नोएडा में बंद हो चुके India ahead channel को भोपाल से चलाने की कोशिश नाकाम साबित हुई…अप्रैल में बड़ी मुश्किल से कई कोशिशों के बाद लॉन्च हुए इस चैनल को राहु केतु मिलकर खा गये.. इंडिया अहेड का लाइसेंस मिलने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि शायद चैनल चल जाए लेकिन ऐसा हो नहीं सका.. और आख़िरकार ताला डल गया..
सबसे पहले चैनल के मालिक डॉ संतोष राय को साधुवाद की उन्होंने 8-9 महीनों में क़रीब 3 करोड़ रुपए फूंक दिए.. सागर के रहने वाले राय साहब को चैनल खोलने का ऐसा चस्का लगा था की क्या कहें. और इसी का सबसे पहले फ़ायदा उठाया नरेंद्र वर्मा ने.. बड़े बड़े वादों के साथ घटिया सेटअप और मशीनें लगवाईं.. अपने साथ अपने परिचितों और उनके परिजनों को नौकरी दी.. सच्चाई पता लगते ही मालिक ने सभी को बाहर का रास्ता दिखा दिया.
फिर आये यूपी के अकील सिद्दीक़ी.. चैनल का लाइसेंस यही लेकर आये. आंध्र प्रभा वाले गौतम मुत्था से.. दिल्ली शराब घोटाले में नाम आने की वजह से चैनल बैन हो गया था.. अकील ने इसी से संपर्क करके डील सेट की.. मालिक को बड़े बड़े सपने दिखाए.. ख़ैर पोल खुली, लेकिन मालिक की पत्नी विनीता राय ने सम्भाल लिया.
दरअसल नरेंद्र वर्मा वाले घटना के बाद मालिक ने अपनी पत्नी को चैनल में बैठाना शुरू किया.
बाद में सागर से बुलाए जाते हैं लकी राजपूत. इसने भी अपने लोगों को डबल सैलरी पर बुला लिया. ख़ुद का HR भी रख लिया.. लकी जी की लंबी लंबी डींगें हांकती कहानियाँ!
सैलरी देने का इसने वादा किया लेकिन दे नहीं पाया.. दो महीने पेंडिंग . कर्मचारी परेशान और लकी तारीख़ पर तारीख़ दिये जा रहा था.. एक दिन न्यूज़रूम में बवाल हो गया .. अगले दिन से ऑफिस से ग़ायब.. कर्मचारियों ने भी काम बंद कर दिया.. ताला लग गया..
अब सुना है की चैनल बिक गया है.. ख़ैर सबको नौकरी मिल जाए यहीं दुआ है.. तो कुल मिलाकर डॉ राय चैनल चला नहीं पाये, उनकी पत्नी का ज़ोर भी नहीं चला.. आगे राम जाने.. उनकी डॉक्टरी चलती रहे… वो भी सोच रहे होंगे काहे झमेले में फँसे.. इति श्री India ahead कथा..
(एक पत्रकार द्वारा भेजे गए लंबे चौड़े पत्र का सम्पादित अंश)



