चंडीगढ़/नई दिल्ली: पंजाब के सेवानिवृत्त डीआईजी (DIG) और 1964-बैच के आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू को पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें 2026 के गणतंत्र दिवस के अवसर पर सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान मिलने की घोषणा केंद्र सरकार ने की है।
सिद्धू (88) ने पुलिस सेवा से 1996 में रिटायर होने के बाद आराम की ज़िंदगी चुनने के बजाय स्वच्छता और समाज सेवा को अपना मिशन बना लिया। वे चंडीगढ़ के सेक्टर 49 स्थित IAS-IPS ऑफिसर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी में रहते हैं और पिछले कई वर्षों से रोज़ाना सुबह लगभग 6 बजे सड़कों की सफ़ाई स्वयं करते हैं।
उनकी रोज़मर्रा की दिनचर्या में कचरा उठाना, गली-मोहल्ले और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना शामिल है। कई बार वे सैनिटेशन कर्मचारियों की गाड़ी उधार लेकर कचरा इकट्ठा करते हैं और निर्धारित स्थानों पर उसे सही ढंग से नष्ट करते हैं।
सिद्धू का मानना है कि स्वच्छता को अपनाना हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने कहा है कि स्वच्छ शहर से ही स्वच्छ सोच जन्म लेती है और नागरिक का ढंग यही है कि वह अपने आसपास की साफ़-सफाई का ध्यान रखे।
उनके इस अनूठे सामाजिक योगदान को पहले सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के माध्यम से आलोचना और प्रशंसा दोनों मिली थी, लेकिन बाद में वीडियो ने देश भर में उन्हें प्रेरणास्रोत के रूप में पहचान दिलाई।
पद्म श्री सम्मान पाने के बावजूद सिद्धू का दैनिक जीवन बदल नहीं गया—वे आज भी बिना किसी दिखावे के सुबह-शाम सड़कें साफ़ करते हैं, यह दिखाते हुए कि सेवा की कोई उम्र नहीं होती।
यह सम्मान न सिर्फ उनके व्यक्तिगत समर्पण के लिए है, बल्कि नागरिकता, अनुशासन और समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा की भावना को भी राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देता है।
88 साल के पंजाब के पूर्व डीआईजी इंद्रजीत सिंह सिद्धू 1964 बैच के IPS अधिकारी थे, जो 1996 में रिटायर हुए। वे चंडीगढ़ के सेक्टर 49 (IAS-IPS ऑफिसर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी) में रहते हैं। वे पिछले 10 से ज्यादा सालों से सैनिटेशन कार्ट उधार लेकर हर दिन सुबह 6 बजे सड़कों की सफाई करते हैं।
भारत सरकार की तरफ इन्हें अब पद्म श्री पुरुस्कार मिलेगा। इंद्रजीत सिंह वास्तविक हकदार हैं। -राजेश साहू, पत्रकार, दैनिक भास्कर




