प्रधानमंत्री मोदी ब्रुनेई दौरे पर हैं. इसके बाद सिंगापुर जाएंगे. विदेश मंत्रालय के सचिव जयदीप मजूमदार ने बताया कि पीएम ब्रुनेई के सुल्तान हाजी हसलन बोलकिया के बुलावे पर ब्रुनेई गए हैं. ब्रुनेई की रॉयल फैमिली और कानून की चर्चा पूरी दुनिया में फेमस है. और तो यहां पत्रकारों को भी चुटकी में गिरफ्तार कर लेने का प्रावधान है.
सबसे पहले यह जानिए की ब्रुनेई देश कैसा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साउथ ईस्ट एशिया का एक अमीर और छोटा देश है, जिसकी आबादी करीब 5 लाख से भी कम है. ब्रुनेई को 1984 में आजादी मिली. दक्षिण चीन सागर इसके उत्तर में स्थित है और मलेशिया इसके पूर्व, पश्चिम और दक्षिण में है. यहां की सरकार की आय का मेन सोर्स ऑयल और गैस है, जिसका देश की जीडीपी में 80 प्रतिशत योगदान है.
इस देश में शरिया कानून के मुताबिक सजा दी जाती है. यहां तालिबान और अरब के कुछ देशों जैसे ही कानून लागू हैं. चोरी करने वालों के हाथ काटने और रेप की सजा मौत है. एलजीबीटीक्यू की सजा पत्थरों से मारकर मौत के घाट उतारने की है.
मीडिया पर कड़ी पाबंदी
एबीपी न्यूज की वेबसाइट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रुनेई में आपातकालीन शक्तियों के तहत सरकार ने मीडिया सहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित किया है. संविधान या कानून में बोलने की स्वतंत्रता का कोई प्रावधान नहीं है. यहां का कानून सरकार को बिना किसी पूर्व सूचना या कारण बताए समाचार पत्र बंद करने की अनुमति देता है.
सरकार के पास एकमात्र स्थानीय टेलीविजन स्टेशन, तीन मलेशियाई टेलीविजन चैनल और दो सैटेलाइट टेलीविजन सेवाएं उपलब्ध हैं. कानून के तहत समाचार पत्र प्रकाशकों, मालिकों या संपादकों के खिलाफ मुकदमा चलाने का भी नियम है. अगर सरकार के खिलाफ कोई भी देशद्रोही चीजें पब्लिश की हैं तो मुकदमा चल सकता है. सजा में एक साल तक प्रकाशन रुक सकता है.
वहीं, किसी अन्य नाम से प्रकाशन करने या लिखने पर भी बैन होगा. किसी का इंटरव्यू करने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ती है. जिन पत्रकारों को झूठी और दुर्भावनापूर्ण रिपोर्ट लिखने का दोषी पाया जाता है, उन्हें भारी जुर्माना या तीन साल तक की जेल हो सकती है.


