचे पढ़ें…
गाजीपुर में शासनादेश बेअसर! होमगार्ड अभ्यर्थियों की दोबारा नापी जा रही लंबाई-सीना, आखिर किसकी जवाबदेही?


