
संजय कुमार सिंह
आज के अखबारों में दो एक्सीडेंट की खबर है। एक केदारनाथ में हेलीकॉप्टर दुर्घटना की जिसमें एक बच्चे समेत सात लोगों के निधन की सूचना है। दूसरी खबर पुणे में एक पुल टूटने की है। इसमें चार लोगों के मरने की खबर है। मरने वालों की संख्या के लिहाज से हेलीकॉप्टर हादसे की खबर बड़ी है लेकिन पुराने पुल का रख-रखाव ठीक न होना और जर्जर दिख रहे पुल पर भी लोगों की बड़ी संख्या और आवाजाही नियंत्रित नहीं होने के कारण यह दुर्घटना होते हुए भी लापरवाही का मामला लग रहा है। दोनों मामले डबल इंजन वाले राज्यों के हैं फिर भी हेलीकॉप्टर दुर्घटना उड्डयन का मामला है जबकि पुल टूटना रख-रखाव और प्रशासनिक लापरवाही का मामला है। हवाई दुर्घटनाओं के बारे में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहले ही कह चुके हैं, ‘ये एक्सीडेंट था… कोई रोक नहीं सकता’ और ऐसे में बड़ी खबर पुल टूटना ही है। कहने की जरूरत नहीं है कि हेलीकॉप्टर दुर्घटना पहाड़ पर मौसम खराब होने से हुई और मरने वाले धार्मिक या तीर्थ यात्रा पर थे जिनके बारे में कुम्भ के समय कहा गया था कि लोग मरे नहीं हैं उन्हें मोक्ष मिला है। यही बात यहां लागू की जाये तो खबर बड़ी नहीं है।
वैसे भी, पहाड़ों की यात्रा मुश्किल होती है और जोखिम तो रहता ही है। भूस्खलन से भी लोग मरते और फंसते हैं। आस्था में तीर्थ करने वाले किसी मनुष्य या जानवर पर सवार होकर जायें या इंजन वाली गाड़ी अथवा हेलीकॉप्टर से उनके लिये यात्रा या दर्शन महत्वपूर्ण होता है और उसमें निधन पीढ़ियों से स्वर्ग का रास्ता माना जाता रहा है। मेरे लिये मोक्ष नया था। बचपन में मैंने देखा है कि मेरे एक परिचित दफ्तर से गाड़ी से घर लौटते थे और बीच में मंदिर पड़ता था लेकिन वे घर आकर गाड़ी छोड़कर पैदल मंदिर जाते थे। बुढ़ापे में मैंने उन्हें तीर्थ करते नहीं सुना। और संभव है यह हिन्दुत्व की विविधता हो। अभी यह मुद्दा नहीं है। ऐसे में मुझे नहीं लगता कि हेलीकॉप्टर दुर्घटना बड़ी खबर नहीं है। ईश्वर का नाराजगी का मामला भले हो। हालांकि, उड्डयन संबंधी नियमों और सुरक्षा उपायों के साथ हेलीकॉप्टर के नुकसान और बीमे के कारण यह बड़ा मामला हो सकता है। लेकिन जर्जर लोहे के पुल पर कोई नियंत्रण न होना और सब देखकर भी उसपर लगी भीड़ में शामिल होना और होने देना हत्या और आत्महत्या दोनों का मामला है। यह दुर्घटना तो नहीं है और भले अमित शाह ने कहा है, कोई रोक नहीं सकता पर तमाम दुर्घटनाएं टाली ही गई हैं। मोदी राज की बात अलग है। वैसे भी हवाई यात्रा सबसे सुरक्षित होती है। पैदल चलता आदमी जब मैनहोल में गिरकर मरता है तो 600 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने पर मौत जब जितनी हो, कम ही है। मैन होल वाले की तो ना खबर छपती है ना मुआवजा मिलता है। जहां तक पुल टूटने से लोगों के मरने की बात है, पुणे का पुल तो उपयोग के लिये अनुपयुक्त घोषित था लेकिन मोरबी का पुल तो मरम्मत के बाद टूट गया था।
आपको याद होगा, गुजरात के मोरबी में एक पुराना पुल मरम्मत के बाद खोला गया था और उसके टूट जाने से 135 जानें गई थीं। सरकार ने एसआईटी का गठन किय था और अपनी प्रारंभिक जांच में पाया कि आधे तारों में जंग लगे थे और पुराने सस्पेंडर्स को नए से जोड़ने जैसी प्रमुख खामियां थीं। आधे तारों में जंग लगे थे और पुराने सस्पेंडर्स को नए से जोड़ने जैसी प्रमुख खामियां थीं। मोरबी नगर पालिका ने सामान्य बोर्ड की मंजूरी के बिना ओरेवा ग्रुप (अजंता मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड) को पुल के रख-रखाव और संचालन का ठेका दिया गया था, जिसने मार्च 2022 में पुल को नवीनीकरण के लिए बंद कर दिया था और 26 अक्टूबर को बिना अनुमति खोल दिया था। एसआईटी के अनुसार, पुल गिरने के समय इसपर लगभग 300 लोग मौजूद थे, जो पुल की भार वहन क्षमता से “कहीं अधिक” था। