
संजय कुमार सिंह
आज सुबह-सुबह एक्स पर एएनआई का एक वीडियो दिखा। इसमें संवाददाता राहुल गांधी से कहता है, आपने कहा, “नरेन्दर सरेंडर”। इस पर काफी बवंडर मचा हुआ है। क्या कहेंगे? … राहुल गांधी पूछते हैं, हां, आपका सवाल क्या है? …. ट्रम्प ने 11 बार कहा है कि उन्होंने युद्धविराम के लिए नरेन्द्र मोदी पर दबाव डाला …. नरेन्द्र मोदी को कहना चाहिये कि ट्रम्प झूठ बोल रहे हैं। जाहिर है, ऑपरेशन सिन्दूर (यानी पाकिस्तान से युद्ध) को अचानक खत्म किये जाने और राहुल गांधी के ऑपरेशन सरेंडर कहने पर बवंडर मचा हुआ है। यह एएनआई की खबर है, रिपोर्टर ने ही राहुल गांधी को बताया है पर खबर अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं के बराबर है। यह वैसे ही है कि बैंगलोर में हादसा हो गया तो भाजपा मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगने लगी लेकिन कर्नाटक सरकार ने जो कार्रवाई की है वैसी कार्रवाई पहलगाम हादसे के बाद भी नहीं की गई है। भाजपा शासित राज्यों में नहीं होता है वह अलग बात है और इसकी चर्चा कल यहां हो चुकी है। आज इन सबके बावजूद अखबारों में प्रधानमंत्री का ऑपरेशन सिन्दूर छाया हुआ है। अमर उजाला की आज की लीड का शीर्षक है, पाकिस्तान ने इंसानियत व कश्मीरियत पर किया कायरना हमला…. हमने वहां कयामत ला दी। आप समझ सकते हैं कि ऑपरेशन सिन्दूर के नाम पर पाकिस्तान से युद्ध, ट्रम्प का दावा कि उनने युद्ध विराम कराया, उसपर कान फाड़ू सन्नाटा, राहुल गांधी के नरेन्दर सरेंडर पर बवंडर मचे होने की खबर नहीं होना और प्रधानमंत्री का दावा कि कयामत ला दी। वह भी जनसभा में, संसद का विशेष सत्र नहीं बुलायेंगे और सर्वदलीय सभा में नहीं गये तब भी। दूसरी ओर, बिहार में चुनाव प्रचार ज्यादा जरूरी था। फिर भी वे जो दावा कर रहे हैं उसे अमर उजाला ने पहले पन्ने पर तान दिया है।
इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर लीड नहीं है और शीर्षक को हिन्दी में लिखा जाये तो इस प्रकार होगा, घाटी के लिए प्रमुख रेल पुल का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान पर निशाना साधा : पहलगाम का आतंकी हमला जम्मू और कश्मीर की आजीविका पर भी हमला था। ऐसा ही शीर्षक हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का है, मोदी ने जम्मू व कश्मीर के प्रमुख रेल लिंक का उद्घाटन किया, पाकिस्तान पर निशाना साधा। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर सेकेंड लीड के साथ है। शीर्षक है, कनाडा के प्रधानमंत्री के कहने पर मोदी ने जी7 के लिए निमंत्रण स्वीकार किया। जम्मू कश्मीर रेल पुल के उद्घाटन की खबर यहां अलग से नहीं है और इसी सेकेंड लीड के साथ एक तस्वीर के कैप्शन में पुल के उद्घाटन, ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना करने और जम्मू और कश्मीर को फिर से राज्य बनाने की मुख्यमंत्री की उमर अब्दुल्ला की मांग है। इसमें पाकिस्तान से प्रधानमंत्री की ‘दुश्मनी’ और ट्रम्प के हस्तक्षेप पर युद्ध विराम की चर्चा और कथित बंवडर की खबर नहीं है। अमर उजाला की लीड वाली खबर द हिन्दू में दो कॉलम की सेकेंड लीड है। शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने जम्मू व कश्मीर में प्रमुख रेल परियोजनाओं का उद्घाटन किया, पाकिस्तान पर हल्ला बोले। द टेलीग्राफ की खबर के दो शीर्षक है, ‘दूर का एक सपना : पटरी पर’ और दूसरा ‘कश्मीर अब रेल से जुड़ा है। दि एशियन एज का शीर्षक अमर उजाला जैसा ही है, ऑपरेशन सिन्दूर पाकिस्तान को हमेशा अपमानजनक हार की याद दिलाता रहेगा :प्रधानमंत्री। नवोदय टाइम्स में भी दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल के उद्घाटन की खबर लीड है। शीर्षक भले, ‘…जनाब अब चिनाब कहिये,’ है। हालांकि आतंकी हमला, विकास में बाधा और मोदी जैसे विषय भी हैं। आज जब ज्यादातर अखबारों में दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल के उद्घाटन की खबर लीड और सेकेंड लीड है तो कइयों में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में कमी किये जाने की खबर लीड और सेकेंड है। इनमें टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिन्दू और हिन्दुस्तान टाइम्स हैं।
