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उत्तर प्रदेश

पत्रकार पंकज पाराशर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बेल!

प्रयागराज/नोएडा। नोएडा के वरिष्ठ पत्रकार पंकज पाराशर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह सामने आता है कि पंकज पाराशर के खिलाफ दर्ज अधिकांश मामले स्थानीय पुलिस के कहने पर दर्ज किए गए हैं। ऐसे में उनके वकील का यह तर्क कि पुलिस की कार्यप्रणाली और अनियमितताओं को उजागर करने के कारण उन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया हो, इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने 22 मई 2026 को पारित जमानत आदेश में कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार सोसायटी में कथित अनियमितताओं और गबन को लेकर अब तक रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज के समक्ष पंकज पाराशर और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ कोई शिकायत या कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इस मामले में 9 मार्च 2026 को आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल हो चुका है और 10 मार्च 2026 को संबंधित अदालत ने उसका संज्ञान भी ले लिया है। ऐसे में जांच पूरी हो चुकी है और अब आरोपी से हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं रह गई है।

हाईकोर्ट ने कहा कि मामले के सभी तथ्यों, आरोपों की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच पूरी हो जाने को देखते हुए बिना मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए जमानत दिए जाने का आधार बनता है। इसी आधार पर अदालत ने पंकज पाराशर की जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

अदालत ने पंकज पाराशर को निजी मुचलका और दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही उन्हें साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने, किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल न होने, गवाहों को प्रभावित न करने तथा ट्रायल के दौरान नियमित रूप से अदालत में उपस्थित रहने की शर्तें भी लगाई गईं।


Two pages of a legal document with bright green highlights obscuring much of the text, discussing bail, court actions, and conditions.
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