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उत्तर प्रदेश

जागरण समूह की चोरी-धोखाधड़ी पकड़ी गई, हाईकोर्ट ने रेव3 मल्टीप्लेक्स तुरंत गिराने के निर्देश दिए

जागरण समूह से लोहा लेने वाले बॉबी शर्मा न्याय में देर है अंधेर नहीं

कानपुर के आरटीआई एक्टिविस्ट और समाजसेवी रॉबी शर्मा ने बड़ी जीत हासिल की है. कोर्ट में उनकी लंबी लड़ाई रंग लाई. हाईकोर्ट ने जागरण समूह की संपत्ति रेव3 मल्टीप्लेक्स को तुरंत गिराने के निर्देश दिए हैं. जागरण के मालिकाना हक वाली संपत्ति रेव थ्री के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद हड़कंप मचा हुआ है.

कोर्ट ने रेव थ्री के विवादित हिस्से को गिराने का आदेश देने की बात कही है. रॉबी शर्मा ने इस बाबत जनहित याचिका दायर की थी. आरोप है कि जागरण के मालिकों ने शमशान घाट की जमीन और एक तरफ की पूरी सड़क पर कब्जा कर रेवथ्री मल्टीप्लेक्स का निर्माण किया. इस बाबत रॉबी शर्मा ने अपने फेसबुक वॉल पर भी लिखा है, जिसे नीचे पढ़ सकते हैं…

Robby Sharma : The Honorable High Court at Allahabad has on 25 march 2019 directed State of Uttar pradesh and KDA to immediately without any delay demolish Rave 3 multiplex and restore the Ayurvedic garden at the cost of Rave 3 people. 15 lakh cost has also been imposed on them. The judgment was delivered in PIL no. 20999 of 2002 in which I was also a petitioner. Judgment delivered by bench of honorable justice Sudhir Agarwal and honorable justice Ajit kumar on 25 March 2019.

रिट पीआईएल-20999, वर्ष 2002 में रेव3 पर हाईकोर्ट के 25 मार्च 2019 के फैसले को पूरा पढ़ने पर तत्कालीन भाजपा सरकार लालजी टंडन, मुख्यमंत्री के सचिव आदि की संलिप्तता का जिक्र दिखता है. इन लोगों ने जागरण समूह के अवैध निर्माण कार्य में अप्रत्याशित रुचि दिखाते हुए अवैध निर्माणकर्ता की मदद की. वैसे तत्कालीन डीएम बीएस भुल्लर, जो आज कल डायरेक्टर जनरल सिविल एविशन हैं, और तत्कालीन उपाध्यक्ष केडीए कमिश्नर आदि सभी का रोल बहुत निंदनीय था. डीएम ने तो अपने पत्र जो रेव3 के कहने पर शासन को लिखे, उनकी प्रतियों पर दस्तखत करके, इन्हें थमा दिए जबकि डिस्पैच नंबर तक नहीं पड़ा था। जहां तक मै समझता हूं ये पत्र रेव 3 वालों ने खुद अपने यहां से टाइप करा कर डी ऐम के दस्तखत कराये थे। बाद में डिस्पैच नंबर डाल कर सीधे भी शासन को भेजा। आक्शन में शामिल रेव3 की दो सहयोगी फर्मों ने तो ड्राफ्ट की जगह एक एक करोड़ के चेक लगाये। ऐसी निविदा किसी भी प्रकार से स्वीकार ही नहीं की जा सकती। ऐसे सैकड़ों मुद्दे हैं जो याचिका में हैं। रेव इंटरटेनमेंट को आवंटन से कुछ समय पहले ही भूमि हथियाने को इनकार्पोरेट किया गया था।

इस प्रकरण को छापने-दिखाने से मीडिया हाउसों ने परहेज किया क्योंकि यहां मामला चोर-चोर मौसेरे भाइयों का हो जाता है… पर कुछ एक मीडिया हाउसों का जमीर जिंदा है… देखिए हिंदुस्तान अखबार के कानपुर संस्करण में छपी खबर…

कोर्ट के आर्डर की पूरी कॉपी भड़ास के पास है जिसे डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें…

Immediately Demolish RAVE3 Multiplex Court Order


भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह की रिपोर्ट.
https://www.youtube.com/watch?v=lgmmX8bRjl8
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5 Comments

5 Comments

  1. Puneet sharma

    March 26, 2019 at 6:36 pm

    Bahut khub aisa hi hona chahiye

  2. आसिम अज़हर

    March 26, 2019 at 9:38 pm

    मेरा मानना है कि आज के दौर में अल्लाह के बाद अगर इन्साफ की उम्मीद है तो वह कोर्ट है। अगर यह कोर्ट या अदालत नही होती तो कुछ लोग इन्साफ के लिये तरसते ही रह जाते ।

  3. Vikas Gupta

    March 27, 2019 at 4:53 pm

    सही है न्याय मेें देर हैं अंधेर नहीं

  4. PANKAJ KUMAR

    March 27, 2019 at 10:43 pm

    Excellent Job .
    We r r proud of you and your zeal.
    Thanks again for printing this valuable News.
    Good luck bhadas4media.com

  5. S. C. Parihar

    March 27, 2019 at 11:46 pm

    माना कि माननीय उच्च न्यायलय ने गिराने के आदेश दे दिये, देखना ये है कि इसका पालन तब और कैसे होता है?

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