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उत्तर प्रदेश

पत्रकारिता के 50 वर्ष : निष्ठा, निर्भीकता और प्रेरणा की मिसाल हैं कानपुर के अरुण अग्रवाल

आसिफ खान-

कानपुर के पत्रकारिता जगत के लिए आज का दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। आज हम उस शख़्सियत की गौरवशाली यात्रा का उत्सव मना रहे हैं, जिन्होंने अपने जीवन के पचास वर्ष सत्य, सटीकता और साहस की स्याही से पत्रकारिता के पन्नों को रोशन करने में समर्पित कर दिए। श्री अरुण अग्रवाल, यह नाम कानपुर ही नहीं, बल्कि हिंदी पत्रकारिता के विस्तृत पटल पर निष्ठा, निर्भीकता और निरंतरता का पर्याय बन चुका है। 19 अप्रैल, 1975 को हिंदी दैनिक ‘आज’ के साथ अपनी कलम का सफर शुरू करने वाले अरुण जी ने आज अपनी पत्रकारिता यात्रा के 50 वर्ष (गोल्डन जुबली) को पूरा किया है, जो अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है।

‘आज’ के साथ एक ऐतिहासिक शुरुआत

यह एक अद्भुत और सुखद संयोग ही है कि जिस दिन अरुण जी अपनी पत्रकारिता के पचास वर्ष पूर्ण कर रहे हैं, लगभग उसी समय (20 अप्रैल 1975) उनके पहले संस्थान, दैनिक ‘आज’ ने भी कानपुर से अपने प्रकाशन के पचास वर्ष पूरे किए हैं। अरुण जी उन भाग्यशाली और कर्मठ पत्रकारों में से एक थे जो ‘आज’ के पहले अंक से ही इसके अभिन्न अंग बने। वह केवल एक कर्मचारी नहीं, बल्कि उस नींव के पत्थर थे जिसने अखबार को शहर की आवाज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी युवावस्था के जोश और सीखने की ललक के साथ उन्होंने ‘आज’ में पत्रकारिता के हर पहलू को जिया और अपनी रिपोर्टिंग से अखबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अमूल्य योगदान दिया।

निर्भीक रिपोर्टिंग का प्रतीक: बेहमई कांड की पहली कवरेज

अरुण अग्रवाल

अरुण अग्रवाल की पत्रकारिता केवल खबरों को प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि सच को सबसे पहले और पूरी प्रामाणिकता के साथ सामने लाना रही है। इसका ज्वलंत उदाहरण 14 फरवरी, 1981 को घटी हृदयविदारक बेहमई कांड की रिपोर्टिंग है। उस दौर में जब संचार माध्यम सीमित थे और खबरें अगले दिन ही अखबारों तक पहुंच पाती थीं, अरुण जी ने अपनी असाधारण रिपोर्टिंग क्षमता और नेटवर्क का परिचय देते हुए ‘आज’ अखबार में इस घटना की विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट सबसे पहले प्रकाशित करवाई। जहाँ अन्य बड़े अखबार अगले दिन इस खबर को छाप पाए, वहीं अरुण जी की इस साहसिक और त्वरित रिपोर्टिंग ने न केवल ‘आज’ अखबार को एक बढ़त दिलाई, बल्कि उनकी पेशेवर काबिलियत पर भी मुहर लगा दी। उनकी इस उपलब्धि को तत्कालीन संपादक, स्वर्गीय श्री विनोद शुक्ला जी ने न केवल सराहा, बल्कि उन्हें पुरस्कृत कर उनके हौसले को और बुलंद किया। यह घटना अरुण जी की निर्भीकता और खबर की नब्ज पकड़ने की उनकी अद्वितीय क्षमता का प्रतीक बन गई।

नवाचार की मशाल: स्थानीय टेलीविजन का सूत्रपात

अरुण जी की दृष्टि केवल प्रिंट मीडिया तक ही सीमित नहीं रही। समय के साथ बदलते तकनीक और माध्यमों की क्षमता को उन्होंने बखूबी पहचाना। वर्ष 2000 में, जब केबल टीवी का चलन बढ़ रहा था, उन्होंने कानपुर में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए शहर के पहले लोकल टीवी चैनल ‘लेटेस्ट कवरेज न्यूज़’ की शुरुआत की। यह एक साहसिक और दूरदर्शी कदम था, जिसने स्थानीय खबरों को सीधे लोगों के घरों तक पहुंचाने का एक नया माध्यम प्रदान किया। देखते ही देखते, ‘लेटेस्ट कवरेज न्यूज़’ अपनी सटीक और त्वरित कवरेज के कारण कानपुर के निवासियों की पहली पसंद बन गया। यह अरुण जी की उद्यमशीलता और पत्रकारिता के प्रति उनके जुनून का प्रमाण था।

