6 सितंबर 2017 को IBC24 न्यूज चैनल से बिना वजह निकाले गए एसोसिएट प्रोड्यूसर सत्येंद्र सिंह राजपूत ने 2 जुलाई 2024 को एक बार फिर से आईबीसी24 न्यूज चैनल ज्वाइन कर लिया। करीब सात साल पहले उन्हें कंपनी ने इसलिए निकाल दिया था, कि वे उस वक्त के एक्जिक्यूटिव एडिटर रहे अंशुमान शर्मा के फॉर्मेट पर फिट नहीं बैठ रहे थे।
कंपनी से बिना वजह नौकरी से निकाले जाने के बाद सत्येंद्र सिंह राजपूत ने करीब सात साल की लंबी लड़ाई लड़ी जिसमें दो बार श्रम न्यायालय और एक बार उन्हें हाईकोर्ट जाना पड़ा।
दरअसल पहली बार आईबीसी24 से अनुपस्थित रहने की वजह से श्रम न्यायालय ने निकाले गए कर्मचारी सत्येंद्र सिंह के पक्ष में एक पक्षीय फैसला देते हुए, नौकरी पर रखे जाने सहित पुराना वेतन देने का फैसला सुनाया था।
इसके बाद आईबीसी24 की ओर से कोविड का हवाला देते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट से इस ऑर्डर पर स्टे ले लिया गया, जिसपर हाईकोर्ट ने अप्रेल 2023 को फैसला दिया और आईबीसी24 पर 20 हजार रुपए का जुर्माना सहित केस को श्रम न्यायालय वापस भेज दिया, इसके साथ ही माननीय उच्च न्यायालय ने केस की सुनावाई के लिए 6 महीने की समय सीमा तय की, और श्रम न्यायालय में केस चलते तक लास्ट सैलरी बर्खास्तकर्मी को देने का आदेश दिया।
श्रम न्यायालय में केस की सुनवाई फिर से शुरू हुई और 19 जून 2024 को माननीय विभा पांडे की कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए असोसिएट प्रड्यूसर सत्येंद्र सिंह की बर्खास्तगी को अवैध माना, और बर्खास्त कर्मी को वापस 30 दिन के भीतर नौकरी पर रखने का अधिनिर्णय पारित किया, हालांकि इस फैसले में बर्खास्त कर्मी द्वारा चलाए जा रहे वेब पोर्टल फोर्थ आई न्यूज को मिलने वाले सरकारी विज्ञापन को कोर्ट ने उसकी आया माना और किसी भी तरह का मुआवजा और पुराना वेतन न देने का फैसला सुनाया।
श्रम न्यायालय के फैसले के बाद आईबीसी24 प्रबंधन ने मेल द्वारा अपने बर्खास्त कर्मी सत्येंद्र सिंह को वापस ज्वाइनिंग पर बुलाया और 2 जुलाई 2024 को समस्त फॉर्मेलिटी पूरी करने के बाद उन्हें वापस ज्वाइनिंग दे दी गई।
आईबीसी24 (एसबी मल्टीमिया) की ओर से जतिन दुबे (वरिष्ट प्रबंधक एचआर) कोर्ट में पेश हुए।



