कमाई बढ़ी तो शौक भी बढ़े और उसकी शामें जाम के नाम होने लगीं। धीरे-धीरे हालत यह हुई कि वह दिन-दोपहर से लेकर रात तक शराब के नशे में धुत रहने लगा। इस बीच कई बार उसका एक्सीडेंट हुआ और अंततः नौकरी भी छूट गई…

विनय मौर्या-
जिंदगी कब करवट ले, कब राजा को रंक और रंक को राजा बना दे, कुछ कहा नहीं जा सकता। इसमें कुछ ऊपरवाले की इच्छा होती है और कुछ हमारे कर्मों का नतीजा।
चित्र में दिख रहा शख्स आपको पागल नज़र आ रहा होगा—और आपका सोचना गलत भी नहीं है। यह वाकई मानसिक रूप से विक्षिप्त हो चुका है।

यह कैसे हुआ, यह जानने के लिए हमें दो दशक पीछे जाना होगा। मेरे पड़ोस की कॉलोनी में एक संभ्रांत क्षत्रिय परिवार रहता था। घर के मुखिया संभवतः सरकारी सेवा में थे। उनके दो-तीन बेटियों के बीच यह इकलौता बेटा था, जो उस वक्त हमेशा टिप-टॉप रहता था।
घर में किसी चीज़ की कमी नहीं थी। बेटियों की शादियाँ होती गईं और बेटा पढ़-लिखकर मेडिकल रिप्रेज़ेंटेटिव (एमआर) बन गया। तय समय पर उसकी शादी भी हुई और कालांतर में वह बच्चों का पिता भी बन गया।
कमाई बढ़ी तो शौक भी बढ़े और उसकी शामें जाम के नाम होने लगीं। धीरे-धीरे हालत यह हुई कि वह दिन-दोपहर से लेकर रात तक शराब के नशे में धुत रहने लगा। इस बीच कई बार उसका एक्सीडेंट हुआ और अंततः नौकरी भी छूट गई।
फिर एक दिन उसकी माँ का किसी दुर्घटना में निधन हो गया और कुछ समय बाद पिता भी चल बसे।
अब वह पूरी तरह नशे की गिरफ्त में आ चुका था। शराब से आगे बढ़कर उसने गांजा, भांग और नशीली दवाइयों का सेवन शुरू कर दिया। मेडिकल फील्ड का होने के कारण उसे इन दवाओं की जानकारी थी, इसलिए सस्ते नशों का आदी होता चला गया।
इस बीच पत्नी, पति की नशे की आदत से परेशान होकर बच्चों को लेकर मायके चली गई। वह आदमी नशे का इतना गुलाम हो गया कि करोड़ों के मकान को भी एक बिल्डर को एग्रीमेंट पर चढ़ा दिया ताकि अपनी ज़रूरतें पूरी कर सके। अंततः नशे ने उसे पूरी तरह बर्बाद कर दिया और वह मानसिक रूप से अस्वस्थ होकर इस हालत में आ गया।
अब वह सड़कों पर सोता है, लोगों से मांगकर या कहीं से पाकर खाता है, बड़बड़ाता और चिल्लाता रहता है। पत्नी और बच्चों को जब पता चला कि मकान का एग्रीमेंट हो गया है तो उन्होंने अदालत में चुनौती दी और उस पर स्टे ले लिया।
यह देखने में बेहद उम्रदराज़ लगने वाला व्यक्ति वास्तव में मुझसे उम्र में छोटा है।
कहने का तात्पर्य यही है कि नशा चाहे कोई भी हो, अगर उसकी अति होगी तो उसके दुष्परिणाम भी ज़रूर सामने आएंगे।