राष्ट्रीय पटल पर चमक: एनडीटीवी के साथ अनवरत यात्रा

अरुण अग्रवाल की प्रतिभा और अनुभव की गूंज जल्द ही राष्ट्रीय मीडिया तक पहुंची। वर्ष 2003 में, देश के प्रतिष्ठित समाचार चैनल एनडीटीवी के यूपी प्रभारी मरहूम कमाल खान जी ने उनकी योग्यता को पहचाना और उन्हें कानपुर के संवाददाता के रूप में नियुक्त किया। यह उनके करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव था। तब से लेकर आज तक, पिछले दो दशकों से भी अधिक समय से, वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ एनडीटीवी के लिए रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आज 72 वर्ष की आयु में भी उनका जोश, उनकी ऊर्जा और खबरों के प्रति उनका जुनून युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उनका एनडीटीवी के साथ लंबा जुड़ाव उनकी विश्वसनीयता और व्यावसायिकता का प्रमाण है।

‘चलता फिरता पत्रकारिता का गुरुकुल’

अरुण अग्रवाल सिर्फ एक पत्रकार नहीं, वे स्वयं में एक संस्थान हैं। कानपुर में आज पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय कई युवा पत्रकार गर्व से कहते हैं कि उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में अरुण जी से मार्गदर्शन प्राप्त किया है। उनका कार्यालय और उनका सान्निध्य नवोदित पत्रकारों के लिए किसी गुरुकुल से कम नहीं रहा, जहाँ उन्होंने न केवल खबरों की बारीकियां सीखीं, बल्कि पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों को भी आत्मसात किया। उनकी सहजता, अनुभव साझा करने की तत्परता और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की उनकी प्रवृत्ति ने उन्हें सचमुच ‘चलता फिरता पत्रकारिता का गुरुकुल’ बना दिया है। उन्होंने अनगिनत पत्रकारों को तराश कर उन्हें पत्रकारिता जगत के लिए तैयार किया है।

विरासत और प्रेरणा

पचास वर्षों (गोल्डन जुबली) की यह यात्रा सिर्फ समय का माप नहीं, बल्कि यह निष्ठा, साहस, नवाचार और समर्पण की एक अनूठी गाथा है। अरुण अग्रवाल ने अपनी कलम की ताकत से न केवल घटनाओं को दर्ज किया, बल्कि समाज को आईना दिखाया, व्यवस्था पर सवाल उठाए और जन सरोकारों को आवाज दी। उनकी पत्रकारिता हमेशा तथ्यों पर आधारित, निष्पक्ष और जनहितैषी रही है। वे उन विरले पत्रकारों में से हैं जिन्होंने व्यावसायिकता के साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन बनाए रखा।

शुभकामनाएं

आज जब श्री अरुण अग्रवाल अपनी पत्रकारिता के 50 वर्ष (गोल्डन जुबली) का अनुभव याद कर रहे हैं, तो पूरा कानपुर का पत्रकारिता जगत उन्हें नमन करता है। उनके इस शानदार सफर के लिए उन्हें हार्दिक बधाई। उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर सक्रिय जीवन की कामना करते हैं। अरुण जी की यह स्वर्णिम यात्रा न केवल कानपुर के लिए, बल्कि संपूर्ण हिंदी पत्रकारिता जगत के लिए एक गौरव का विषय है और आने वाली पीढ़ियों के पत्रकारों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनका जीवन और कार्य यह सिखाता है कि सच्ची पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक जुनून है, एक मिशन है, जो समाज को बेहतर बनाने की दिशा में अनवरत चलता रहता है।

आज अखबार के विवेक खरे, रंजय सिंह आजतक, अशोक सिंह टाइम्स नाउ, श्री लूथड़ जी द पायनियर, दुर्गेश चौहान वरिष्ठ पत्रकार, अंजनी निगम वरिष्ठ पत्रकार व आदि पत्रकारों ने बधाई दी व कहा कि अरुण अग्रवाल जी पत्रकारिता के क्षेत्र में ऐसे ही सक्रिय रहें।

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