अमर उजाला ने न सिर्फ प्रधानमंत्री के दावे को प्रमुखता से छाप कर उनका प्रचार किया है बल्कि ‘सामर्थ्य का जयघोष’ में यह भी बताया है कि, हम हमेशा श्रद्धाभाव से कहते आये हैं कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक…. अब यह महज भावना नहीं, बल्कि रेलवे नेटवर्क के लिये भी हकीकत बन गया है। कहने की जरूरत नहीं है कि अमेरिका में अदाणी के बारे में पूछे जाने पर नरेन्द्र मोदी ने वसुधैव कुटम्बकम कहा था। सवाल भ्रष्टाचार पर था और ना खाउंगा, ना खाने दूंगा कह चुके प्रधानमंत्री का जवाब था, हमारे संस्कार और संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की है। हम पूरे विश्व को अपना एक परिवार मानते हैं। हर भारतीय को मैं अपना मानता हूं। दूसरी बात है कि ऐसे व्यक्तिगत मामलों के लिए दो देशों के मुखिया न मिलते हैं, न बैठते हैं और न बात करते हैं।” यानी भ्रष्टाचार व्यक्तिगत मामला है और ऐसे प्रधानमंत्री का समर्थन तथा प्रचार न करो तो देश विरोधी करार दिये जाने का खतरा है। और इसके लिए पूरी ट्रोल सेना है फिर भी प्रचार में कोई कमी नहीं है। और बात इतनी ही नहीं है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है, पाकिस्तान मानवता का विरोधी…. ऑपरेशन सिन्दूर उसे शर्मनाक शिकस्त की याद दिलाता रहेगा। देश की हालत पर सर्वदलीय सभा में नहीं जाने और संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग नहीं सुनने वाले प्रधानमंत्री के इस दावे का क्या मंतलब जब पाकिस्तान 1971 को नहीं याद कर रहा है या कर भी रहा है तो भारत और भारतीय नागरिकों के प्रति उसके रुख में बदलाव नहीं आया है और अगर उससे नहीं आयेगा तो ऑपरेशन सिन्दूर से आयेगा? ठीक है कि प्रधानमंत्री ने कहा है तो खबर है लेकिन संपादक किसलिये होता है और किस बात की तनख्वाह पाता है? तनख्वाह वह खबर देने की पाता है और इसमें खबर यह है कि नरेन्द्र मोदी ने दुनिया के सबसे ऊंचे पुल का उद्घाटन किया। ऑपरेशन सिन्दूर और उसकी कथित कामयाबी नहीं।
नरेन्द्र मोदी ने दुनिया के सबसे ऊंचे पुल का उद्घाटन किया – देशबंधु का शीर्षक है और यह खबर यहां लीड नहीं है। देशबंधु की लीड का शीर्षक है, बिहार में कानून व्यवस्था बदहाल। इसके साथ खबर यह है कि राहुल गांधी ने बिहार में आयोजित संविधान सुरक्षा सम्मेलन में यह बात कही और उसमें यह भी बताया कि नीतिश और भाजपा ने भाजपा ने बिहार को क्राइम कैपिटल ऑफ इंडिया बना दिया है। मैं नहीं कहता कि आज की खबरों में यही लीड है। लेकिन रोज राजा का बाजा बजाने वाले अखबारों को चाहिये कि किसी दिन राज्य और जनता की खबर को भी महत्व दें। देशबंधु ने अपनी इस खबर के साथ ‘ट्रम्प के दबाव में हुए थे नरेन्दर सरेंडर’ भी छापा है। अगर यह खबर दूसरे अखबारों में भी न हो तो कहा जा सकता है कि देशबंधु राहुल गांधी का पक्ष ले रहा है, उनकी खबरें छाप रहा है। या उनका प्रचार कर रहा है। पर जैसा मैंने पहले कहा, एक्स पर मुद्दा है। देशबंधु ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की खबर तो छापी ही है। और यह संतुलित या सामान्य पत्रकारिता है जबकि 2014 के बाद से पत्रकारिता को पक्ष विपक्ष में बांटने की कोशिश चल रही है और कामयाब रही है। निन्दा करते हैं तो प्रशंसा भी कीजिये – शैली के जुमलों से पत्रकारिता का उद्देश्य भी बदल गया है और निष्पक्ष पत्रकारों पर इतना दबाव बना दिया गया है कि उन्हें स्वतंत्र दिखने के लिए कभी-कभी सरकार की चापलूसी भी करनी पड़ती है। हालांकि, यह सब अलग मुद्दा है।



