शराबखोरी संवैधानिक है : रवीश कुमार

रवीश कुमार-

एक नेता की तस्वीर चलाई जा रही है। मेज़ पर शराब रखी हुई है। शराब के साथ शराब से भी ज़्यादा शराब के साथी-बाराती हैं। मतलब दाल-मोंठ नमकीन वग़ैरह।

इस तस्वीर के ज़रिए नैतिकता का मानदंड स्थापित किया जा रहा है। भक्त, देशभक्त, राष्ट्रभक्त हर श्रेणी के लोग शराब पीते हैं। उनके शराब पीने को दोहरापन समझना ग़लत है। जिस तरह 100 रुपया लीटर पेट्रोल देश की अर्थव्यवस्था के लिए ख़रीद रहे हैं उसी तरह कुछ लोग उसी देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर करने के लिए शराब पीते हैं।

नेताओं का शराब पर दो प्याला अधिक हक़ होना चाहिए क्योंकि वही लोग सरकार में जाकर गली-गली शराब बिकने की व्यवस्था करते हैं। मंत्रियों का शराब पीना अच्छी बात है। सत्ता के नशे के अलावा यह दूसरा नशा ज़रूरी है ताकि वे नशे का विकल्प आज़माते रहें। लड़खड़ाते रहें।

शराब संवैधानिक है। संवैधानिक व्यवस्था के तहत बिकती है। शराब का पीना नैतिकता का उल्लंघन नहीं है। शराब का नहीं पीना नैतिकता का मंचन नहीं है। उस तस्वीर में कोई पी नहीं रहा है। मेज़ पर शराब रखी है। इसलिए यह दलील उपलब्ध है कि दोस्तों के साथ बैठे थे। जगह नहीं मिली तो एक किनारे जाकर बैठ गए वहाँ पहले से मेज़ पर शराब रखी थी।

जो पीते हैं वो पीने का बहाना जानते हैं। पीने के बाद मैंने नहीं पी थी का भी बहाना जानते हैं ।अस्तु।

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