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि पुल की वास्तविक क्षमता की पुष्टि प्रयोगशाला रिपोर्ट से होगी। जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अलग-अलग लकड़ी के तख्तों को एल्युमीनियम डेक के साथ बदलने से भी पुल गिरा है। इससे समझा जा सकता है कि अमित शाह ने, ‘ये एक्सीडेंट था… कोई रोक नहीं सकता’ क्यों कहा है।
मोरबी पुल हादसे के मुख्य आरोपी जयसुख पटेल को सुप्रीम कोर्ट ने 7 शर्तों के साथ जमानत मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते वक्त कहा कि जमानत की शर्तें मोरबी कोर्ट तय करेगा। जमानत मिलने पर उनका सम्मान किया गया था। उल्लेखनीय है कि दिल्ली के उपहार सिनेमा अग्निकांड में 59 लोगों की मौत हुई थी। 1997 के उपहार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय सुनाते हुए सिनेमा मालिकों गोपाल अंसल को एक साल की सजा के साथ दोनों भाइयों पर 30-30 करोड़ का जुर्माना लगाया था। उम्र को देखते हुए सुशील अंसल को जेल से राहत दी गई थी, हालांकि गोपाल अंसल चार महीने और सुशील पांच महीने जेल की सजा काट चुके हैं। उस समय कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा था कि जुर्माना ना देने की सूरत में दोनों को दो साल की सजा काटनी पड़ेगी। यह नरेन्द्र मोदी के सत्ता में प्रभावी होने से पहले की बात है। आजतक की 2014 की एक खबर के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी निवेशकों से कहा था, ‘गुजराती हूं, मेरे खून में कारोबार है‘। 2025 में ऑपरेशन सिन्दूर के नाम पर पाकिस्तान से युद्ध छेड़ने के बाद उन्होंने जरूर कहा कि मेरी नसों में गर्म सिंदूर बहता है; भारतीयों के खून से खेलना पाक को महंगा पड़ेगा लेकिन सच्चाई यही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने युद्ध विराम की घोषणा कर दी। इस मामले में भारत जो कहे, ट्रम्प ने कल फिर (शायद 15वीं बार) कहा है, ईरान और इजराइल को एक समझौता करना चाहिये और वे करेंगे वैसे ही जैसे मैंने भारत और पाकिस्तान के बीच करवाया है। उस मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार का उपयोग करके दो बेहतरीन नेताओं के साथ बातचीत में तर्क, सामंजस्य और विवेक लाने से दोनों शीघ्रता से निर्णय लेने और युद्ध रोकने में सक्षम हुए!” तथ्य यह भी है कि भारत ने एक भी बार नहीं कहा है कि ट्रम्प झूठ बोल रहे हैं। ऐसे में अमित शाह ने जो कहा उसका मतलब है और आज के अखबारों की प्राथमिकता उसी से प्रेरित या प्रभावित लगती है।
आज जिन दो दुर्घटनाओं की खबर है उनमें पुल गिरना बड़ी खबर इसलिये भी है कि इसमें मरने वालों के अलावा 51 लोग घायल या बीमार हुए हैं। इनमें आठ की हालत गंभीर है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार इसे उपयोग के लिए अनफिट करार दिया जा चुका था लेकिन पैदल चलने वालों और दुपहियों के लिए आधिकारिक तौर पर बंद नहीं किया गया था। कहने की जरूरत नहीं है कि यह ऐक्सीडेंट हो भी तो इसे रोका जा सकता था और कई लोग अपना काम ठीक से करते तो पुल भले गिरता मरने वाला कोई नहीं होता। हालांकि अनुपयुक्त घोषित पुल के उपयोग की इजाजत देना या उपयोग से आंख