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जागरण, उजाला और हिन्दुस्तान का पहाड़ के इस पत्रकार ने बायकॉट कर दिया, पढ़ें क्यों?

गुणानंद जख़मोला-

मैंने तय कर लिया है कि अब घर पर आने वाले सभी तीन हिन्दी अखबार बंद कर दूंगा। जब इसमें प्रदेश हित की कोई खबर ही नहीं होती है तो सरकार पुराण पढ़ने का क्या लाभ?

डीपीआर की खबरें मेरे पास भी आती ही हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड, गणेश जोशी के भ्रष्ट होने, डिमरी के पिटने, पहाड़ से पलायन होने, यूपीएल में बाहरी खिलाड़ियों के खेलने, डब्बू के एकाएक सेठ हो जाने की खबरें कहीं नजर नहीं आती। न ही यह कि रेखा आर्य ने जो केस बरेली में दर्ज किया, उसका कोई फालोअप। न 500 करोड़ में सरकार गिराने की सदन में उठाई गयी बात का फाओअप।

विधायक राम सिंह कैडा, फैड़ा, डब्बू, डिब्बा, भ्रष्ट जोशी का गुणगान पढ़ने के लिए सात रुपये प्रति अखबार क्यों खर्च करूं? मेरा ये मानना है कि अब हिन्दी अखबारों का बहिष्कार होना चाहिए। बायकॉट हिन्दी अखबार अमर उजाला, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान अभियान चलना चाहिए।

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