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दिल्ली

दिल्ली की नई सीएम आतिशी मार्लेना और वरिष्ठ पत्रकार भूपेंद्र चौबे के बीच क्या रिश्ता है?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया है. आतिशी मार्लेना को केजरीवाल की जगह नया सीएम चुना गया है. वर्ष 2020 में आतिशी दिल्ली के कालकाजी से पहली बार विधायक चुनी गई थीं.

पंजाबी तोमर राजपूत परिवार से ताल्लुक रखने वाली आतिशी ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज और लंदन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है.

आतिशी वरिष्ठ पत्रकार भूपेंद्र चौबे की नजदीकी रिश्तेदार भी हैं. उनकी बहन रोजा बसंती की शादी वरिष्ठ पत्रकार भूपेंद्र चौबे से हुई है, जो इंडिया अहेड नामक न्यूज चैनल के सर्वेसर्वा हैं.


रमा शंकर सिंह-

आतिशी मार्लेना दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रेष्ठतम कॉलेज सैंट स्टीफ़न्स की टॉपर हैं। आगे की उच्च शिक्षा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों जैसे आक्सफोर्ड युनिवर्सिटी से पूरी छात्रवृत्ति पाकर हुई और विश्व के विरले छात्रों को मिलने वाली सुविख्यात रोढ्स स्कॉलरशिप भी मिली।

आतिशी के पंजाबी सिख पिता साम्यवादी विचार से प्रभावित थे इसलिये उन्होंने अपनी पुत्री का नाम मार्क्स और लेनिन के शब्दों को जोड़कर मार्लेना बनाया! आतिशी का भावार्थ आप जानते ही हैं- क्रांतिकारी!

जब अन्ना हज़ारे का कथित भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन शुरु हुआ था तो बड़े पैमाने पर सैंकड़ों बल्कि पूरे देश में हजारों की तादाद में भारत के प्रतिभाशाली युवा दुनिया भर में अपना बड़ा काम धंधा नौकरी छोड़कर आंदोलन में जुड़े थे यह सोचकर कि अब देश में क्रांति होने वाली है और वांछित मूलभूत परिवर्तन आने वाला है। आतिशी भी उसी समय केजरीवाल की टीम का हिस्सा बनी! कालांतर में केजरीवाल ने समूचे आंदोलन व हज़ारों सच्चे परिवर्तनआकांक्षी युवाओं को एक एक कर निकाल कर फैंक दिया और एक राजनीतिक पार्टी बनाकर ख़ुदमुख़्तार व मुख्यमंत्री बन गये। इसके बाद भी बचे खुचे लोग भी उनसे सहन नहीं हुये और प्रो आनंद कुमार, योगेन्द्र यादव, अजित झा, प्रशांत भूषण, कुमार विश्वास, खेतान, आशुतोष आदि को धकिया कर बाहर कर अपने निजी नियंत्रण की पार्टी में तब्दील कर दिया। मनीष सिसोदिया, गोपाल रॉय, संजय सिंह और आतिशी जैसे ही चंद कुछ बचे जो केजरीवाल की मनमर्ज़ी मुताबिक़ सोचते व चलते हैं। आतिशी को दिल्ली में शिक्षा की संरचना को सुधारने का श्रेय जाता है जिसकी अखबारी व मीडिया वाहवाही मनीष सिसोदिया लूटते रहे हैं।

आतिशी जैसे ही पिछला चुनाव दिल्ली के सिख बहुल कालकाजी क्षेत्र से लड़ी उन्होनें अपना उपनाम बदल कर सिंह कर लिया – आतिशी सिंह।

एक नयी राजनीतिक संस्कृति का वायदा और नये क़िस्म का नेतृत्व देने की संभावना के आंदोलन का हश्र यह हुआ कि वह भी दूसरों जैसा सामान्य राजनीतिक दल बन गया । जैसे सब वैसे ही ये। कोई फर्क नहीं बचा सिवाय इसके कि पढ़े लिखे होने के नाते वे यह हिसाब लगाने में समर्थ हुये कि राज्य की कुल आय व्यय में से कितना खर्च कर बिजली पानी व मोहल्ला क्लीनिक मुफ़्त दिया जा सकता है।

गरीब जनता के लिये बिजली पानी के बिल माफ़ कर देने और दिल्ली के बहुत महँगा स्वास्थ्य जाँच बिलों से उनके मासिक पारिवारिक बजट में बड़ी राहत मिली और यही बात केजरीवाल को तीन चुनाव लगातार जितवाती रही है।

आतिशी सोचने समझने में समर्थ महिला है और उनका उर्वर दिमाग़ कुछ नये विचार क्रियान्वित कर सकता है लेकिन उनकी पार्टी का नेता इतना घाघ और स्वकेंद्रित है कि आतिशी को कठपुतली बनाकर रखना चाहेगा।

ख़ैर भविष्य की राजनीति क्या होगी इसका निर्णय आजकल मतदाताओं के साथ साथ संगठन व धनशक्ति भी करती है। देखते हैं कि आतिशी कुछ ठोस डिलीवर कर पाती हैं या अस्थायी कामचलाऊ व्यवस्था ही बनी रहती है। एक तेजतर्रार सुशिक्षित खुले दिमाग़ का व्यक्ति कभी भी ऐसा कुछ कर सकता है जिससे समूचा परिदृश्य बदल जाये ! लेकिन यह बात अन्यपक्षों पर भी लागू होती है लेकिन उधर संगठन व धनबल तो है पर जमे जमाये नेता सब रचनाशील दिमाग़ से खल्ल्लास हैं।

खैर, फ़िलहाल दिल्ली का आसन्न चुनाव दिलचस्प ज़रूर हो गया है कि भाजपा को कोर वोटर पंजाबी और बनिया पहले से ज़्यादा टूटता दिखेगा ऊपर से मोदीशाह के प्रति अब उदासीनता व उभरती निराशा।

कामना की जाये कि आतिशी दिल्ली में अपने जनहितकारी काम का इतिहास रच सकें।


जयशंकर गुप्ता-

केजरीवाल का पोलिटिकल मास्टर स्ट्रोक। बेदाग चेहरे की आतिशी दिल्ली की नई मुख्यमंत्री। आज प्रधानमंत्री मोदी जी का जन्मदिन है और उनके तीसरे कार्यकाल की सरकार का सौवां दिन भी लेकिन केजरीवाल के मास्टर स्ट्रोक ने इसे फीका कर दिया। बेखबरी मीडिया के सभी चैनलों पर केजरीवाल के इस्तीफे और आतिशी के मुख्यमंत्री बनने की ही चर्चा।

अब एक ही सवाल! क्या केंद्र सरकार और उसके प्रतिनिधि उपराज्यपाल आतिशी सरकार को सुचारु और स्वतंत्र रूप से काम करने देंगे या पुराने ढर्रे पर ही चलेंगे!

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