फ़ोर्ड का भारत छोड़ने का फैसला, मीडिया का घटियापन शुरू

अमेरिका की दिग्गज ऑटो कम्पनी फ़ोर्ड मोटर्स ने भी भारत से अपना कारोबार समेटने की घोषणा कर दी है। कम्पनी प्रबंधन का कहना है कि वे भारत के चेन्नई व सानंद वाले अपने दो प्लांट अगले साल तक बंद कर देंगे।

इस एग्जिट से कुल चार हज़ार लोगों की नौकरी जाएगी। फ़ोर्ड से पहले जनरल मोटर्स और हार्ले डेविडसन जैसी अमेरिकी कम्पनियाँ भारत से कारोबार समेट चुकी हैं।

फ़ोर्ड ने भारत में कारोबार 1995 से शुरू किया। इसने कुल ढाई बिलियन डॉलर का निवेश किया। फ़ोर्ड के भारत में चार हज़ार कर्मचारी हैं। कुल कस्टमर बेस दस लाख का है।

विस्तार से खबर देखिए-


गिरीश मालवीय-

मीडिया ने अपना घटियापन खुलकर दिखाना शुरू कर दिया, कल शाम को फोर्ड मोटर्स द्वारा भारत में कामकाज समेटने की खबर आयी, इस घटना पर देश के प्रमुख अखबार नवभारत टाइम्स ने यह खबर लगाई कि….. ‘फोर्ड ने रतन टाटा को औकात दिखाने की कोशिश की, टाटा मोटर्स ने ऐसे रौंदा कि ताले लग गए’।

यानी सरकार से इस बात का जवाब माँगने के बजाए कि फोर्ड जैसी कम्पनी भारत में बिजनेस क्यों बंद कर रही है, मीडिया देश की जनता को बरगलाने में लगी है कि फोर्ड तो इसलिए भाग खड़ी हुई क्योंकि उसे टाटा मोटर्स ने पीट दिया उसे धूल चटा दी।

परसाई ने लिखा है ‘शर्म की बात पर हम ताली पीटते है इस समाज का क्या ख़ाक भला होगा’।

पिछले दिनों देश की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आर सी भार्गव ने वाहन उद्योग संगठन सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स (SIAM) के 61वें सालाना सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकारी अधिकारी ऑटो इंडस्ट्री को सपोर्ट देने के बारे में बयान तो बहुत देते हैं, लेकिन जब बात सही में कदम उठाने की आती है, वास्तव में कुछ नहीं होता। उन्होंने कहा, ‘हम ऐसी स्थिति से गुजर रहे हैं, जहां इस उद्योग में लंबे समय से गिरावट आ रही है।

आर सी भार्गव ने इस भाषण में एक बहुत महत्वपूर्ण आंकड़ा दिया। उन्होंने कहा कि अगर वाहन उद्योग को अर्थव्यवस्था तथा विनिर्माण क्षेत्र को गति देना है। देश में कारों की संख्या प्रति 1,000 व्यक्ति पर 200 होनी चाहिए जो अभी 25 या 30 है। इसके लिए हर साल लाखों कार के विनिर्माण की जरूरत होगी।

इसका अर्थ यह है कि पैसेंजर कार मार्केट में ग्रोथ की बहुत बड़ी संभावना अभी भी मौजूद है। ऐसे में फोर्ड का जाना मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर प्रश्नचिन्ह लगने के समान है लेकिन नहीं, मीडिया इस घटना को ऐसा दिखा रहा है कि फोर्ड टाटा मोटर्स से डरकर भाग खड़ा हुआ।

मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर सी भार्गव ने इस भाषण में मंच पर उपस्थित अमिताभ कांत (नीति आयोग के सीईओ) से पूछा- क्या हम आश्वस्त हैं कि देश में पर्याप्त संख्या में ग्राहक हैं जिनके पास हर साल लाखों कार खरीदने के साधन हैं? क्या आय तेजी से बढ़ रही है? क्या नौकरियां बढ़ रही है?

हम जानते ही है कि छोटी बजट कारो की खरीद मुख्यतः मध्यम वर्ग करता है , अगस्त में 15 लाख नौकरी जाने की खबर आई है। यानी देश का मध्य वर्ग बुरी तरह से परेशानियों से जूझ रहा है। फोर्ड भी समझ गयी है कि इन तिलों में तेल नहीं है इसलिए उसने अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया है।

इन दो खबरों को देखकर आप समझ ही गए होंगे कि हकीकत क्या है और फ़साना क्या सुनाया जा रहा था। फोर्ड मोटर्स कंपनी ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में दुनिया के जानीमानी कम्पनी है, आज उसने अपना कामकाज भारत से समेटने की घोषणा कर दी है।

मोदी जी के पहले कार्यकाल में 2017 में दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी जनरल मोटर्स ने भारत मे अपना कामकाज बन्द किया, दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में हार्ले डेविडसन भी चली गयी और अब फोर्ड मोटर्स ने भी अपना कामकाज बन्द कर दिया।

आपको याद होगा कि कोरोना काल के शुरुआती दौर में जब चीन से बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपना कामकाज समेटने का फ़ैसला किया था तब उनमें से 1000 कंपनियों को भारत लाने की बात मोदी सरकार ने की थी लेकिन एक भी बड़ी कंपनी ने भारत में अपने प्लांट लगाने की घोषणा नहीं की।

पिछले साल चीन से निकल कर 16 जापानी कंपनियों ने बांग्लादेश में अपनी इंडस्ट्री लगाई है. ढाका से 30 किलोमीटर की दूरी पर होंडा कंपनी ने भी एक नया प्लांट लगाया लेकिन भारत मे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के बड़े बड़े दावे करने वाली मोदी सरकार एक भी बड़ी कंपनी को यहाँ लाने में सफल नहीं हो पाई।

ओर आज पता लगा है कि 22 हजार लोगों को रोजगार देने वाली फोर्ड भी भारत मे अपना कारोबार बंद कर रही है….. शीर्ष पद पर बैठे इस आदमी ने अर्थव्यवस्था को बिल्कुल बर्बाद कर दिया है, यह बात अब आपको समझ में आ गयी होगी।

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One comment on “फ़ोर्ड का भारत छोड़ने का फैसला, मीडिया का घटियापन शुरू”

  • lav kumar singh says:

    घर के पास स्थित कोई दुकान हो या बड़े शहरों में स्थित कोई मल्टीनेशनल कंपनी, बिजनेस करना कहीं आसान नहीं है। घर के पास बाजार में अक्सर देखने को मिलता है कि फलां दुकान में कुछ दिन पहले तक फ्रिज की दुकान थी, लेकिन फिर वहां साड़ी की दुकान खुल गई। फिर साड़ी की दुकान भी बंद हो गई और इन्वर्टर की दुकान शुरू हो गई। अब वहां जनरल स्टोर खुला हुआ है। …लेकिन बड़ी कंपनी हो तो नुकसान भी बड़ा होता है। इस मल्टीनेशनल कार कंपनी के बंद होने से करीब 50 हजार लोगों का रोजगार छिन जाने की आशंका है।
    https://stotybylavkumar.blogspot.com/2021/09/Ford-Car-company-stopped-production-in-India.html

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