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पौने दो साल तक प्रतापगढ़ जेल में रखे गए नोएडा के वरिष्ठ पत्रकार पंकज पाराशर आज दिवाली के दिन घर लौट आए, देखें बेल ऑर्डर

हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ आपराधिक इतिहास के आधार पर जेल में नहीं रखा जा सकता

Portrait of a man with short gray hair, wearing glasses and a white polo shirt, looking at the camera.
First page of a bail application from the High Court of Judicature at Allahabad, showing case title Pankaj Parashar vs. State of U.P., counsel details, and judge’s name.
Page 2 of a court document titled'BAIL No. 21140 of 2026', containing sections 6–9 about bail, mentioning the applicant Pankaj Parashar and judge Krishan Pahal, dated November 5, 2026.

नोएडा। नोएडा मीडिया क्लब के पूर्व अध्यक्ष और ट्राइसिटी टुडे के संपादक, वरिष्ठ पत्रकार पंकज पाराशर दीवाली के शुभ दिन नोएडा स्थित अपने घर लौट आए हैं। जनवरी 2025 में गिरफ्तारी के बाद से वे लगातार जेल में थे। करीब पौने दो साल बाद वे परिवार के साथ त्योहार मना रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 5 नवंबर 2026 को उनकी जमानत अर्जी मंजूर की थी।

यह जमानत नोएडा के थाना सेक्टर-63 में दर्ज केस क्राइम नंबर 20/2026 में मिली है। यह मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2), 308(5) और 3(5) के तहत दर्ज है, जो आपराधिक धमकी और रंगदारी से जुड़ी धाराएं हैं। हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक इस मामले में पाराशर 23 फरवरी 2026 से जेल में थे।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

जस्टिस कृष्ण पहल की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अगर किसी मामले में जमानत का आधार बनता है, तो आरोपी को सिर्फ उसके आपराधिक इतिहास के कारण जेल में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने माना कि इस मामले में पाराशर के आपराधिक इतिहास की संतोषजनक व्याख्या की गई है। केस के गुण-दोष पर कोई राय दिए बिना कोर्ट ने प्रथम दृष्टया जमानत का मामला बनता पाया।

बचाव पक्ष: कारोबारी लेनदेन को रंगदारी बना दिया

पाराशर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विनय सरन ने पैरवी की, उनकी सहायता अधिवक्ता प्रदीप कुमार मिश्रा ने की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि पाराशर निर्दोष हैं और उन्हें झूठा फंसाया गया है। दोनों पक्षों के बीच का एक कारोबारी लेनदेन पुलिस के इशारे पर रंगदारी के मुकदमे में बदल दिया गया।

कोर्ट को बताया गया कि पाराशर ने पुलिस कमिश्नर और अन्य अधिकारियों के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत की थी। बचाव पक्ष के मुताबिक उन पर कुल 15 मुकदमे थोपे गए हैं, जिनका ब्योरा हलफनामे के पैरा-17 में दिया गया है। सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता नितेश कुमार श्रीवास्तव ने जमानत का कड़ा विरोध किया, लेकिन कोर्ट ने आदेश में दर्ज किया कि बचाव पक्ष की दलीलों का खंडन नहीं किया जा सका।

कोर्ट ने निजी मुचलके और दो जमानतदारों पर रिहाई का आदेश दिया। शर्त है कि वे सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे, गवाहों को धमकाएंगे नहीं और जरूरत पड़ने पर ट्रायल कोर्ट में हाजिर होंगे।

जनवरी 2025 से शुरू हुआ सिलसिला

गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने 20 जनवरी 2025 को पंकज पाराशर को उनके दो सहयोगियों के साथ रंगदारी के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप था कि वे स्क्रैप माफिया रवि काना के नाम पर धमकी देकर और फर्जी खबरें चलाने का डर दिखाकर वसूली करते थे। इसके बाद उन पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की एक अधिकारी से जुड़े आरोप में एक और एफआईआर दर्ज हुई। उनकी जेल भी बदलकर प्रतापगढ़ कर दी गई थी।

जुलाई 2025 में हाईकोर्ट से गैंगस्टर केस में जमानत मिली, तो पुलिस ने उन पर गैंगस्टर एक्ट का एक और मुकदमा दर्ज कर दिया। इस पर उनके परिवार और वकीलों ने पुलिस पर उन्हें जेल में बनाए रखने की साजिश का आरोप लगाया था। उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने भी प्रमुख सचिव (गृह) को पत्र लिखकर पाराशर पर दर्ज मामलों की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी।

मई 2026 में जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव ने एक सोसायटी में कथित गबन के मामले में उन्हें जमानत दी थी। उस आदेश में भी हाईकोर्ट ने कहा था कि उनके खिलाफ दर्ज ज्यादातर मामले प्रथम दृष्टया स्थानीय पुलिस के कहने पर दर्ज किए गए प्रतीत होते हैं।

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