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दिल्ली

बिल्डर ने रिश्वत में बड़े नेताओं और अफ़सरों को तीन हज़ार फ़्लैट गिफ़्ट में दिया!

आम्रपाली ग्रुप के 3 हजार फ्लैटों पर सुप्रीम कोर्ट का तगड़ा निर्णय, कहा- दोबारा बेचो!

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली प्रोजेक्ट्स के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन घर खरीदारों के लिए, जिन्होंने फ्लैट बुक करने के बावजूद कब्जा नहीं लिया है, कोर्ट ने नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (NBCC) को निर्देश दिया है कि ऐसे फ्लैटों की बुकिंग रद्द कर उन्हें पुनः बेच दिया जाए।

न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि, जो इस मामले में कोर्ट रिसीवर नियुक्त हैं, से उन संपत्तियों की नवीनतम स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है, जो अब तक नहीं बिकी हैं या जहां घर खरीदारों से संपर्क के प्रयासों के बावजूद वे सामने नहीं आए हैं।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रविन्द्र कुमार ने बताया कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने गोल्ड होम परियोजना में अतिरिक्त फ्लैटों के निर्माण के लिए मंजूरी दे दी है, जबकि अन्य पांच परियोजनाओं के संबंध में NBCC द्वारा कुछ अनुपालन किए जाने की आवश्यकता है।

यह निर्णय उन घर खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने अब तक अपने फ्लैटों का कब्जा नहीं लिया है। उन्हें सलाह दी जाती है कि वे शीघ्रता से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें, ताकि उनकी बुकिंग रद्द न हो और उनके फ्लैट पुनः बिक्री के लिए न जाएं।


पंकज झा-

आम लोगों की ज़िंदगी एक फ़्लैट ख़रीदने में खप जाती है. नोएडा में तीन हज़ार फ़्लैटों के मालिकों का पता ही नहीं चल रहा है.. बिल्डर अनिल शर्मा (आम्रपाली ग्रुप) ने ये सभी फ्लैट बड़े-बड़े नेताओं और अफ़सरों को गिफ़्ट में दिया था. अब इस बेनामी संपत्ति को सुप्रीम कोर्ट ने बेचने का आदेश दिया है.


आम्रपाली समूह की परियोजनाओं से जुड़े हालिया विवाद भी देखें…

  1. फ्लैटों का कब्जा न मिलना: नोएडा में आम्रपाली की परियोजनाओं में लगभग 10,000 फ्लैट तैयार होने के बावजूद खरीदारों को कब्जा नहीं मिल पा रहा है। साढ़े चार साल में केवल 5,000 खरीदारों को फ्लैट मिले हैं, जबकि 38,000 खरीदारों को तीन साल में फ्लैट देने का दावा किया गया था। इस देरी के पीछे अधूरे दस्तावेज, फॉरेंसिक ऑडिट में गड़बड़ी और अन्य प्रशासनिक समस्याएं बताई जा रही हैं।
  2. एनबीसीसी को परियोजनाएं पूरी करने का निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह का रेरा पंजीकरण रद्द करते हुए सरकारी निर्माण कंपनी एनबीसीसी को लंबित परियोजनाएं पूरी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पाया कि आम्रपाली समूह के शीर्ष प्रबंधन ने मकान खरीदने वालों के धन का दुरुपयोग किया है।
  3. एनबीसीसी को 15,000 करोड़ रुपये जुटाने की अनुमति: सुप्रीम कोर्ट ने एनबीसीसी को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली की सात परियोजनाओं में अतिरिक्त फ्लैट विकसित करके 15,000 करोड़ रुपये जुटाने की अनुमति दी है, जिससे लंबित परियोजनाओं को पूरा किया जा सके।
  4. एनबीसीसी द्वारा वित्तीय सहायता न देने का निर्णय: सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय लिया है कि एनबीसीसी आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करेगा, लेकिन अपनी ओर से कोई वित्तीय सहायता नहीं देगा। कोर्ट ने मामले में बड़े फ्रॉड की बात कही है और दोषियों को सजा देने की चेतावनी दी है।

इन विवादों के चलते आम्रपाली समूह की परियोजनाओं में निवेश करने वाले हजारों खरीदारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, और परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में देरी हो रही है।

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