फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम चलाने वाली मेटा प्लेटफ़ॉर्म्स को अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य की एक अदालत ने 25 अरब डॉलर का जुर्माना भरने का आदेश दिया है। मामला उपयोगकर्ताओं के निजी डेटा और कंटेंट मॉडरेशन के बारे में लोगों को गुमराह करने का है, जिसकी जड़ 2018 के कैम्ब्रिज एनालिटिका कांड में है।
यह आदेश डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज फ़्रांसिस मैथ्यू ने दिया है। सितंबर में सांता फ़े में चले मुकदमे में जूरी ने मेटा को राज्य के लोगों को उसकी डेटा नीतियों और मॉडरेशन नियंत्रणों के बारे में गुमराह करने का ज़िम्मेदार पाया था और न्यू मैक्सिको अनफ़ेयर प्रैक्टिसेज़ एक्ट के 4.3 करोड़ से ज़्यादा उल्लंघन गिने थे।
क़ानून में हर उल्लंघन पर अधिकतम 5,000 डॉलर जुर्माने का प्रावधान है। इस हिसाब से रकम 219.5 अरब डॉलर बनती, लेकिन जज ने इसे घटाकर 25 अरब डॉलर कर दिया। साथ ही आदेश दिया कि पूरी रकम चुकाए जाने तक इस पर 15% सालाना ब्याज लगेगा।
जज ने डेटा सेंधमारी को लेकर कंपनी की आंतरिक समीक्षा को “जानबूझकर बेअसर” बताया और कहा कि उपयोगकर्ताओं की निजता पर बार-बार हुई ग़लतबयानी में कंपनी का शीर्ष नेतृत्व सीधे शामिल था। कैम्ब्रिज एनालिटिका मामले में करीब 8.7 करोड़ फ़ेसबुक अकाउंट्स का डेटा ग़लत तरीके से हासिल किया गया था।
न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज़ ने कहा कि ताक़तवर टेक कंपनियां ख़ुद को क़ानून से ऊपर नहीं रख सकतीं। दूसरी ओर मेटा के मुख्य क़ानूनी अधिकारी सी.जे. महोनी ने कहा कि कंपनी को अपील में जीत की उम्मीद है, और उन्होंने इस मुकदमे को अभिव्यक्ति पर टैक्स जैसा बताया।
न्यू मैक्सिको उस 17 अरब डॉलर के समझौते से बाहर रहा था, जो अगस्त में 52 दूसरे राज्य अटॉर्नी जनरलों ने मेटा के साथ किया था। भारत में भी मेटा के प्लेटफ़ॉर्म ख़बरों के सबसे बड़े ज़रियों में हैं, और हाल ही में आईटी मंत्रालय के मेटा से फ़ीड एल्गोरिदम की समीक्षा करने को कहने की खबर आई थी। ऐसे में अमेरिका का यह फ़ैसला बताता है कि प्लेटफ़ॉर्म की जवाबदेही का सवाल अब अदालतों में भारी कीमत के साथ तय होने लगा है।



