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मोदी राज में हो गया देश का सबसे बड़ा बैंक घोटाला : नीरव मोदी + विजय माल्या = एबीजी शिपयार्ड

Girish Malviya-

एबीजी शिपयार्ड घोटाला… देश का सबसे बड़ा बैंक घोटाला एबीजी शिपयार्ड का मामला वैसा बिलकुल नहीं हैं जैसा मीडिया बताने की कोशिश कर रहा है. सबसे पहले यह समझिए कि घोटालेबाज कौन हैं. ऋषि अग्रवाल इस कम्पनी के कर्ता धर्ता है जो इस घोटाले का मुख्य किरदार है. ऋषि अग्रवाल रवि और शशि रुइया की बहन के लड़के हैं.

फोर्ब्स के अनुसार रुईया ब्रदर्स 2012 में देश के सबसे अमीर व्यक्ति थे. उनकी कम्पनी एस्सार ग्रुप है जो अब बिखर चुकी है. मुख्य कम्पनी एस्सार ऑयल भी 2018 में रूसी कम्पनी के हाथों बिक चुकी है. यानी यह घोटाला एस्सार से भी जुड़ा हुआ है. मीडिया यह तथ्य बता ही नहीं रहा है.

एबीजी शिपयार्ड जहाज बनाने वाली देश की सबसे बड़ी प्राइवेट कंपनी हैं. इसके शिपयार्ड गुजरात के दहेज और सूरत में स्थित हैं. भारतीय नौसेना के लिए युद्धपोतों और विभिन्न अन्य जहाजों का निर्माण के लिए यह कम्पनी अधिकृत है. इस श्रेणी में सिर्फ तीन कंपनियां ही आती हैं जिसमें से अनिल अंबानी की रिलायंस नेवल (पुराना नाम पीपापाव शिपयार्ड) भी एक थी. अनिल अंबानी ने भी 2017 में एबीजी को खरीदने की कोशिश की थी.

अभी जो ख़बर आई है वो यह है कि सीबीआई ने मामला दर्ज किया है लेकिन इसकी शिकायत बैंकों के कंसोर्टियम ने आठ नवंबर 2019 को दर्ज कराई थी. डेढ़ साल से अधिक समय तक जांच करने के बाद सीबीआई ने इस पर कार्रवाई की है.
मामला जरूर एसबीआई के कहने पर दर्ज हुआ है लेकिन इस घोटाले में आईसीआईसीआई सबसे ज्यादा नुकसान में है. एबीजी पर सबसे अधिक राशि ₹7,089 करोड़ उसका ही बकाया है.

इसके अलावा आईडीबीआई बैंक का ₹3,639 करोड़ फंसा हुआ है. आईडीबीआई को जबरदस्ती मोदी सरकार ने एलआईसी के हाथों खरीदवाया है. इसलिए एलआईसी भी इस घोटाले से नुकसान में है. एबीजी पर एसबीआई का ₹2,925 करोड़ बकाया है.

एबीजी का मामला नीरव मोदी की तरह नही हैं क्योंकि आज की तारीख में एबीजी शिपयार्ड में आईसीआईसीआई बैंक की 11 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि आईडीबीआई बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और पंजाब नैशनल बैंक में से प्रत्येक की 7 फीसदी हिस्सेदारी है. इसी प्रकार देना बैंक की हिस्सेदारी 5.7 फीसदी है. यानी बैंको की पूरी रकम डूब चुकी है.

रिजर्व बैंक ने जून 2017 में बैंकों को जिन 12 कंपनियों को बैंकरप्सी कोर्ट में ले जाने को कहा था, उनमें एबीजी शिपयार्ड भी शामिल थी. उस वक्त एबीजी शिपयार्ड के लिए सिर्फ लिबर्टी हाउस ने ही बोली लगाई थी. लिबर्टी हाउस ने 10 साल में इतना पैसा चुकाने की बात कही थी. वो कैश बिलकुल भी नहीं दे रहा था इसलिए ऑफर को बैंक रिजेक्ट कर दिए थे.

यह ग्रुप पहले से ही मुश्किल में था. 2014 में जब मोदी सत्ता में आए थे तब आईसीआईसीआई बैंक के नेतृत्व में 22 बैंकों के समूह ने एबीजी शिपयार्ड के 11,000 करोड़ रुपये के कर्ज को पुनर्गठित करने के लिए सहमति जताई थी ताकि पुनर्भुगतान के लिए कंपनी को अतिरिक्त समय मिल जाए.

यानी उस वक्त भी उसे और लोन दिया गया. इस प्रक्रिया को एवरग्रीनिंग कहा जाता है. यानी लोन वसूलने के लिए और लोन देना. 2014 में 11 हजार करोड़ का लोन 2022 में 23 हजार करोड़ का कैसे हो गया? यानी कि साफ़ है मोदी सरकार के सात सालों में उसे हजारों करोड़ रुपयों का और लोन दिया गया.

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1 Comment

1 Comment

  1. विजय सिंह

    February 14, 2022 at 9:00 pm

    and Now …..ए बी जी शिपयार्ड बैंक घोटाला
    घोटाले के आरोपी का नाम – ऋषि कमलेश अग्रवाल , अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक , ए बी जी शिपयार्ड
    रकम – 23 हजार करोड़ से ज्यादा
    28 बैंकों से 23 हजार करोड़ से ज्यादा की रकम व्यापारिक ऋण के नाम पर …

    एक आम आदमी अपने बच्चे की पढाई के लिए एजुकेशन लोन लेने जाता है तो बैंक उससे ५० सवाल पूछते हैं , मकान खरीदने के लिए लोन देते समय ढेरों सवाल , छोटे व्यापार के लिए ऋण मांगने गए व्यापारी /उद्यमी बैंकों के चक्कर लगाते लगाते थक जाते हैं ,पी एम आर वाई ,मुद्रा लोन की दशा छुपी हुई नहीं है। कुल मिलकर दो वक़्त की रोटी के लिए जूझता आम आदमी बैंकों के ढुलमुल रवैयों से हताश होकर हारा हुआ दिखता है मगर ये धनाढ्य बैंक अधिकारियों को कौन सी घुट्टी पिलाते हैं जो वो दम हिलाते हुए कर्ज पे कर्ज और फिर कर्ज को पुनर्गठन करने के नाम पर फिर से कर्ज पाते जाते है और मजे लूटते हुए घोटाले पे घोटाले करते जाते हैं।
    सबसे पहले इन बैंकों के सम्बंधित पदाधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज कर जनता की गाढ़ी कमाई लुटाने और घोटला में संलिप्तता मान कर कड़ी कार्यवाई की जानी चाहिए।

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