मूंदे रहना आपराधिक लापरवाही है। भाजपा राज में इससे जुड़ी एक समस्या भी सामने आई थी। आज उसे भी याद करना बनता है। जून 2019 में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विधायक बेटे आकाश ने नगर निगम कर्मचारियों के साथ मारपीट की थी। इस मामले में आकाश को गिरफ्तार भी किया गया था तब कोर्ट ने उन्हें ज़मानत देने से इनकार कर दिया था और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। खबरों के अनुसार, निगम अधिकारी एक जर्जर मकान तोड़ने पहुंचे थे। भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और पहली बार विधायक बने आकाश विजयवर्गीय ने दो निगम अधिकारियों को बल्ले से पीट दिया। तब विधायक आकाश का दावा था कि अधिकारी एक महिला से बदसलूकी कर रहे थे। यह तो सिर्फ शुरुआत है, हम भ्रष्टाचार और गुंडई को खत्म कर देंगे। हमारा लाइन ऑफ एक्शन है- आवेदन, निवेदन और फिर दनादन। आकाश विजयवर्गीय ने कहा ‘मैं बहुत गुस्से में था। मुझे याद नहीं कि मैंने क्या-क्या किया। आकाश नवंबर 2018 में चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने थे।’ विधायक की इस हरकत पर कांग्रेस ने कहा था कि इस घटना से भाजपा का चरित्र उजागर हो गया है। पुलिस ने आकाश और 10 अन्य लोगों पर गंभीर कानूनी प्रावधानों के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था। कोई पांच साल बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने सभी दस आरोपियों को (वीडियो होने के बावजूद) दोषमुक्त करार दिया।
इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार, कैलाश विजयवर्गीय के बेटे को बरी किए जाने के पीछे मुख्य गवाह का मुकरना और जांच में खामियां हैं। अखबार ने 29 सितंबर 2024 को लिखा था, इंदौर-3 से तत्कालीन विधायक आकाश विजयवर्गीय को 26 जून 2019 को इस आरोप में गिरफ्तार किया गया था कि उन्होंने अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान इंदौर नगर निगम अधिकारी धीरेंद्र सिंह बैस को बल्ले से मारा था। नगर निकाय अधिकारी, जिनके साथ पूर्व भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा कथित तौर पर मारपीट की घटना 2019 में कैमरे में कैद हुई थी ने जिरह के दौरान अदालत को बताया कि वह अपने फोन पर व्यस्त थे, इसलिए यह नहीं देख सके कि उन्हें क्रिकेट के बल्ले से किसने मारा और वह कथित घटना की “तस्वीरों/वीडियो की प्रामाणिकता के बारे में बात नहीं कर सकते”। अधिकारी ने ऐसा क्यों कहा होगा समझना मुश्किल नहीं है पर समस्या तो अपनी जगह है ही। लेकिन वह खबरों में नहीं दिखती है और अखबार वही करते हैं जो सरकार चाहती है। आज भी इन दोनों खबरों के मामले में यही हुआ है।
यहां मैं सिंगापुर के गार्डन्स बाई द बे का जिक्र करना चाहूंगा। यहां लाइट एंड साउंड का शो होता है। मैंने उसे देखा है और देखते हुए पता चला कि कुछ लोग ऊंचाई पर बेहतर जगह से देख रहे थे। मैंने जानना चाहा कि हम वहां क्यों नहीं गये। पता चला कि उसके लिये टिकट नहीं मिला और जितने लोग जा सकते हैं उतने वहां पहुंच चुके हैं या टिकट बिक चुके हैं। मैंने जगह खाली देखकर ही पूछा था और जवाब से समझ में आया कि जगह नहीं है का मतलब यह नहीं होता है कि तिल रखने की भी जगह नहीं है और वह गिनती से पूरी हो जाती है। दूसरी ओर, हमलोग 68 किलों के आठ लोगों की लिफ्ट में चाहते हैं कि 80 किलो के 10 लोग आ जायें और अगर लिफ्ट चल जाये तो दोबारा जाने का इंतजार नहीं करते हैं जबकि सिंगापुर का जो शो मैं अच्छी जगह से नहीं देख पाया उसे वहां से देखने के लिए फिर जाना पड़ेगा और जरूरी नहीं है कि अगली बार टिकट मिल ही जाये। सिंगापुर में एक व्यक्ति की भी मौत हो जाये तो अफसोस किया जाता है। हमारे यहां तो बताने के बावजूद कोविड को रोकने की कोशिश नहीं हुई, पीएम केयर्स के बावजूद वेंटीलेटर नहीं खरीदे जा सके और मरने वालों की सही संख्या भी नहीं बताई गई। और ऐसे कितने ही मामले हैं लेकिन ऑपरेशन सिन्दूर जरूरी था जिसे ट्रम्प ने रुकवा दिया और कल फिर इसका दावा किया है।
