
बद्री प्रसाद सिंह-
कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटने के बाद मुन्ना भाई की राजनीतिक गतिविधियाँ सीमित सी हो गईं, लेकिन कांग्रेस हाईकमांड से संबंध बने रहे। २००९ के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशियों का मन से प्रचार किया। इस चुनाव में कांग्रेस अकेले लड़ने का निश्चय कर दमदारी से चुनाव लड़ा और उत्तर प्रदेश की ८० सीट में से २१ सीटों पर विजयी रही। प्रदेश में बहुत वर्षों बाद कांग्रेस का इतना अच्छा प्रदर्शन रहा।
इस चुनाव में जौनपुर जनपद के मल्हनी क्षेत्र से विधायक धनंजय सिंह लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने और अपनी मल्हनी विधानसभा क्षेत्र से त्यागपत्र देने पर वहाँ उप चुनाव हुआ। आशू वहाँ से कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ना चाहते थे। २००२ के विधानसभा चुनाव में बादशाहपुर विधानसभा से बसपा से आशू को चुनाव न लड़ा कर मुन्ना भाई का जो अपराध-बोध था उसका परिमार्जन करने के लिए उन्होंने आशू को मल्हनी से कांग्रेस का टिकट दिला दिया। यद्यपि वह अच्छी तरह जानते थे कि आशू वहाँ से पराजित होंगे।
मल्हनी विधानसभा क्षेत्र हमारे घर से दूर है व आशू वहाँ के लिए पूर्णतया नये थे। उप चुनाव में आशू बड़े अंतर से धनंजय सिंह के पिता से पराजित हुए और उसके राजनीतिक जीवन की अपूरणीय क्षति हुई।
उस समय मैं डीआईजी/एसएसपी मुरादाबाद था और कुँवर फतेहबहादुर जी प्रमुख सचिव गृह थे, जो दो जिलों-झाँसी और वाराणसी में मेरे डीएम रह चुके थे और मुझे बहुत स्नेह देते थे। एक दिन उन्होंने फोन पर मुझसे पूछा कि “क्या मैं अपने बेटे को मल्हनी से चुनाव लड़ा रहा हूँ?”
“मुझे निलंबित नहीं होना है जो बसपा राज में कांग्रेस से बेटे को लड़ाऊँगा”, मैंने उत्तर दिया। ”फिर वहाँ से कौन लड़ रहा है?” “मुन्ना भाई का लड़का जिसे आपने २००२ में बादशाहपुर से बसपा का टिकट दिलवाया था” मैंने उत्तर दिया।
“क्या तुमने चुनाव प्रचार हेतु मुरादाबाद से गाड़ियाँ भिजवाई है?” “अब हर गाँव में गाड़ियाँ हैं, इतनी दूर से गाड़ी मैं क्यों भेजूँगा,” मैंने कहा। ”तुमने चुनाव के लिए पैसे भेजे हैं?” मैं थोड़ी देर चुप रह कर बोला कि “यह प्रश्न यदि प्रमुख सचिव गृह पूछ रहे हैं तो जवाब नहीं है और यदि बड़े भाई पूछ रहे हैं तो हाँ है।” मैंने कहा।
“कितना?” “जितना मैं उनके पिता मुन्ना भाई को चुनाव में देता था “मैंने बताया। ”क्या वह जीतने की स्थिति में है?” मैंने कहा नहीं। मैंने पूछा कि क्या यह शिकायत सांसद धनंजय सिंह ने की है? “नहीं, तुम्हारे मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा के विधायक ने बहन जी से की है“ उन्होंने बताया।
विधायक ठाकुरद्वारा एक अपराधिक प्रवृति के व्यक्ति थे और उनसे मेरे संबंध बदतर थे। प्रमुख सचिव गृह से मेरे संबंध मधुर थे इसलिए मैं स्पष्ट बात कर पाया। बाद में सांसद धनंजय सिंह ने मिलने पर मुझे बताया था कि यही प्रश्न फतेह बहादुर साहब ने उनसे भी किया था लेकिन उन्होंने नकार दिया था।
मुन्ना भाई के अच्छे संबंध सोनिया जी से बने रहे क्योंकि सोनिया जी ने इंदिरा जी तथा राजीव गांधी जी के मुन्ना भाई के अच्छे संबंध को देखा था लेकिन राहुल गांधी से उनके संबंध औपचारिक ही थे। सोनिया जी के बीमार रहने तथा राहुल गांधी के कांग्रेस पार्टी में प्रभावी होने के बाद मुन्ना भाई दल की गतिविधियों से किनारा करने लगे। वैसे भी पुराने कांग्रेसी नेताओं का स्थान नये नेताओं द्वारा लिए जाने से पुराने नेता (प्रमोद तिवारी जी को छोड़कर) अपने को उपेक्षित समझने लगे हैं।
लेखक बद्री प्रसाद सिंह रिटायर आईपीएस अधिकारी और दिवंगत अरुण कुमार सिंह मुन्ना के छोटे भाई हैं।
क्रमशः
पिछला भाग…
अरुण कुमार सिंह मुन्ना (पार्ट 5) : 2 जून 1995 को हुए “गेस्ट हाऊस कांड” का मैं चश्मदीद गवाह भी हूँ!



