श्याम मीरा सिंह-
जिस सुप्रीम कोर्ट से एक कदम आगे जाकर- “फ्रीडम ऑफ़ स्पीच” की रक्षा की उम्मीद की जाती है। वहाँ से इस तरह के आदेश आना, समझ में नहीं आता। न्यायपालिका को नैतिक ज्ञान देने से अधिक नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने पर ताक़त लगानी चाहिए।
ऐसे आदेशों से फ्रीडम ऑफ़ स्पीच की जो अब तक तरक़्क़ी हुई है वह बीस-तीस वर्ष पीछे चली जाती है।
दीप मोहन नेगी-
कार्टूनिस्ट Hemant Malviya की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट से राहत। बताते चले हैं कि हेमंत मालवीय को परिधान मंत्री के एक कार्टून को लेकर भाजपाइयों ने मध्य प्रदेश में पुलिस से शिकायत कर मुकदमा दर्ज किया था।
जिस पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत न देते हुए उनको हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ के लिए आदेश दिया था।
फकीरे के पिछले एक दशक से चल रहे तानाशाही राज में अब परिधान मंत्री का कार्टून बनाना कब से अपराध हो गया हैं? सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि हाई कोर्ट के संघी पृष्ठभूमि के जज की अलोकतांत्रिक आदेश की व्याख्या कर देश के सामने एक नजीर पेश करनी चाहिए।
ताकि देश में बचे-खुचे लोकतांत्रिक स्वायत्त संवैधानिक संस्थाओं पर आम लोगों का भरोसा बने रहे ओर लोकतंत्र की रक्षा हो सके।
डॉक्टर पथिक-
सुप्रीम कोर्ट ने Hemant Malviya भैया को राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। इसके साथ ही यह भी हिदायत दी है कि भविष्य में हेमंत भैया ने सोशल मीडिया पर कुछ विवादित बोला लिखा या कार्टून बनाया तो राज्य सरकार कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र रहेगी।
शायद हेमंत भैया से लिखित में माफी भी मंगवाई है। अर्थात सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत भैया को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब मोदी विरोध छोड़ो अन्यथा धर लिए जाओगे।
कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत भैया को रिहा तो कर दिया पर उनके हाथ बांध दिए।
हालांकि वह कार्टून जिसे देखकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनो भड़क गए मेरी नजरों में उस कार्टून में कुछ भी विवादित नही था।
वह कार्टून 2021 में बनाया गया था जब वैक्सीन अभियान जोरों पर था। उस कार्टून में मोदीजी टाइप का दिखने वाला बुजुर्ग किसी संघी टाइप के दिखने वाले युवा व्यक्ति के पिछवाड़े में वैक्सीन लगा रहा था और संघी युवा कह रहा था कि है शिव के अवतार तोहफा कबूल करो।
ये बात सभी जानते हैं कि शिवजी मृत्यु के देवता हैं,संहारक प्रवत्ति के हैं। और दबी जुबान अधिकांश लोग इस बात को स्वीकार भी करते हैं आए दिन युवाओं को होने वाले हार्ट अटैक के लिए वैक्सीन की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।
तो फिर जिस व्यक्ति ने जोर जबरदस्ती वैक्सीन अभियान चलाया उस व्यक्ति को मृत्यु के देवता का अवतार बताना गलत प्रतीत नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट का यह भी कहना था कि 50 की उम्र में हेमंत भैया में परिपक्वता नहीं आई है।
पता नहीं सुप्रीम कोर्ट की नजरों में परिपक्वता की परिभाषा क्या है? क्या सत्ता के अनुरूप फैसले देना और रिटायरमेंट के बाद भाजपा के समर्थन से राज्यसभा पहुंच जाना ही परिपक्वता कहलाती है।
खैर, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सत्ता के खिलाफ हर बोलने लिखने वाले के खिलाफ एक नजीर बनेगा। अब कोई भी फेसबुकिया क्रांतिकारी तेज चलेगा तो उसको इसी प्रकार सुप्रीम कोर्ट में खड़ा करके उसके हाथ बांधे जायेंगे माफीनामा लिखवाया जायेगा या फिर जेल भेज दिया जाएगा।
दया शंकर राय-
वैसे तो सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी अपने आप में संशोधन की मांग करती है..! अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई पाबंदी कैसे हो सकती है..! हो यह सकता है कि ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बेजा इस्तेमाल’ पर तार्किक पाबंदी उचित है..!
लेकिन सुप्रीम महोदय का यह विवेक कहाँ गया था जब केंद्र का एक मंत्री मंच से खुलेआम “गोली मारो सालों को..” बोल रहा था वह उसके बाद भी मंत्रिमंडल की शोभा बढ़ाता रहा.!
मध्य प्रदेश का एक मंत्री जो कर्नल सोफिया को आतंकवादियों की बहन बता रहा था उसे आपने मंत्री होने के नाते जमानत दे दी..! तो सुप्रीम योर ऑनर अब ऐसे ही मंत्री और ऐसी ही सरकारें नागरिकों , पत्रकारों और कार्टूनिस्टों की अभिव्यक्ति की आजादी तय करेंगी..? है न ..!
आप यह ही क्यों नहीं कह देते की अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ सत्ता को होती है..! और आप भी उंसके एक अंग के रूप में काम करने लगे हैं..!
मूल खबर…
कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय पर RSS की छवि खराब करने के आरोप में मुकदमा