अमर उजाला में आज विज्ञापनों के कारण दो पहले पन्ने हैं। खबरों का प्लेसमेंट विज्ञापनों से भी प्रभावित हो सकता है फिर भी पहले पन्ने पर लीड का शीर्षक है, खराब मौसम के कारण केदारनाथ के पास हेलिकॉप्टर गिरा, पायलट समेत सात की मौत। इस खबर को महत्व दिये जाने का कारण यह भी हो सकता है कि चारधाम यात्रा मार्ग पर यह पांचवां हादसा है। लेकिन पुल टूटने का मामला भी दूसरा है भले पहले डबल इंजन वाले गुजरात में हुआ था और दूसरा भी डबल इंजन वाले पुणे का है। अमर उजाला के दूसरे पहले पन्ने की लीड का शीर्षक है, पुणे में इंद्रायणी नदी का पुल टूटा, चार पर्यटकों की मौत, 18 से अधिक घायल। उपशीर्षक एनडीआरएफ का प्रचार है और बताया गया है कि सरकार तथा उसकी एजेंसी ने भी ‘कुछ’ किया है। नवोदय टाइम्स में दोनों खबर साथ तो है लेकिन एक लीड और दूसरी सेकेंड लीड है। लीड हेलिकॉप्टर दुर्घटना है। यह पांच कॉलम में है जबकि पुल ढहा तीन कॉलम में है। शीर्षक का फौन्ट साइज भी छोटा है। देशबंधु में हेलिकॉप्टर दुर्घटना के साथ ही पुल टूटने की भी खबर है और यहां भी यह लीड के मुकाबले छोटी है। फोटो भी। इंडियन एक्सप्रेस में हेलिकॉप्टर दुर्घटना लीड है, पुल टूटने की खबर सिंगल कॉलम में है। हिन्दुस्तान टाइम्स में हेलिकॉप्टर दुर्घटना की खबर लीड है और पुल टूटने की खबर फोटो उसके कैप्शन के साथ तीन छोटी खबरों से बताई गई है। इसके अनुसार 18 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और यह पुणे से 30 किमी दूर लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। तीसरी खबर है, इसका निर्माण 1992 में हुआ था। इस लिहाज से यह बहुत पुराना नहीं है पर देखने में बेहद जर्जर लग रहा है भले इसे बंद नहीं किया गया था पर भीड़ लगाने लायक तो बिल्कुल नहीं था और सिर्फ पैदल चलने के लिए भी था तो रख-रखाव के अभाव में चौपट हुआ है जो भीड़ ज्यादा होने से टूट भी गया। टाइम्स ऑफ इंडिया में भी दोनों खबरों का प्लेसमेंट नवोदयटाइम्स की तरह है और शीर्षक का फौन्ट भी बड़ा छोटा है। द हिन्दू में हेलिकॉप्टर दुर्घटना चार कॉलम की लीड है जबकि पुल टूटने की खबर तीन कॉलम की खबर है। दि एशियन एज में हेलिकॉप्टर दुर्घटना की खबर तीन कॉलम में है पर फोटो ही दो कॉलम जिसमें एनडीआरएफ वालों की भगवा वर्दी ही दिख रही है। कैप्शन भी यही है। पुणे का पुल गिरने की खबर यहां भी सिंगल कॉलम में है और उसकी फोटो नहीं है। एनडीआरएफ वालों की भी नहीं। दोनों खबरों को एनडीआरएफ वालों को दिखाकार उनका अच्छा चार किया जा सकता था। मेरे लगभाग सभी अखबार चूक गये। द टेलीग्राफ ने सबसे अलग, विमान हादसे की तीसरी खबर मिलाकर बैनर शीर्षक बनाया है। अंग्रेजी में शीर्षक डब्ल्यू अक्षर से शुरू होने वाले चार शब्दों से बना है, WEEK WE WISH WASN’T (सप्ताह जो हम चाहते हैं कि नहीं होता)। इसमें विमान हादसे को सबसे पहले रखा गया है, फिर हेलिकॉप्टर दुर्घटना और अंत में पुल गिरना। अखबार की लीड इजराइल – ईरान युद्ध को भी शामिल किया है।



