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अमेरिकी पत्रकार राष्ट्रपति से भिड़ जाता है, भारतीय पत्रकार ‘साहेब’ से पूछता है-‘आज डिबेट किस टॉपिक पर करें!’ देखें वीडियो

जांबाज अमेरिकी मीडिया बनाम दलाल भारतीय मीडिया… एक अमेरिकी मीडिया है जो सब से ताकतवर राष्ट्रपति से भिड़ गई… एक हमारी दलाल मीडिया है रोज पूछती है- ”साहब बताइये आज क्या करें आपके लिए!”


देखें फेसबुक पर कुछ प्रतिक्रियाएं….

Deoki Nandan Mishra : CNN के पत्रकार जिम Akosta ने अमेरिका के राष्ट्रपति Trump से सवाल क्या पूछा, उनका प्रेसकार्ड सरकर ने वापस ले लिया। मतलब राष्ट्रपति Trump जी CNN के इस पत्रकार से बेहद नाराज़ हैं. बावजूद इसके मीडिया संस्थान अपने पत्रकार के साथ खड़ा है और Trump का विरोध कर रहा है। अगर इस तरह की घटना भारत में हुई होती तो क्या उस पत्रकार के साथ संस्थान खड़ा होता? उस पत्रकार की नौकरी अब तक बची होती? यहाँ तो मंत्री के ख़िलाफ़ ख़बर लिखने व चलाने पर उसकी नौकरी छीन ली जाती है।

Suresh Lodhi : देखिए ‘दुनिया के सबसे ताक़तवर राष्ट्रपति’ और उसकी टीम की ग़लतबयानी के ख़िलाफ़ किस तरह से अमेरिकी प्रेस एकजुट है। यहाँ तो साथ बैठा ही डँसने को तैयार रहता है।

Arun Maheshwari : राष्ट्रपति ट्रंप ने मध्यावधि चुनाव में हार के बाद संवाददाता सम्मेलन में सीएनएन के वरिष्ठ संवाददाता जिम एकोस्टा को जिस असभ्य तरीके से धमकाया था, उसके प्रतिवाद में सीएनएन का वक्तव्य :

‘प्रेस पर इस राष्ट्रपति के हमले काफी आगे बढ़ गये हैं । वे न सिर्फ खतरनाक हैं, बल्कि चिंताजनक हद तक अ-अमेरिकी हैं । राष्ट्रपति ट्रंप ने यह साफ कर दिया कि वे एक स्वतंत्र प्रेस का सम्मान नहीं करते हैं, जबकि उसकी रक्षा करने की जिम्मेदारी की उन्होंने शपथ ले रखी है । जनतंत्र के लिये स्वतंत्र प्रेस जरूरी है, और हम हमेशा, हर जगह जिम एकोस्टा और उनके साथी पत्रकारों के साथ खड़े रहेंगे।’

Ashish Kumar : सीएनएन पत्रकार द्वारा अमेरिकी सीमा की तरफ बढ़ रहे मध्य अमेरिकी प्रवासियों के कारवां पर उनकी राय जानने के लिए किये गये सवाल पर उखड़े राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा मात्र पत्रकार जिम अकोस्टा का प्रेस पास निलंबित किया गया। फिर भी सीएनएन ने जिम का बचाव करते हुए यह कहा, यह फैसला लोकतंत्र के लिए ख़तरा है। क्या वर्तमान समय में भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में यह मुमकिन है कि कोई पत्रकार प्रधानमंत्री से उनके किये गए अच्छे या खराब किसी भी काम के बारे में सीधे सवाल कर सकता है। सवाल तो छोडिए क्या कोई पत्रकार और न्यूजचैनल आज के हालात में उनके द्वारा कार्यों की समीक्षा करने का भी साहस जुटा पा रहा है… आखिर क्यों… है जवाब किसी के पास इसका? कुछेक पत्रकार और न्यूज़ चैनल कोशिश भी करते हैं तो उन न्यूज चैनलों पर राजनीतिक दलों और कारपोरेट जगत द्वारा दबाव बनाया जाता है… चैनलों के विज्ञापन रोक लिए जाते हैं… पत्रकार को सरकारी चाटुकारिता न करने पर चैनल से बाहर कर दिया जाता है। कहां है, कैसा है, मैं तो कहता हूँ क्यों है लोकतंत्र।

Dinesh Sharnagat : सीएनएन के पत्रकार जिम ए कोस्टा ने अमेरिका के राष्ट्रपति से प्रश्न किया भारत में तो पत्रकार वार्ता होती ही नही है प्रश्न करना तो छोडो यहा तो कोई सोसल मीडिया पर प्रश्न करें तो भीड ट्रोलिंग करती है गाली देती है आप देश के दुश्मन हो पाकिस्तान चले जावों

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